Tag Archives: Aatmanirbhar Bharat

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 17th 2020

  1. Meet 5 Dalit feminist writers who are sparking conversations on casteism in the country

Key points:

  1. Gender and identity politics is important while discussing the experiences of Dalit women in the country. Here are five women who are taking the conversations forward with their writings.
  2. Despite many developments and rise in the standard of living, India is not too modern to believe and practice equality for all, as enshrined in the constitution of the world’s largest democracy. In many parts of India, society does not see lower castes and Dalit people as equals. They are bound by traditional roles they are supposed to play in a society, according to ancient texts. Discussions around caste-based atrocities became a pressing issue after four upper caste men were accused of raping a 19-year-old Dalit woman who succumbed to her injuries. The victim’s body was cremated by the police without her family’s consent and this created a huge furore.
  3. Many argue that the horror of injustice goes to show a lack of dignity and exploitation of lower caste people, especially women in India.

(Your Story, 17 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • बेंगलुरु: नारियल की सूखी पड़ी पत्तियों से हर रोज़ 10,000 स्ट्रॉ बनाता है यह स्टार्टअप

Key points:

  1. Evlogia Eco Care, बेंगलुरू की एक स्टार्टअप कंपनी है। इसकी शुरूआत 2018 में हुई थी। यह संस्था नारियल के सूखे पत्तों से ‘Kokos Leafy Straws’ नाम से पर्यावरण के अनुकूल स्ट्रॉ बनाती है।
  2. कच्चे माल को तैयार करने से लेकर अंतिम उत्पाद की पैकेजिंग तक का पूरा काम महिलाएं ही करती हैं। मणिगंदन कहते हैं कि स्ट्रॉ को आधे घंटे तक गर्म पेय पदार्थों में और 6 घंटे तक ठंडे पेय पदार्थों में रखा जा सकता है।
  3. स्टार्टअप के संस्थापक मणिगंदन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम कर चुके हैं। 2016 में उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर छोड़कर उद्यमी बनने का फैसला किया। उस दौरान उन्होंने टेनको नाम की एक कंपनी शुरू की। यह कंपनी नारियल को ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेचती थी।
  4. मणिगंदन ने कंपनी की स्थापना 2018 में अपनी पत्नी राधा मनीगंदन के साथ मिलकर की थी। इस दंपत्ति ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम द्वारा समर्थित सीड इनवेस्टमेंट से इसे स्थापित किया था। जनवरी 2019 में केवल एक कर्मचारी के साथ स्ट्रॉ का उत्पादन शुरू हुआ। आज इस कंपनी में 15 कर्मचारी काम करते हैं।
  5. पहले, कंपनी 100 स्ट्रॉ प्रतिदिन बनाती थी। लेकिन अब हर दिन 10,000 स्ट्रॉ बनाया जा रहे हैं। (The Better India, 17 October 2020) News Link
  • Bengaluru Startup’s ‘Charzer’ Lets Electric Bikes Charge in Stores For Rs 25/Hour

Key points:

  1. By the end of October 2020, 100 IoT-powered electric vehicle charging stations will go live in Bengaluru, thanks to ‘Charzer’.
  2. By the end of October 2020, 100 IoT-powered electric vehicle charging stations will go live in Bengaluru thanks to ‘Charzer’, a startup established by Sameer and his team in February 2020. Called Kirana Charzers, the Bengaluru-based startup claims these low cost, compact and low maintenance EV charging stations can be installed at small shops and by individuals, which will allow them to earn an additional source of income.
  3. The startup began developing the Kirana Charzer in the middle of last year. After months of research and developing prototypes, they launched the Kirana Charzer in February 2020 at MOVE, a global platform for major players across the transport industry, in London.
  4. “The response there was overwhelming. In fact, we weren’t ready for it. We had done market surveys and already sold a few Kirana Charzers, but weren’t expecting the sort of response we got there. Before we knew it, our first batch of 200 charging stations was already sold out. We had made only 200 because we didn’t have access to large scale manufacturing. Now, we have orders for 2,000+ Kirana Charzers still pending,” he says.

(The Better India, 17 October 2020) News Link

  • [The Turning Point] Understanding the support agent market led these entrepreneurs to start data ecosystem platform Aiisma

Key points:

  1. The Turning Point is a series of short articles that focuses on the moment when an entrepreneur hit upon their winning idea. Today, we look at Las Vegas-based marketing research startup Aiisma.
  2. Founded in 2018, the startup rewards users for anonymously and consensually sharing their data with businesses to improve their products.
  3. “When we started Aiisma in 2018, we had to zero in on how we can create a tool, an app, a software or a program that returns the power and control of data back to individuals with the ability to decide what data they want to share, when they want to share, and how to monetise,” says Nicholas.
  4. According to the founders, the startup has over 6,000 members at present. The user base is highest in India followed by UAE and then the Philippines.

