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Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 3rd 2020

  • Planning of investment in BHARAT
  1. रिलायंस फाइबर को मिल सकता है 7.5 हजार करोड़ रु. का नया निवेश, दो इन्वेस्टमेंट कंपनियां खरीद सकती हैं हिस्सेदारी

Key points:

  1. सब्सिडियरी में सऊदी अरब की पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी निवेश कर सकती हैं
  2. इनविट का 51 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट और 48.44 प्रतिशत हिस्सा आरआईएल के पास है

(Dainik Bhaskar, 3 October, 2020) News Link

  1. महाराष्ट्र: एक शख्स ने 43 गाँवों के 63 झीलों को उबारा बदहाली से, जानिए कैसे

Key points:

  1. मनीष कहते हैं, “झीलों में मछलियों को वापस लाने के लिए, समाधान ढूंढ़ने का फैसला किया। इसके तहत हमने सबसे पहले झील के घासों को हटाया और सुनिश्चित किया कि बची हुई मछलियों को कोई नुकसान न पहुँचे।”मनीष बताते हैं कि समुदायों ने आसपास की झीलों में स्थानीय पौधों की खोज की और उन्हें फिर से लगाने का फैसला किया।हमने गर्मियों के दौरान झील क्षेत्र के जमीन की जुताई की, जो मानसून के दौरान सामान्यतः जलमग्न हो जाता था।
  2. इसमें हाइड्रिला वर्टिसिल्टा, सेराटोफिलम डिमर्सम, वेलीसनेरिया स्पाइरलिस और फ्लोटिंग प्लांट, जैसे कि निम्फाइड्स इंडिकम, निम्फाइड्स हाइड्रॉफिला, निम्फिया क्रिस्टल के साथ ही आंशिक रूप से पानी में लगने वाले पौधे जैसे – एलोचारिस डलसिस को रि-प्लांट किया गया।
  3. हालांकि, राकेश कहते हैं कि स्थानीय जैव विविधता और आवास को फिर से बहाल करने के उद्देश्यों के तहत दीर्घ अवधि के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। एक और रास्ता यह है कि स्थानीय मछलियों के संवर्धन और संरक्षण के लिए अलग जल निकायों की स्थापना की जा सकती है।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • राजस्थान: हिरण के शिकारियों पर रखते हैं पैनी नज़र, अब तक बचा चुके हैं 10 हज़ार हिरण

Key points:

  1. यह प्रेरक कहानी है राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के किसान अनिल बिश्नोई की। अनिल बिश्नोई ने अपना जीवन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है। बीते तीन दशकों से वह इलाके में वन्य जीवों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। अनिल को जितना प्यार अपने बेटी-बेटे से है उतना ही स्नेह हिरण, मोर, तीतर, सूअर, नील गाय, खरगोश, लोमड़ी, सांपों और कछुओं से भी है।
  2. अनिल ने शुरुआत अपने गाँव लखासर से की। जैसे ही उन्हें हिरण के शिकार की आशंका की भनक पड़ती, वह मौके पर पहुँच जाते थे। शिकारियों को भगाने लगे। प्रतिरोध होने पर इधर शिकारी हतोत्साहित होने लगे तो उधर अनिल का मनोबल बढ़ने लगा। वह न केवल शिकारियों को शिकार करने से रोकते बल्कि शिकार कर लिए जाने पर शिकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने लगे। इस कारण क्षेत्र में लोग एक पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में उन्हें पहचानने लगे। आसपास और दूरदराज के गांवों से भी उन्हें शिकारियों के बारे में सूचनाएँ मिलने लगी।
  3. अनिल हर वक्त जीवों के बारे में सोचते हैं। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं। गर्मियों में हिरणों के लिए पानी का संकट खड़ा हो जाता था। कई बार जल संकट का परिणाम हिरणों की मौत के रूप में सामने आता। गर्मियों में हिरण प्यास से न मरे, इसके लिए उन्होंने पानी का इंतजाम किया है। उन्होंने तीन साल पहले पानी के 60 एनिकेट (छोटे बाँध) बनवाए हैं। इस काम के लिए उन्होंने ग्रामीणों से निर्माण सामग्री एकत्र की और एनिकेट बनवा दिए। उन्हें कहीं भी घायल हिरण मिल जाता है तो वह उसे घर ले आते हैं उसकी मरहम-पट्टी करते हैं और स्वस्थ हो जाने पर स्वच्छ विचरण के लिए छोड़ देते हैं।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • जिनके लिए घर है एक सपना, उनके लिए सस्ते और टिकाऊ घर बनाते हैं यह आर्किटेक्ट

Key points:

  1. आज हम आपको एक ऐसे आर्किटेक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने न केवल भारत में बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्से में एक लाख से अधिक ग्रीन बिल्डिंग्स का निर्माण किया है। पद्मश्री से सम्मानित आर्किटेक्ट गोपाल शंकर को उनके सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली निर्माण के लिए जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका सस्टेनेबल आर्किटेक्चर चंद लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि वह आम आदमी के लिए प्रकृति के अनुकूल घर बनाते हैं। शायद इसलिए ही उन्हें ‘People’s Architect’ यानी कि आम आदमी का आर्किटेक्ट कहा जाता है।
  2. केरल के तिरुवनंतपुरम में उनका ऑफिस है और आज स्थानीय सब्ज़ी वाले, मछली पकड़ने वाले लोग उनके यहाँ आकर अपना घर डिज़ाइन करवाते हैं। शंकर इन लोगों के आर्किटेक्ट हैं, जिनके लिए घर बनाना एक ऐसा सपना होता है, जिसके लिए वह जिंदगीभर मेहनत करते हैं।
  3. उन्होंने आर्किटेक्चर के क्षेत्र में मशहूर आर्किटेक्ट लौरी बेकर से प्रेरणा ली। भारत में सस्टेनेबल आर्किटेक्चर की शुरूआत करने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। शंकर ने उनके ही सिद्धांतों और सीख को समझा और आगे बढ़े। उनके बारे में वह कहते हैं, “उन्होंने भारत को समझा और निर्माण में भारतीयता को शामिल किया। गौर करने वाली बात है कि हमें भारतीय आर्किटेक्चर में गांधी जी के मूल्यों को शामिल करने के लिए इंग्लैंड के एक आदमी की ज़रूरत पड़ी। मैंने कभी उनके साथ काम नहीं किया लेकिन हमेशा उन्हें अपना मेंटर माना है।”

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  1. गुरुग्राम जैसे शहर में घर को बनाया अर्बन फार्म, पूरे साल उगातीं हैं तरहतरह की सब्जियां

Key points:

  1. हर किसी को गार्डनिंग का शौक नहीं होता है लेकिन कुछ ऐसी परिस्थति बनती है कि ऐसे लोग भी बागवानी की शुरूआत कर देते हैं। ऐसी ही कहानी हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाली रूचिका की है। उन्होंने जब आसपास के लोगों को गार्डनिंग करते हुए देखा और उन्हें महसूस हुआ कि बाजार से वह जो कुछ भी सब्जी लाती हैं, वह ऑर्गेनिक नहीं है तो उन्होंने भी किचन गार्डन की शुरूआत कर दी।
  2. रूचिका के गार्डन में आपको हर मौसम में सब्जी मिल जाएगी। फिलहाल, वह सर्दियों की सब्जियों के लिए अपने गार्डन को तैयार कर रही हैं। रुचिका कहती हैं, “2-3 तरह की मूली, 2 -3 किस्म की गाज़र (लाल, पीली, काली), हरी मिर्च, काली मिर्च, फूलगोभी, ब्रोकॉली, सलाद की लगभग 15 किस्में, पुदीना, तुलसी, धनिया, पार्सले, पत्तागोभी, चकुंदर, सरसों, बीन्स आदि अपने गार्डन में उगाती हूँ। इसके अलावा 15-16 किस्म के फूल के पौधे भी हैं।”
  3. अपने पूरे गार्डन की देखभाल रूचिका खुद करती हैं। उनका कहना है कि उनके घर से बहुत ही कम कोई कचरा बाहर जाता है, वह रीसाइक्लिंग, रियूजिंग और कम्पोस्टिंग में विश्वास करती हैं। उनके किचन का सारा वेस्ट खाद और बायोएंजाइम बनाने में इस्तेमाल होता है। यहाँ तक कि उनके गार्डन का भी जो वेस्ट होता है जैसे सूखे पत्ते या फिर पुराने मौसम के सब्जियों के पौधे, बेल जिनसे हार्वेस्ट ले ली गई है और जिन्हें अब निकालना है- सभी कुछ को वह बायोएंजाइम बनाने में इस्तेमाल कर लेती हैं।

(The Better India, 3 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • How Mumbai-based wellness startup Olena helps people stay fit with plant-based protein products

Key points:

  1. Mumbai-based wellness startup Olena is a D2C plant-based nutrition brand that produces and sells vegan supplements and protein products across India.
  2. Akash Zaveri launched Olena in 2018 to help Indians live a healthy life by consuming plant-based diets after he realised the benefits of adopting a completely vegan diet in 2015 while he was working in California.
  3. “Olena is a plant-based nutrition brand founded with a vision to awaken the world to the potential of plant-based nutrition. With modern lifestyles and industrialised farming methods, eating high quality, bioavailable foods has become increasingly difficult. Also, finding good products that pack in the benefits of nature has become a challenge in developing countries such as India. We believe that elevating mind, body, and planet are key to living a healthy, happy life and plant-based nutrition is key to achieving this,” Akash told
  4. The company says that while ingredients are sourced from across the world, all products are developed in-house. Olena products are priced between Rs 350 and Rs 4,500, depending on the type and pack size. The products are sold directly-to-consumer via Olena’s official website, third-party channels, and retail and international distributors.