(The Better India, 17 October 2020) News Link

  • This banking intelligence startup is making due diligence and onboarding simpler for banks and NBFCs

Key points:

  1. Mumbai-based Karza Technologies is an analytics, business intelligence, and automation platform that aggregates and analyses information to provide onboarding, due diligence, monitoring, and skip tracing solutions for the BFSI sector.
  2. Keen to change this, college friends Omkar Shrihatti and Gaurav Samdaria in 2015 started business intelligence solution provider Karza Technologies in Mumbai.
  3. Karza focuses on minimising inefficiencies in the BFSI ecosystem using Big Data and AI. The core problem it solves for includes scattered and unstructured data. The platform collects information from all available scattered data and identifies relevant sets. The data is stitched in one place using a unique identifier, the Karza ID. The dashboard allows clients to view the data in an easy, consumable manner.
  4. Karza processes over 10 million transactions per month and creates custom pricing models, depending on the scope of work involved.

(Your Story, 17 October 2020) News Link

  1. ब्लॉग से शुरू हुई थी तीन दोस्तोंगाथा’, आज करते हैं करोड़ों का कारोबार

Key points:

  1. साल 2013 में सुमिरन ने अपने दोस्त शिवानी धर और हिमांशु खार के साथ मिलकर हैंडिक्राफ्ट को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख रुपए की लागत से अपनी ई-कॉमर्स कंपनी ‘गाथा’ को शुरू किया था। आज यह कंपनी हर साल करोड़ों का कारोबार करती है।
  2. भारतीय हस्तकला की लोकप्रियता पूरी दुनिया में है, लेकिन हाल के वर्षों में उद्योगों में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी चमक फीकी पड़ने लगी है। लेकिन, सुमिरन पांड्या ने भारतीय हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए एक ऐसी पहल की शुरूआत की, जिससे कारीगरों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित होने के साथ ही वह खुद भी करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।
  3. सुमिरन ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर जिस कारोबार को महज 5 लाख रुपए से शुरू किया था, उसके जरिए आज वह हर साल करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि गाथा ने यह मकाम खुद ही हासिल किया है और उन्हें अब तक किसी निवेशक की जरूरत नहीं पड़ी।
  4. फिलहाल, उनकी कंपनी में 15 से अधिक लोग नौकरी करते हैं, जबकि देश के करीब 400 कारीगर उनसे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। गाथा स्टोर पर साड़ी, होम डेकोर, पेंटिंग्स, श्रृंगार आदि जैसी कई वस्तुएं उपलब्ध हैं।
  5. आज उनके ग्राहक दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू जैसे देश के कई बड़े शहरों के अलावा, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया जैसे 20 से अधिक देशों में भी हैं।
  6. सुमिरन कहते हैं, “हमारे कारोबार में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ग्राहकों को असली और नकली हस्तकला के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। आज मशीन से बने हुए कपड़े में और हाथ से बने हुए कपड़े में, फर्क पता नहीं चलता है। लेकिन, मशीन से बने हुए कपड़े की कीमत कम होती है, जिसे वजह से हस्तशिल्प को काफी नुकसान होता है। लेकिन, राहत की बात है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है और हाथ से निर्मित उत्पादों की माँग विदेशों में भी काफी बढ़ी है।“

(The Better India, 17 October 2020) News Link

  • मिलिएमखाना मैन ऑफ इंडियासत्यजीत सिंह से, जिन्होंने बिहार में बदल दी मखाना खेती की तस्वीर

Key points:

  1. मखाना को सुपरफूड के रूप में जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज दुनिया में कुल मखाने का 90 फीसदी उत्पादन बिहार में होता है? बिहार में मखाना खेती को लेकर एक क्रांति की शुरुआत करने वाले सत्यजीत सिंह हैं, जिन्हें ‘मखाना मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है। सत्यजीत आज बिहार में 50 फीसदी मखाना उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं और अनुमान है कि वह अगले 2-3 वर्षों में कुल मखाना उत्पादन में 70 से 75 फीसदी योगदान देने में सफल होंगे।
  2. साकेत के अधिकांश किसान साथी गेहूँ और धान की खेती करते हैं, लेकिन उन्होंने मखाना की खेती करने का फैसला किया। इससे साकेत को न सिर्फ अपने परिवार को कर्ज से उबारने में मदद मिली, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में भी मदद मिली।
  3. साकेत मखाना के बीज को बेच कर सालाना 3.5 लाख रूपये कमाते हैं और फिर बचे हुए बीजों को कुछ दिनों के बाद 30% अधिक मूल्य पर बेचते हैं। इस तरह हर साल उन्हें  4.5 लाख रूपए की कमाई होती है।
  4. शक्ति सुधा के प्रयासों से, स्थानीय बाजारों में मखाने का दाम  40 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो हो गया। फलस्वरूप, जो पहल महज 400 किसानों के साथ शुरू हुआ था, आज उससे 12,000 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं।
  5. सत्यजीत कहते हैं कि यह हमारे शोध कार्यों का नतीजा है कि शक्ति सुधा इस बदलाव को लाने में सक्षम हुई। इससे मखाना को सिर्फ स्नैक्स के बजाय एक सुपरफूड के रूप में बाजार में लाने में मदद मिली है। गत 19 वर्षों के दौरान मखाना बिहार के किसानों के लिए एक नकदी फसल के रूप में विकसित हुआ है। शायद यह इसी का नतीजा है कि जहाँ पहले सिर्फ 1,500 हेक्टेयर जमीन पर मखाने की खेती होती थी अब 16,000 हेक्टेयर पर होती है। सत्यजीत का अंदाजा है कि अगले वर्ष तक बिहार में 25,000 हेक्टेयर जमीन पर मखाने की खेती होगी।