(Your Story, 3 October) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 2nd

  1. फातिमा असला को मेडिकल एजुकेशन के लिए अनफिट माना गया लेकिन हार नहीं मानी, आज ये मेडिकल स्टूडेंट हैं, हौसलों के दम पर सपने पूरे कर रही हैं

Key points:

  1. फातिमा असला देश और दुनिया की उन हजारों लड़कियों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो शारीरिक विषमताओं के बाद भी जिंदगी की परेशानियों से जूझते हुए हर हाल में आगे बढ़ रही हैं। इस लड़की के चेहरे की मुस्कान देखकर इसकी तकलीफों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। असला की किताब, ‘नीलवु पोल चिरिकुन्ना पेनकुट्टी’ (एक धुंधली मुस्कान वाली लड़की) जल्दी ही रिलीज होने वाली है।
  2. फातिमा के माता-पिता को इस बच्ची की हड्डियों से जुड़ी बीमारी ‘ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा’ के बारे में डॉक्टरों से तब बताया जब वह महज तीन दिन की थीं। जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उन्हें व्हील चेयर की जरूरत पड़ने लगी। वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थीं ताकि अपनी ही तरह अन्य दिव्यांगों की मदद कर सकें लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए अनफिट करार दिया। फिलहाल वे बीएचएमएस में फाइनल ईयर की स्टूडेंट हैं और अपने सारे सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद में लगी हुई हैं।

(Dainik Bhaskar, 2 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • [Startup Bharat] How this school dropout is building a Made in India alternative to Adobe Photoshop

Key points:

  1. Rajkot-based Made in India company InsideLogic Software has built AI-based image editing and album designing software. It is targeting Rs 2 crore revenue by 2022.
  2. In Gujarat’s garba capital Rajkot, Aslam Solanki is doing what most Indian entrepreneurs aim to do: thinking local and building global. With a vision to solve issues faced by digital designers, be it photographers, album designers, and graphic designers, Aslam has built automated design solutions.
  3. “We are indirect competitors to Adobe Photoshop. But we are faster, better, and cheaper,” Aslam claims.
  4. In 2000, he started working on building an automated album designing software. In 2016, he incorporated InsideLogic Software and launched the software Album Sense.
  5. For a single user, Album Sense is available for a one-time cost of Rs 5,000. For multiple-user usage, the cost is Rs 7,500. Album Sense boasts more than 10,000 paid users.
  6. According to the bootstrapped company, the customer base has been growing by 20 percent, year on year. Last year’s revenue turnover for InsideLogic was Rs 20 lakh. It is expecting it to grow to Rs 2 crore by 2022, post the launch of Photo Sense.

(Your Story, 2 October) News Link

  • This SaaS startup is gearing up to solve transport woes for logistics businesses

Key points:

  1. Rourkela-based TransportSimple helps logistics businesses manage day-to-day operations such as trip and inventory tracking, maintenance summary, GST compliant accounting modules, and live performance monitoring among others
  2. To provide fleet management services to logistics businesses, Father-son duo Hardeep Singh and Jasdeep Singh launched TransportSimple in 2018.
  3. The SaaS startup helps logistics businesses manage daily operations such as trip, inventory tracking, maintenance and employee summary, GST compliant, and driver performance monitoring among others.
  4. Highlighting the importance of an advanced fleet management system, he says, “the current working way is chaotic, time-consuming, error-prone, and lacks owner visibility. There are multiple false expenses, no scheduled maintenance, no performance tracking, and much more. The industry is dependent on various standalone platforms to manage its business, with no information flow, thus lacking informed decision-making.”

(Your Story, 2 October) News Link

Rising Bharat National News Feed: October 1st 2020

  1. नई शिक्षा नीति पर शिक्षा मंत्री ने दिए सवालों के जवाब

Key points:

  1. क्या नई शिक्षा नीति के तहत 11वीं में स्टूडेंट्स अलग-अलग संकायों से कोई भी विषय चुन सकेंगे? – नई शिक्षा नीति (NEP 2020) आर्ट्स और साइंस को एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नहीं करती। बल्कि इसमें विभिन्न संकायों में से विषय चुनने की छूट दी गई है। एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा तैयार किए जा रहे नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (National Curriculum Framework) में ये चीजें विस्तार में दी जाएंगी।
  2. NEP में स्पोर्ट्स और फिजिकल एजुकेशन प्रोग्राम्स को अनिवार्य किया जाएगा? – नई शिक्षा नीति 2020 में किए गए प्रावधानों के अनुसार, स्पोर्ट्स क्लासरूम की डे-टू-डे एक्टिविटीज का हिस्सा होगा। कक्षाओं में स्पोर्ट्स-इंटीग्रल लर्निंग पर फोकस किया जाएगा। ताकि स्टूडेंट्स फिटनेस के साथ-साथ लाइफ स्किल्स भी सीख सकें।
  3. 5+3+3+4 स्ट्रक्चर क्या होगा? – नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 स्ट्रक्चर का उल्लेख किया गया है। इसके तहत 3 से 6 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए प्री-स्कूल अनिवार्य होगा। इस स्ट्रक्चर को नेशनल करिकुलम फॉर स्कूल एजुकेशन में विस्तार से समझाया जाएगा, जो 2021 में आने वाला है।
  4. मौजूदा हालात में NEP किस तरह स्टूडेंट्स की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाएगी? – मौजूदा महामारी के हालात और भविष्य में आने वाले ऐसे किसी हालात को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति में बच्चों के लिए तकनीक और ऑनलाइन शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत SWAYAM, DIKSHA जैसे ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को और विस्तार दिया जाएगा।
  5. क्या इसमें माध्यमिक स्कूलों को 12वीं तक अपग्रेड करने का प्रावधान है? – सेकंडरी लेवल (कक्षा 9वीं से 12वीं) पर नया करिकुलर स्ट्रक्चर नई शिक्षा नीति का हिस्सा है। इसे लागू भी किया जाएगा। वहीं, स्कूलों को उच्च माध्यमिक (12वीं) स्तर तक अपग्रेड किए जाने का प्रावधान पहले से ही समग्र शिक्षा में है। यह राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्तावों के आधार पर किया जाता है।
  6. कब तक लागू होगी नई शिक्षा नीति? – नई शिक्षा नीति को लागू करने की योजना तैयार की जा रही है। इसमें विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मश्वरा जारी है। योजना तैयार होने के बाद इस नीति को एनईपी में दिए गए समयानुसार लागू किया जाएगा। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जो संस्थान पहले इसके लिए तैयारी कर लेंगे, वहां से शुरुआत होगी।

(Navbharat Times, 1 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 1st 2020

  1. एक किसान, तीन काम: हल्दी की खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से लाखों का मुनाफा

Key points:

  1. गुजरात के भाविक ने मात्र 5 बीघा ज़मीन से हल्दी की जैविक खेती शुरू की थी और आज वह 50 बीघा में हल्दी उगा रहे हैं और प्रोसेसिंग करके लगभग 5 टन हल्दी पाउडर भी बना रहे हैं!
  2. गुजरात के सारंगपुर गाँव में रहने वाले 30 वर्षीय भाविक खचर पिछले 6 सालों से हल्दी की जैविक खेती कर रहे हैं। हल्दी उगाने के साथ-साथ वह प्रोसेसिंग भी खुद ही करते हैं। वह इन दिनों हल्दी की फसल और पाउडर, दोनों से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
  3. भाविक जैविक तरीकों से खेती करने वालों के एक समूह से भी जुड़ गए। किसानों के इस नेटवर्क के ज़रिए ही उन्हें इज़रायल जाने का मौका मिला। वहाँ उन्होंने प्रोसेसिंग के बारे में जाना। वह बताते हैं कि इज़रायल दौरे में उनकी मुलाक़ात वहाँ के अग्रणी किसानों से हुई। उन्होंने देखा कि कैसे वहाँ किसान खुद ही अपनी फसल में वैल्यू ऐड करके और पैकिंग करके बेचते हैं। इससे उन्हें ज्यादा कमाई मिलती है।
  4. वहाँ से लौटने के बाद उन्होंने तय किया कि वह हल्दी की प्रोसेसिंग करेंगे। उन्होंने इसकी शुरूआत अपने फार्म के नामकरण से की। इसके बाद उन्हें हल्दी के लिए अपना ब्रांड नाम भी चाहिए था और अपने गाँव के नाम पर उन्होंने ‘सारंग फार्म’ को रजिस्ट्रर कराकर जैविक सर्टिफिकेट लिया। शुरुआत में, उन्होंने बहुत ज्यादा इन्वेस्ट नहीं किया और एक क्विंटल हल्दी पाउडर तैयार किया। शुरू में उन्हें मार्केटिंग को लेकर थोड़ा संदेह था। लेकिन इसमें भी उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं आई। उन्होंने बिक्री के लिए एक स्टॉल लगा दिया
  5. वह अपने फार्म में हल्दी की पैकिंग करते हैं। इसके बाद, इसे स्टॉल पर पहुँचाया जाता है और बहुत से ग्राहकों को सीधा डिलीवर किया जाता है। हल्दी पाउडर के अलावा, वह अपने खेतों के लिए बीज भी तैयार करते हैं। “हमारी खेती गौ आधारित है और बीज, जीवामृत सभी कुछ हम घर पर ही बना लेते हैं तो एक बीघा पर हमारा खर्च लगभग 5-6 हज़ार रुपये तक आता है। इसके अलावा, अब जो हम पाउडर बनाकर बेचते हैं, उससे एक बीघा से लगभग 40-50 हज़ार रुपये की कमाई होती है,” भाविक ने बताया।

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • इंजीनियर ने नौकरी छोड़ चुनी खेती, शुरू की जीरो बजट फार्मिंग, गोबर से बनाते हैं कीटनाशक

Key points:

  1. मेरठ के कमल प्रताप तोमर ने शुरूआत में छह बीघा जमीन पर जीरो बजट खेती की लेकिन अब वह 12 बीघे में खेती कर रहे हैं।मेरठ के नजदीक सिसौली गाँव के कमल ने 2012 में बीटेक करने के बाद कुछ दिन नौकरी भी की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस टेस्ट दिया। कामयाब हुए, लेकिन उन्होंने आगे की पढ़ाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने खेती की शुरूआत की।
  2. 32 वर्षीय कमल बताते हैं कि उनकी खेती का आधार गाय है। वह कहते हैं, “एक देसी गाय से इतना गोबर मिल जाता है कि पूरे साल बाजार से खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। देसी गाय के एक ग्राम गोबर में तीन सौ से लेकर पांच सौ करोड़ तक माइक्रो बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यह खेती के लिए बेहद आवश्यक है। गाय के गोबर और गोमूत्र से कई खाद बनाई जाती है। इसके साथ ही कीटनाशक भी तैयार किए जाते हैं। इनका मकसद कीटों को खत्म करना नहीं, क्योंकि शत्रु कीट होते हैं तो ढेरों मित्र कीट भी होते हैं। यह कीटनाशक शत्रु कीट को फसल खराब करने से रोकते हैं।”
  3. कमल खेती के लिए जैविक खाद जीवामृत भी खुद ही तैयार करते हैं। दरअसल जीवामृत सुभाष पालेकर जी द्वारा सुझाया गया बहुत ही आसान और किफायती तरीका है, जिसके जरिए किसान घर पर ही जैविक खाद बना सकते हैं।”
  4. कमल बीज तैयार कर किसानों को बाँटते भी हैं। उन्होंने अपने फार्म का नाम केशवम रखा है, जहाँ लोग उनकी खेती देखने के लिए आते हैं। अपने फार्म में उन्होंने इस बार लौकी की पैदावार में कुछ प्रयोग किए हैं, जिनके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • लाखों की नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी शुरू की, एक सीजन में 12 लाख रु. की कमाई, 5 लोगों को रोजगार भी दिया

Key points:

  1. अच्छे किस्म की अमरूद के पौधे लगभग एक साल में तैयार हो जाते हैं, पहले साल में एक पौधे से 6-7 किलो तक अमरूद निकलता है, उसके कुछ समय बाद 10-12 किलो तक उत्पादन होने लगता है
  2. आज हर दिन 4 टन अमरूद उनके बगीचे से निकलता है, मुंबई, पुणे, सांगली सहित कई शहरों में वे अमरूद भेजते हैं, हर दिन 10 हजार रु की कमाई हो रही है

(Dainik Bhaskar, 1 October 2020) News Link

  • [Funding alert] Log analytics platform Coralogix raises $25M in Series B round

Key points:

  1. The funding will be used by the Israel- and Mumbai-based company to strengthen its local presence in India.
  2. Israel- and Mumbai-based Coralogix, provider of ML-powered log analytics and monitoring solution, on Thursday announced that it has raised a $25 million Series B funding round, bringing the company’s total amount raised to $41.2 million.
  3. New investors such as Red Dot Capital Partners and OG Tech VC (backed by Eyal Ofer) co-led the round with participation from existing investors Aleph VC, StageOne Ventures, Janvest Capital Partners, and 2B Angels. Barak Salomon of Red Dot Capital Partners and Roy Oron of OG Tech Partners will join the board of directors.
  4. Along with the funding, the company also announced the launch of its real-time analytics solution. The announcement comes on the heels of Coralogix’s recent expansion into India. The company recently established its office and operations in the region and provides local customers with local Amazon Web Services (AWS) regional server support and data storage capabilities. The funding and new analytics solution will help further establish Coralogix’s local presence and help better support its local customers.

(Your Story, 1 October 2020) News Link

  • Japanese tech firm NTT to invest $2B in India for setting up data centres

Key points:

  1. Japanese company NTT aims to invest $2 billion in India for building data centres over the next four years. A part of this commitment will help build solar and wind power generating facilities.
  2. Japanese company NTT on Wednesday said it would invest $2 billion (over Rs 14,000 crore) in India to build data centres.
  3. Sanghi said a part of the commitment would be invested in building solar and wind power generating facilities because the company was committed to having its own captive power generation capabilities from renewable power at the same level as the consumption requirement in five years.
  4. The company will look at acquisition opportunities “opportunistically”, and any such move would lead to the overall investment going above $2 billion, Sharad said.

(Your Story, 1 October 2020) News Link

  • रिलायंस रिटेल में 1.4% की हिस्सेदारी खरीदेगी मुबाडाला, 6247.5 करोड़ रुपये करेगी निवेश

Key points:

  1. रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड को चौथा बड़ा निवेशक मिल गया है। आबूधाबी की मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी ने इसमें 6,247.5 करोड़ रुपये निवेश करने का फैसला किया है। इस निवेश के जरिए मुबाडाला कंपनी रिलायंस रिटेल में कुल 1.40 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदेगी। रिलायंस में मुबाडाला कंपनी की ओर से किया गया ये दूसरा बड़ा निवेश है। इससे पहले इसी साल मुबाडाला कंपनी ने रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में भी 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया था

(Navbahrat Times, 1 October 2020) News Link

  • Economic support to other countries
  1. भारत म्यांमार को करेगा 1.4 अरब डॉलर की मदद

Key points:

  1. गुरूवार को दोनो देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एक अहम बैठक हुई जिसमें द्वपिक्षीय रिश्तों की नए सिरे से समीक्षा की गई। यह हाल के दिनों में तीसरे पड़ोसी देश के साथ सहयोग बैठक थी। इसके पहले श्रीलंका के साथ शिखर बैठक व बांग्लादेश के साथ विदेश मंत्रियों के स्तर पर बैठक हुई है। म्यांमार के साथ विमर्श बैठक को संबोधित करते हुए विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने पड़ोसी देश के लिए कई तरह की सहयोग योजनाओं का ऐलान किया।
  2. श्रृंगला ने अपने भाषण में कहा कि, भारत अभी म्यांमार को 1.4 अरब डॉलर की मदद कर रहा है। कोविड महामारी के बावजूद हम अगले वर्ष की पहली तिमाही में सित्वे परियोजना का संचालन शुरु करने जा रहे हैं। इसके अलावा भारत-म्यांमार-थाईलैंड को जोड़ने वाली ट्राइलेटरल हाइवे पर निíमत होने वाली 69 पुलों के निर्माण के लिए जल्द ही निविदा आमंत्रित किया जाने वाला है।

(Dainik Jagran, 1 October, 2020) News Link

  1. Bhatinda Teacher Spends Rs 20,000 Each Month To Take Free Classes for 2200 Students

Key points:

  1. It’s 4.00 pm and Sanjeev Kumar, a resident of Bhatinda, is getting ready for his online session. A teacher of mathematics with over 18 years experience of teaching at various Kendriya Vidyalaya’s across India, Sanjeev is now at the forefront of a new role – digital educator.
  2. Since these online sessions that Sanjeev conducts are absolutely free of charge, he mentions that almost Rs 20,000 is put into these efforts each month from his own salary.
  3. The system is fairly straightforward. Students can send a Whatsapp message to 9464302178, mentioning the name of the student, class, and name of the school. Once these details are sent, the student will get a confirmation message and be added to a broadcast group. Details of the session will be sent out ten minutes before the session begins.

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • 29-YO Doctor Quits Delhi Job & Moves to a Mountain Village to Serve the Neglected

Key points:

  1. Residents of Rakcham village, in Himachal Pradesh’s Kinnaur district, were happy about finally getting a doctor in October 2019 after months in their local Public Health Centre (PHC). But there were certain reservations.
  2. Dr Shilpa Kumar’s genuine efforts to make individual report cards for patients with diabetes and hypertension impressed the villagers, who were neglected till then. She focussed on people needing regular check-ups and minor trauma cases.
  3. After this wholehearted acceptance by 800 odd villagers, it did not feel right to leave the village and go home in Bengaluru during the nationwide lockdown in March owing to global COVID-19 pandemic.
  4. When cases were reported in the neighbouring village, Reckong Peo, Dr Shilpa started doing random checks on people not just in her village but also other villages from the Sangla block. At present, she has been temporarily transferred to Sangla due to lack of staff

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • हफ्ते में एक दिन खेत में मजदूरी करती है यह अधिकारी, ताकि दान कर सकें खेती में कमाए पैसे

Key points:

  1. हम सरकारी अधिकारियों को लेकर अक्सर सुनते हैं कि वह जरूरतमंदों की मदद करने के बजाय भ्रष्टाचार और अन्य अनैतिक कार्यों को अंजाम देते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी किसी सब-रजिस्ट्रार को यह कहते हुए सुना है – “मैं सप्ताह के अंत में, खेत में काम करके 250-300 रुपए कमाती हूँ। मैं दिन में 9 बजे से लेकर 5 बजे तक काम करती हूँ। मुझे जो पैसे मिलते हैं, उसे जरूरमंदों या किसान साथियों को दे देती हूँ।”
  2. इस सामाजिक योद्धा ने अब तक 17 बच्चों को एक नई जिंदगी देने के साथ ही, 300 से अधिक छात्रों और युवा पेशेवरों को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान अपने परिवारों की मदद की खातिर खेती करने के लिए प्रेरित किया।
  3. हालाँकि, इतना सबकुछ हासिल करने के लिए तस्लीमा अपनी कमाई के आधे से अधिक हिस्से को खर्च कर देती हैं और इन कार्यों में उन्हें पति और परिवार की पूरी मदद मिलती है, जिसके लिए वह धन्यवाद भी जताती हैं।
  4. तस्लीमा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘गुट्टी कोयला पेड्डका’ की उपाधि दी गई है, जिसका अर्थ है – गुट्टी कोया जनजातियों की बहन।
  5. तस्लीमा के फेसबुक पर 1,500 से अधिक फॉलोअर हैं और उनके नाम से ‘सब-रजिस्ट्रार तस्लीमा फॉलोअर्स’ पेज भी चलता है, जो समुदाय के सदस्यों और दूसरों को सहायता करने में मदद करता है।