(The Better India, 17 October 2020) News Link

  • हैदराबाद: मंदिरों से फूल इकट्ठा कर उनसे अगरबत्ती, साबुन आदि बना रहीं हैं ये सहेलियाँ

Key points:

  1. हैदराबाद में रहने वाली माया विवेक और मीनल दालमिया, Holy Waste ब्रांड के अंतर्गत फूलों को प्रोसेस करके अगरबत्ती, धूपबत्ती, खाद और साबुन जैसे उत्पाद बना रहीं हैं!
  2. माया और मीनल ने सबसे पहले एक मंदिर में बात की और वहाँ से फूल आदि को इकट्ठा करके घर पर लाने लगीं। उन्होंने पहले अपने घर पर इनकी प्रोसेसिंग की। जैविक खाद बनाना उन्हें आता था इसलिए इसमें ज्यादा परेशानी नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अगरबत्ती बनाने पर काम किया। घर पर वह छत पर फूलों को सुखातीं और फिर इन्हें मिक्सर में पिसती और फिर आगे की प्रक्रिया करतीं। एक-दो बार के ट्रायल से जब वह अगरबत्ती बनाने में सफल रहीं तो उन्होंने इसमें आगे बढ़ने की सोची।
  3. सभी मंदिरों में उन्होंने अपने डस्टबिन रखवाए हुए हैं और इन्हें प्रोसेसिंग यूनिट तक लाने के लिए कामगार लगाए हैं। मंदिरों के अलावा शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में भी बचने वाले फ्लोरल वेस्ट को वह इकट्ठा करके प्रोडक्ट्स बनाने में लगा रही हैं। हर दिन वह लगभग 200 किलो फ्लोरल वेस्ट को नदी-नाले में जाने से रोक रही हैं।
  4. उनके स्टार्टअप को हैदराबाद के संगठन, a-IDEA (Association for Innovation Development of Entrepreneurship in Agriculture) द्वारा इन्क्यूबेशन मिला है। पिछले साल, उन्हें ग्रीन इंडिया अवॉर्ड्स 2019 के इको-आइडियाज के अंतर्गत बेस्ट ग्रीन स्टार्टअप अवॉर्ड भी मिला है।
  5. माया कहतीं हैं कि उनका उद्देश्य हमेशा से लोगों और पर्यावरण के लिए कुछ करने का था। इस स्टार्टअप के ज़रिए वह पर्यावरण के लिए भी काम कर रही हैं और साथ ही, ग्रामीण, ज़रूरतमंद महिलाओं को काम देकर समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभा रही हैं।

(The Better India, 17 October 2020) News Link

  • दादी का बनाया खाना लोगों तक पहुँचाने के लिए छोड़ी नौकरी, अब 1.5 करोड़ रुपये है सालाना आय

Key points:

  1. दादी-चाची के हाथों से बने भोजन का स्वाद ही कुछ और होता है। इसी स्वादिष्ट स्वाद को घर-घर तक पहुँचाने के लिए मुरली गुंडन्ना ने बेंगलुरु में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने “फ़ूड बॉक्स” नाम से एक स्टार्टअप की शुरूआत की जहाँ से घर का पका खाना लिया जा सकता है।
  2. मुरली कहते हैं, “मेरे बॉस ने इसे बहुत ही सकरात्मक तरीके से लिया और उन्होंने मुझे तीन महीने पेड लीव देने की पेशकश की।” उन्होंने सप्ताह में 10 फूड बॉक्स बेचने से शुरूआत की और अब वह एक दिन में हज़ारों फूड बॉक्स बेचते हैं। मुरली इसका श्रेय अपनी दादी और चाची को देते हैं। मुरली के स्टार्टअप की यह कहानी बड़ी दिलचस्प है।
  3. शुरूआती दिनों में मुरली एक दिन में 15-20 बॉक्स बेचते थे जबकि आज की तारीख में वह एक हफ्ते में 2,000 बॉक्स बेचते हैं।
  4. इस बिजनेस को शुरू हुए पाँच साल हो चुके हैं। अब फूड बॉक्स के साथ 27 पेशेवरों और रसोइयों की एक टीम है। ग्राहकों की संख्या 30 हजार के करीब पहुँच चुकी है।
  5. एक बिजनेस जिसके लिए शुरूआती हफ्तों के लिए किराने का सामान खरीदने के अलावा कोई निवेश नहीं किया गया था और छह महीने तक जिसका मुनाफा शून्य रहा, अब एक साल में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का राजस्व कमाता है।

(The Better India, 17 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 3rd 2020

  • Planning of investment in BHARAT
  1. रिलायंस फाइबर को मिल सकता है 7.5 हजार करोड़ रु. का नया निवेश, दो इन्वेस्टमेंट कंपनियां खरीद सकती हैं हिस्सेदारी

Key points:

  1. सब्सिडियरी में सऊदी अरब की पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी निवेश कर सकती हैं
  2. इनविट का 51 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट और 48.44 प्रतिशत हिस्सा आरआईएल के पास है

(Dainik Bhaskar, 3 October, 2020) News Link

  1. महाराष्ट्र: एक शख्स ने 43 गाँवों के 63 झीलों को उबारा बदहाली से, जानिए कैसे

Key points:

  1. मनीष कहते हैं, “झीलों में मछलियों को वापस लाने के लिए, समाधान ढूंढ़ने का फैसला किया। इसके तहत हमने सबसे पहले झील के घासों को हटाया और सुनिश्चित किया कि बची हुई मछलियों को कोई नुकसान न पहुँचे।”मनीष बताते हैं कि समुदायों ने आसपास की झीलों में स्थानीय पौधों की खोज की और उन्हें फिर से लगाने का फैसला किया।हमने गर्मियों के दौरान झील क्षेत्र के जमीन की जुताई की, जो मानसून के दौरान सामान्यतः जलमग्न हो जाता था।
  2. इसमें हाइड्रिला वर्टिसिल्टा, सेराटोफिलम डिमर्सम, वेलीसनेरिया स्पाइरलिस और फ्लोटिंग प्लांट, जैसे कि निम्फाइड्स इंडिकम, निम्फाइड्स हाइड्रॉफिला, निम्फिया क्रिस्टल के साथ ही आंशिक रूप से पानी में लगने वाले पौधे जैसे – एलोचारिस डलसिस को रि-प्लांट किया गया।
  3. हालांकि, राकेश कहते हैं कि स्थानीय जैव विविधता और आवास को फिर से बहाल करने के उद्देश्यों के तहत दीर्घ अवधि के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। एक और रास्ता यह है कि स्थानीय मछलियों के संवर्धन और संरक्षण के लिए अलग जल निकायों की स्थापना की जा सकती है।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • राजस्थान: हिरण के शिकारियों पर रखते हैं पैनी नज़र, अब तक बचा चुके हैं 10 हज़ार हिरण

Key points:

  1. यह प्रेरक कहानी है राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के किसान अनिल बिश्नोई की। अनिल बिश्नोई ने अपना जीवन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है। बीते तीन दशकों से वह इलाके में वन्य जीवों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। अनिल को जितना प्यार अपने बेटी-बेटे से है उतना ही स्नेह हिरण, मोर, तीतर, सूअर, नील गाय, खरगोश, लोमड़ी, सांपों और कछुओं से भी है।
  2. अनिल ने शुरुआत अपने गाँव लखासर से की। जैसे ही उन्हें हिरण के शिकार की आशंका की भनक पड़ती, वह मौके पर पहुँच जाते थे। शिकारियों को भगाने लगे। प्रतिरोध होने पर इधर शिकारी हतोत्साहित होने लगे तो उधर अनिल का मनोबल बढ़ने लगा। वह न केवल शिकारियों को शिकार करने से रोकते बल्कि शिकार कर लिए जाने पर शिकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने लगे। इस कारण क्षेत्र में लोग एक पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में उन्हें पहचानने लगे। आसपास और दूरदराज के गांवों से भी उन्हें शिकारियों के बारे में सूचनाएँ मिलने लगी।
  3. अनिल हर वक्त जीवों के बारे में सोचते हैं। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं। गर्मियों में हिरणों के लिए पानी का संकट खड़ा हो जाता था। कई बार जल संकट का परिणाम हिरणों की मौत के रूप में सामने आता। गर्मियों में हिरण प्यास से न मरे, इसके लिए उन्होंने पानी का इंतजाम किया है। उन्होंने तीन साल पहले पानी के 60 एनिकेट (छोटे बाँध) बनवाए हैं। इस काम के लिए उन्होंने ग्रामीणों से निर्माण सामग्री एकत्र की और एनिकेट बनवा दिए। उन्हें कहीं भी घायल हिरण मिल जाता है तो वह उसे घर ले आते हैं उसकी मरहम-पट्टी करते हैं और स्वस्थ हो जाने पर स्वच्छ विचरण के लिए छोड़ देते हैं।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • जिनके लिए घर है एक सपना, उनके लिए सस्ते और टिकाऊ घर बनाते हैं यह आर्किटेक्ट

Key points:

  1. आज हम आपको एक ऐसे आर्किटेक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने न केवल भारत में बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्से में एक लाख से अधिक ग्रीन बिल्डिंग्स का निर्माण किया है। पद्मश्री से सम्मानित आर्किटेक्ट गोपाल शंकर को उनके सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली निर्माण के लिए जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका सस्टेनेबल आर्किटेक्चर चंद लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि वह आम आदमी के लिए प्रकृति के अनुकूल घर बनाते हैं। शायद इसलिए ही उन्हें ‘People’s Architect’ यानी कि आम आदमी का आर्किटेक्ट कहा जाता है।
  2. केरल के तिरुवनंतपुरम में उनका ऑफिस है और आज स्थानीय सब्ज़ी वाले, मछली पकड़ने वाले लोग उनके यहाँ आकर अपना घर डिज़ाइन करवाते हैं। शंकर इन लोगों के आर्किटेक्ट हैं, जिनके लिए घर बनाना एक ऐसा सपना होता है, जिसके लिए वह जिंदगीभर मेहनत करते हैं।
  3. उन्होंने आर्किटेक्चर के क्षेत्र में मशहूर आर्किटेक्ट लौरी बेकर से प्रेरणा ली। भारत में सस्टेनेबल आर्किटेक्चर की शुरूआत करने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। शंकर ने उनके ही सिद्धांतों और सीख को समझा और आगे बढ़े। उनके बारे में वह कहते हैं, “उन्होंने भारत को समझा और निर्माण में भारतीयता को शामिल किया। गौर करने वाली बात है कि हमें भारतीय आर्किटेक्चर में गांधी जी के मूल्यों को शामिल करने के लिए इंग्लैंड के एक आदमी की ज़रूरत पड़ी। मैंने कभी उनके साथ काम नहीं किया लेकिन हमेशा उन्हें अपना मेंटर माना है।”

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  1. गुरुग्राम जैसे शहर में घर को बनाया अर्बन फार्म, पूरे साल उगातीं हैं तरहतरह की सब्जियां

Key points:

  1. हर किसी को गार्डनिंग का शौक नहीं होता है लेकिन कुछ ऐसी परिस्थति बनती है कि ऐसे लोग भी बागवानी की शुरूआत कर देते हैं। ऐसी ही कहानी हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाली रूचिका की है। उन्होंने जब आसपास के लोगों को गार्डनिंग करते हुए देखा और उन्हें महसूस हुआ कि बाजार से वह जो कुछ भी सब्जी लाती हैं, वह ऑर्गेनिक नहीं है तो उन्होंने भी किचन गार्डन की शुरूआत कर दी।
  2. रूचिका के गार्डन में आपको हर मौसम में सब्जी मिल जाएगी। फिलहाल, वह सर्दियों की सब्जियों के लिए अपने गार्डन को तैयार कर रही हैं। रुचिका कहती हैं, “2-3 तरह की मूली, 2 -3 किस्म की गाज़र (लाल, पीली, काली), हरी मिर्च, काली मिर्च, फूलगोभी, ब्रोकॉली, सलाद की लगभग 15 किस्में, पुदीना, तुलसी, धनिया, पार्सले, पत्तागोभी, चकुंदर, सरसों, बीन्स आदि अपने गार्डन में उगाती हूँ। इसके अलावा 15-16 किस्म के फूल के पौधे भी हैं।”
  3. अपने पूरे गार्डन की देखभाल रूचिका खुद करती हैं। उनका कहना है कि उनके घर से बहुत ही कम कोई कचरा बाहर जाता है, वह रीसाइक्लिंग, रियूजिंग और कम्पोस्टिंग में विश्वास करती हैं। उनके किचन का सारा वेस्ट खाद और बायोएंजाइम बनाने में इस्तेमाल होता है। यहाँ तक कि उनके गार्डन का भी जो वेस्ट होता है जैसे सूखे पत्ते या फिर पुराने मौसम के सब्जियों के पौधे, बेल जिनसे हार्वेस्ट ले ली गई है और जिन्हें अब निकालना है- सभी कुछ को वह बायोएंजाइम बनाने में इस्तेमाल कर लेती हैं।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • How Mumbai-based wellness startup Olena helps people stay fit with plant-based protein products

Key points:

  1. Mumbai-based wellness startup Olena is a D2C plant-based nutrition brand that produces and sells vegan supplements and protein products across India.
  2. Akash Zaveri launched Olena in 2018 to help Indians live a healthy life by consuming plant-based diets after he realised the benefits of adopting a completely vegan diet in 2015 while he was working in California.
  3. “Olena is a plant-based nutrition brand founded with a vision to awaken the world to the potential of plant-based nutrition. With modern lifestyles and industrialised farming methods, eating high quality, bioavailable foods has become increasingly difficult. Also, finding good products that pack in the benefits of nature has become a challenge in developing countries such as India. We believe that elevating mind, body, and planet are key to living a healthy, happy life and plant-based nutrition is key to achieving this,” Akash told
  4. The company says that while ingredients are sourced from across the world, all products are developed in-house. Olena products are priced between Rs 350 and Rs 4,500, depending on the type and pack size. The products are sold directly-to-consumer via Olena’s official website, third-party channels, and retail and international distributors.