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  1. 29-YO Doctor Quits Delhi Job & Moves to a Mountain Village to Serve the Neglected

Key points:

  1. Residents of Rakcham village, in Himachal Pradesh’s Kinnaur district, were happy about finally getting a doctor in October 2019 after months in their local Public Health Centre (PHC). But there were certain reservations.
  2. Dr Shilpa Kumar’s genuine efforts to make individual report cards for patients with diabetes and hypertension impressed the villagers, who were neglected till then. She focussed on people needing regular check-ups and minor trauma cases.
  3. After this wholehearted acceptance by 800 odd villagers, it did not feel right to leave the village and go home in Bengaluru during the nationwide lockdown in March owing to global COVID-19 pandemic.
  4. When cases were reported in the neighbouring village, Reckong Peo, Dr Shilpa started doing random checks on people not just in her village but also other villages from the Sangla block. At present, she has been temporarily transferred to Sangla due to lack of staff

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • हफ्ते में एक दिन खेत में मजदूरी करती है यह अधिकारी, ताकि दान कर सकें खेती में कमाए पैसे

Key points:

  1. हम सरकारी अधिकारियों को लेकर अक्सर सुनते हैं कि वह जरूरतमंदों की मदद करने के बजाय भ्रष्टाचार और अन्य अनैतिक कार्यों को अंजाम देते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी किसी सब-रजिस्ट्रार को यह कहते हुए सुना है – “मैं सप्ताह के अंत में, खेत में काम करके 250-300 रुपए कमाती हूँ। मैं दिन में 9 बजे से लेकर 5 बजे तक काम करती हूँ। मुझे जो पैसे मिलते हैं, उसे जरूरमंदों या किसान साथियों को दे देती हूँ।”
  2. इस सामाजिक योद्धा ने अब तक 17 बच्चों को एक नई जिंदगी देने के साथ ही, 300 से अधिक छात्रों और युवा पेशेवरों को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान अपने परिवारों की मदद की खातिर खेती करने के लिए प्रेरित किया।
  3. हालाँकि, इतना सबकुछ हासिल करने के लिए तस्लीमा अपनी कमाई के आधे से अधिक हिस्से को खर्च कर देती हैं और इन कार्यों में उन्हें पति और परिवार की पूरी मदद मिलती है, जिसके लिए वह धन्यवाद भी जताती हैं।
  4. तस्लीमा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘गुट्टी कोयला पेड्डका’ की उपाधि दी गई है, जिसका अर्थ है – गुट्टी कोया जनजातियों की बहन।
  5. तस्लीमा के फेसबुक पर 1,500 से अधिक फॉलोअर हैं और उनके नाम से ‘सब-रजिस्ट्रार तस्लीमा फॉलोअर्स’ पेज भी चलता है, जो समुदाय के सदस्यों और दूसरों को सहायता करने में मदद करता है।

(The Better India, 1 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • Bootstrapped startup LokalPe matches blue-collar workers with hyperlocal skill-based jobs

Key points:

  1. Bengaluru-based startup LokalPe is a jobs search platform for blue-collar workers who lost their gigs and returned to their villages after the coronavirus lockdown.
  2. Enter LokalPe, a job search platform that matches blue-collar workers with hyperlocal skill-based jobs at their base locations. LokalPe went live in June, and claims to have helped fill up over 2,000 vacancies in Uttar Pradesh, Bihar, and Madhya Pradesh — states that recorded the highest rates of returning migrant labour.
  3. The Bengaluru-based startup caters to skilled, semi-skilled, and unskilled workers, and generates micro-employment to build strong local communities. Job seekers can look for gigs in their areas, upload 15-second video resumes showcasing their skills, and choose from over 5,000 real-time vacancies. They can also filter their search based on age, gender, state, districts, and skill level. Job listings on LokalPe span across 45 categories, including cook, plumber, poultry farmer, security guard, driver, welder, tailor, florist, carpenter, shop helper, lift operator, factory worker, restaurant staff, and more.
  4. The blue-and-grey-collar segment is estimated to be worth $60 million, with a bunch of app-based job platforms like WorkIndia, Apna.co, Aasaanjobs, QuikrJobs and OLX People jostling for market share. But LokalPe hopes to differentiate itself with its video-centric and real-time jobs marketplace.