(Your Story, 3 October) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: September 6th 2020

  • Investment by other countries
  1. Top 10 funding deals bagged by Chennai startups amidst lockdown

Key points:

  1. BankBazaar : Online financial service marketplace raised two rounds of funding during the lockdown, amounting to $9.78 million. In April, the startup raised Rs 29 crore as part of its ongoing Series D round from existing investors, including Amazon, Sequoia, and Walden SKT Venture Fund,
  2. Flinto: In July, edtech startup Flinto Learning Solutions raised $7.2 million in pre-Series B funding led by Lightbox Ventures.
  3. WayCool: Agritech startup WayCool raised two rounds of funding during the lockdown, totalling $5.6 million.
  4. YAP: In April, API platform YAP raised $4.5 million in its Series A round of funding led by Singapore-based venture capital firm BEENEXT. 
  5. Specsmakers: In July, Specsmakers, an optical chain with 260 stores in south India, raised Rs 23 crore from Eight Roads Ventures.
  6. Grinntech: In August, Grinntech closed a round of $2 million from a set of high net-worth individuals (HNIs) and senior people from the automotive industry.
  7. Big Bang Boom Solutions: In July, defence tech startup Big Bang Boom Solutions raised $1 million through Mumbai Angels Network in their overall $1.5 million Series A funding round-size.
  8. CreditMantri: In May, online credit management startup, CreditMantri raised a little over Rs 6 crore ($803,146) from a clutch of existing investors including IDG Ventures, Elevar Equity, and impact investor Accion.
  9. GUVI: In April, Guvi Geek Network Private Limited, which owns and operates vernacular-language based education tech startup Guvi, raised Rs 6 crore in its pre-Series A round of funding from Education Catalyst Fund, an education-focused venture capital fund managed by CBA Capital.
  10. Chai Waale: In July, tea brand Chai Waale raised Rs 1.75 crore in funding from a group of angel investors

(Your Story, 6 September 2020) News link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • This ‘Made in India’ app aims to make bookkeeping easy for MSME sector

Key points:

  1. According to Statista, India has nearly 700 million internet users across the country at present. Despite this, the digital adoption among small businesses is very low. While accounting software is a favourite for big businesses, most MSMEs in the country still do their accounts on paper.
  2. Founded by Yash Raj Agrawal, GimBooks is a cloud-based bookkeeping and business management platform that aims to make business easy for millions of small entrepreneurs by providing them a convenient mobile first, easy-to-use, and affordable solution.
  3. Yash worked as a business analyst with Target Corporation before he started his own venture of trading in Pyrolysis products. He got into the niche waste recycling industry with Pyrolysis as a trader of pyrolysis products. He pioneered in introducing pyrolysis products to many industries at a pan India level. This involved frequent transactions and invoice keeping with multiple vendors.
  4. The startup has also tied up with banks and has introduced updates such as neo banking activities, lending, and insurance for its users.
    (Your Story, 6 September 2020) News Link
  • 5 startups by ‘green entrepreneurs’ whose products are environmentally sustainable Aims to Eat Fresh and Store Less

Key points:

  1. EcoRight: Founded in 2017 in Ahmedabad, EcoRight has 18 product lines and 140 SKUs available in around 11 ecommerce websites. The startup says it makes products that are ethically, socially, legally, and environmentally audited as per the pillar standards of SEDEX 4. Its products, which include tote bags, work bags, backpacks, etc., are reusable, made with natural products, and are developed with innovative fabrics to make products better for the environment. Aimed at finding solutions to environmental problems such as plastic waste, the ecommerce startup claims that each bag it sells will, in turn, replace the use of 50-100 plastic bags. Each of the handbag designs features an eco-friendly message or a pun to spread awareness about the harmful effects of plastics.
  2. Chalk and Chuckles: Pallavi Agarwal and Prachi Agarwal founded Chalk and Chuckles which shapes children’s learning, skills, and experiences based on the games they play. Calling themselves “play advocates,” the Delhi-based entrepreneurs discourage the use of gadgets like a smartphone, laptop, PSP, and so on, to entertain children, citing the impact on the child’s cognitive growth The startup creates every product keeping the planet and the environment in mind. The toys are handcrafted MDF (Class I), and are printed using soy-based ink. Each of its products is tested for compliance on international safety standards and none of them run on batteries or chargers.
  3. Love Organically: Love Organically is a Mumbai-based beauty manufacturing brand which claims to produce 100 percent natural and chemical-free products. It was founded by Deepshika Deshmukh who is a student of Ayurveda. She has conducted in-depth research and consultations with experts from the Ayurveda field, as well as doctors, on her family’s skin nutrition secrets. Every product includes nutrients from flower extracts, essentials oils, and aromatic botanicals.
  4. Krya Sustainable Goodies: Krya Sustainable Goodies was founded in 2010 by Srinivas Krishnaswamy and Preethi Sukumaran to create environmentally-friendly products. The entrepreneurs say they use natural ingredients.Krya Sustainable Goodies produces goods that address the issues of sustainable city living. Based on the principles of Ayurveda, the startup says its products are natural, vegan, and organic in nature. The laundry detergent is claimed to be 100 percent plant-based.
  5. MINC: It was founded by Mini Varkey Shibu and Kochery C Shibu in 2007. Mini is an alumnus of the National Institute of Design, Ahmedabad, and calls herself passionate about eco-fashion, minimalist design, and khadi. Kochery, on the other hand, is an alumnus of the National Defence Academy with a career in the Indian Navy. He has experience in setting up design studios, and has worked in the areas of operational development promotions and vendor development. The startup designs garments while only using natural fabrics, azo-free environment-friendly dyes, and closure made from natural materials like wood, coconut, etc. It also promotes khadi, and the team believes in promoting green living through eco-fashion.
    (Your Story, 6 September 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: September 1st 2020

Planning of Investment in Bharat

  1. European Investment Bank to invest 650 million euros into Kanpur metro rail construction

Key points:

  1. The European Investment Bank (EIB) said it will invest 650 million euros into the construction of Kanpur’s first metro line, enabling about three million people in the city to benefit from green, fast and affordable public transport. 
  2. The EIB, in a statement, said the new metro rail system will reduce commuting hours and unlock new employment and education opportunities in Kanpur, the industrial capital of Uttar Pradesh.
  3. This is the second metro rail project supported by the EIB in Uttar Pradesh, following the 450 million euros investment in the development of a metro rail system in the city of Lucknow.
  4. The second biggest EIB operation outside the EU to date will finance the construction of a 32.4 km urban rail line, with 18 elevated and 12 underground stations, the statement said.
  5. Once completed, Kanpur metro rail will create 1,100 new jobs and enable around 116 million more affordable commutes each year, it said.
  6. This is the fifth EIB investment in green infrastructure and connectivity in India. The EU bank has invested in metro rail systems in Bhopal, Pune, Bangalore and Lucknow.

(Business Today, 1 September 2020) News Link

  • India’s target to gasify 100 MT coal to entail investment of over Rs 4 lakh cr: Joshi

Key points:

  1. India’s target to gasify 100 million tonnes of coal by 2030 will entail an investment of over Rs 4 lakh crore, Coal Minister Pralhad Joshi said on Monday. 
  2. This 100 MT coal gasification will happen in three phases. In the first phase — from 2020-2024 — 4 million tonnes (MT) of coal will be gasified and around Rs 20,000 crore will be invested for the same.
  3. In the second phase — from 2020-2026 — 6 MT of coal will be gasified which will involve an investment of Rs 30,000 crore.
  4. In the third phase — from 2022-2030 — 90 MT of coal will be gasified and Rs 3.6 lakh crore will be invested for the same.
  5. Coal India also plans to set up at least three gasification plants (besides Dankuni) on build, own, operate (BOO) basis through global tendering and has signed pact with GAIL for marketing synthetic natural gas.

(Economic Times, 1 September 2020) News link

Investment in Bharat by other countries

  1. Venture Catalysts raises Rs 100 cr for investing in over 100 startups

Key points:

  1. Angel investor Venture Catalysts (VC) on Tuesday said it has raised Rs 100 crore for a new fund which will invest in over 100 Indian startups.
  2. The ‘9unicorns Accelerator Fund’ of VC is built along the lines of Silicon Valley’s accelerator fund Y Combinator’s strategy which has over 2,000 investments.
  3. This is the first close of Rs 100 crore or USD 14 million for the fund, which will focus on identifying startups early and would prefer to be the first external investor in a company’s journey, a company statement said.
  4. VC’s founding team members Apoorva Ranjan Sharma, Anuj Golecha, Anil Jain and Gaurav Jain are the founders for the fund, it said.

(Business Standard, 1 September 2020) News link

Views: Make in India

  1. Foreign companies rush to register in India to meet new ‘Atmanirbhar Bharat’ rules

Key points:

  1. The tweaked public procurement order disqualifying companies with less than 20% domestic content from most government tenders has prompted foreign firms to set up their shops in India.
  2. The chartered accountancy (CA) firms have seen growing requests from various foreign companies to incorporate their wholly-owned subsidiaries in India to meet the revised tender criteria.
  3. In order to promote local manufacturing, Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) amended the public procurement rules to ensure that only items with minimum 20% local content can participate in tenders floated by the government or any of its entities.
  4. Also, items with more than 50% local content will get purchase preference over other items. 
  5. The government had announced that no global tender will be issued for procurement of items worth less than Rs 200 crore.
  6. In a bid to support local manufacturing, the government has taken a slew of tariff and non-tariff measures especially to contain import of cheap items from China.

(Business Today, 1 September 2020) News Link

Bhartiya companies manufacturing in Bharat

  • Defence Min inks Rs 2,580-crore deal with Indian companies to procure Pinaka rocket launchers

Key points:

  1. In a boost to Prime Minister Narendra Modi’s ‘Make in India’ initiative, the defence ministry on Monday sealed a deal with Tata Power Company Ltd (TPCL) and engineering major Larsen & Toubro (L&T) to procure Pinaka rocket launchers. 
  2. The defence public sector undertaking Bharat Earth Movers Ltd (BEML) will also be part of the project.
  3. TPCL and L&T will manufacture rocket launchers for six Army regiments at a cost of Rs 2,580 crore.
  4. The BEML will supply the vehicles on which the rocket launchers will be mounted.
  5. The six Pinaka Regiments will be supplied to the Regiment of Artillery of the Indian Army at an approximate cost of Rs 2580 Crores.
  6. The six Pinaka Regiments comprise 114 launchers with Automated Gun Aiming and Positioning System (AGAPS) and 45 Command Posts.
  7. BEML will manufacture 330 vehicles on which the domestically made rocket launchers will be mounted. 
  8. The Pinaka Regiments will be operationalised along the northern and eastern Borders of the further enhancing the operational preparedness of the armed forces. The Pinaka Regiments are is planned to be completed by 2024.
  9. The Pinaka Multiple Launch Rocket System (MLRS) has been indigenously designed and developed by DRDO and the production will be done by the above-mentioned defence industries. 

(Times Now, 1 September 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: August 13th 2020

Investment in Bharat by other Countries

  1. Coralogix to invest $30 mn in India to meet data localisation norms

Key points:

  1. Israeli tech company Coralogix on Thursday announced a $30 million investment for expanding into India, driven primarily by the data localisation compliance requirements for its customers.
  2. The company, provider of machine learning-powered log analytics and monitoring solutions, said it will provide customers with its first local Amazon Web Services (AWS) server support through its Mumbai region and data storage capabilities.
  3. Its Chief Executive and co-founder Ariel Assaraf said the $30-million investment will be done over a five-year period.

(Business Standard, 13 August 2020) News Link

Planning of Investment in Bharat

  1. ByteDance in talks with India’s Reliance for investment in TikTok: Report

Key points:

  1. China’s ByteDance is in early talks with Reliance Industries Ltd for an investment in its video-based app TikTok‘s business in India, TechCrunch reported on Thursday, citing sources.
  2. The two companies began conversations late last month and have not reached a deal yet, according to the report.
  3. Microsoft Corp has been in talks to acquire the U.S. operations of the video-sharing app.

(Economic Times, 13 August 2020) News Link

Startup in Bharat by Bhartiya

From Punjabi to Sanskrit, this edtech startup is making learning Indian languages relevant
Key points:

The startup’s mobile app makes learning Indian languages easy, interactive, and culturally relevant for expats, tourists, international students, kids, domestic migrants, NRIs, and cultural enthusiasts.

They currently offer five Indian languages: Hindi, Punjabi, Sanskrit, Kannada, and Gujarati. 

With approximately 100,000 downloads across 120 countries in a year,  Language Curry uniquely equips its learners with contextual, conversational language learning where the user not only learns the ‘what’ or ‘how’ of speaking Indian languages, but also receives short cultural capsules that explain the ‘why’ behind it.

The startup on Thursday, August 13 announced that it has raised $92,000 in angel funding led by Rebalance Angel Community, Chandigarh Angel Network, and a clutch of angel investors.
(Your Story, 13 August 2020)
News Link

How this aerospace engineer who worked with NASA is now making UAVs for India’s Special Forces
Key points:

  1. Chennai-based Vinveli makes indigenous UAVs or drones for Special Forces under the Ministry of Home Affairs, such as the National Security Guard and the Central Reserve Police Force, and the Ministry of Defence.
  2. According to Gokul, the cost of the drones developed by Vinveli range between $10,000 – for the basic agriculture or imaging payloads, and $100,000 and above – for advanced sensor packages and navigation options such as swarming.
  3. During the Iowa Startup Accelerator Programme in 2014, Vinveli had received seed funding of $25,000.
    (Your Story, 13 August 2020) News Link

From Surat to Bengaluru, this platform is building a community of designers and photographers

Key points:

  • Iconscount is a bootstrapped design resource marketplace that offers ready-to-use high-quality icons, illustrations, etc.
  • According to the startup, at present, people from over 150 countries are purchasing from its library of over two million icons, illustrations, and stock photos for their businesses. The startup currently has around 200,000 plus registered users
  • In the ‘subscription model’, the user can purchase a monthly or yearly plan, which gives them access to various resources depending on the package they have selected. The price of these packages can range from $9 to $3000/ per month.
    (Your Story, 13 August 2020) News Link

Economic support to other Countries

India announces USD 500 million assistance for major connectivity project in Maldives
Key points:

India will fund the implementation of a major connectivity project in Maldives through a USD 400 million line of credit and USD 100 million grant, External Affairs Minister S Jaishankar said on Thursday.

The 6.7 km Greater Male Connectivity Project (GMCP) will be the largest civilian infrastructure project in Maldives, connecting Male with three neighbouring islands – Villingili, Gulhifahu and Thilafushi, officials said.

He also announced the start of regular cargo ferry service between India and Maldives to boost trade and commerce between the two countries.
India is also extending financial support for construction of a port in Gulhifahu.

“Once completed, this landmark project will streamline connectivity between the four islands, thereby boosting economic activity, generating employment and promoting holistic urban development in the Male region,” the Ministry of External Affairs (MEA) said.
(Economic Times, 13 August 2020) News Link

Vaccine development

Zydus Cadila launches India’s cheapest remdesivir version at Rs 2,800 per 100 mg vial
Key points:

Drug firm Zydus Cadila on Thursday said it has launched a generic version of Remdesivir, used for treating patients suffering from severe COVID-19 symptoms, at Rs 2,800 per 100 mg vial in the Indian market

Branded as Remdac, the drug is the most economical Remdesivir brand in India, Zydus Cadila said in a regulatory filing.

The active pharmaceutical ingredient (API) for the drug has been developed and manufactured at the group’s API manufacturing facilities in Gujarat, Zydus Cadila said.
Zydus Cadila is the fifth company to have launched its generic version of Remdesivir in India. Hetero Labs, Cipla Mylan and Jubilant Life Sciences have already launched their generic versions of antiviral drug Remdesivir in the country.
(Economic Times, 13 August 2020) News Link