(Your Story, 1 October) News Link

  • [Startup Bharat] This 24-year-old entrepreneur from Kochi offers premium handcrafted jewellery at affordable prices

Key points:

  1. Kochi-based startup Stardom Accessories sells handmade jewellery including chains, earrings and rings across the country.
  2. Realising the increase in demand for artificial jewellery, especially among the youth, many entrepreneurs have started a business in manufacturing, crafting and selling artificial jewellery. One such entrepreneur is Kochi-based Neeta Vijay Kumar who believes that handcrafted jewellery in India is often downplayed. Her startup Stardom Accessories promotes and sells handcrafted or handmade jewellery procured directly from the craftsmen in Jaipur and Delhi.
  3. “People usually buy jewellery without realising the value or the effort that goes behind making it. I believe that this aspect of people should change. One should know the value and story behind the jewellery before buying it. My brand talks about the jewellery culture of India through the unique designs that we provide,” the 24-year-old entrepreneur tells
  4. Neeta says: “I don’t need to pay the handcrafting people. I just need to purchase it as per the order. Since I don’t have stock as such, I will never go in a loss,” adding that her startup gets 30-40 percent profit margin every month.

(Your Story, 1 October) News Link

  • Digital wellness startup HealthifyMe sees growth amid pandemic; eyes Rs 150 Cr ARR by January 2021

Key points:

  1. HealthifyMe’s AI platform has enabled the digital wellness startup to garner a greater number of paying subscribers with cost-effective plans, which has resulted in stronger revenue growth.
  2. The coronavirus pandemic has made people more health conscious than before. With COVID-19 being increasingly associated with comorbidities and social distancing becoming the new norm, people have turned to digital wellness platforms to keep fit and stay healthy. In this scenario, digital wellness startup HealthifyMe, which offers coaching and AI-based nutrition plans to customers, has reported a rise in revenues and paying customers in the past few months.
  3. The startup is now looking to cross an annual recurring revenue (ARR) of $20 million (Rs 148 crore approximately) by January 2021. It already crossed $15 million (Rs 111 crore approximately) in August this year.
  4. Tushar Vashisht, co-founder and CEO, HealthifyMe, says, “AI is transforming business models. Our business has transformed from a services led model to product led and this comes at a fraction of price point.”

(Your Story, 1 October) News Link

  • Jaipur Entrepreneur’s Startup Helps Over 20,000 Migrants Upskill, Bag New Jobs

Key points:

  1. Shipra Sharma Bhutani, from Capacita Connect, is helping migrants learn new skills and be absorbed by companies across sectors
  2. 33-year-old Pawan from Jaipur is one of the millions of Indians who lost their job due to the global Covid-19 pandemic. However, with a little help with upskilling and training from a government-approved course, she is now making masks and managing a girls’ hostel in her town.
  3. The online platform helps match skilled human resources with specific requirements of industries. Amazingly, Capacita Connect claims over 20,000 migrants have taken their services, upgrading their skills and landing jobs since March, 2020. Here’s how all this happened.
  4. The startup asks migrants to register with them for upgrading their skills. Once registered, the candidate has to study a course similar to their field or in the area where they would like to find a job. The registration fees cost between Rs 1,500 and Rs 3,000 depending on the skillset and the sector.
  5. Shipra says the course requires physical and online means to pursue. “Once the candidate has studied, s/he has to undergo a test. The tests are held at one of the centres. Once the candidate passes, they are directed into their chosen sector to get absorbed by companies,” she adds.The scores of the candidate lists are uploaded on the government website, and certificates are issued accordingly.
  6. “Many migrant labourers are now stitching masks, making Personal Protective Equipment (PPE) kits, and also working in logistics and textile industries. The migrants now have a job paying between Rs 15,000 and Rs 25,000. They also got jobs in their home state,” Shipra says.

(The Better India, 30 September) News Link

  • Investment in Bharat by US companies
    • Silver Lake to invest additional Rs 1,875 Cr in Reliance Retail

Key points:

  1. This brings the aggregate investment by Silver Lake and its co-investors in RRVL to Rs 9,375 crore, which will translate into a 2.13 percent equity stake in RRVL.
  2. “Reliance Industries Limited (‘Reliance Industries’) and Reliance Retail Ventures Limited (‘RRVL’) announced today that co-investors of Silver Lake will invest an additional Rs 1,875 crore into RRVL, a subsidiary of Reliance Industries,” the statement said.
  3. “The latest investment values Reliance Retail at a pre-money equity value of Rs 4.285 lakh crore,” the statement added.
  4. “Silver Lake and its co-investors are valued partners on our journey to transform Indian Retail for the benefit of all Indians. We are pleased to have their confidence and support, as well as the benefit of their leadership in global technology investing and their valued network of relationships for the Retail revolution in India.”
  5. Silver Lake Co-CEO and Managing Partner Egon Durban said, “We are delighted to increase our exposure and bring more of our co-investors into this unmatched opportunity. The continued investment momentum over the last few weeks is proof of the compelling vision and business model of Reliance Retail – and underscores the tremendous potential of the transformative New Commerce initiative.”

(Your Story, 1 October 2020) News Link

Rising Bharat National News Feed: September 29th 2020

  1. जम्मूकश्मीर में शादी करने वाली बाहरी राज्यों की महिलाओं को भी मिलेगा डोमिसाइल, नियमों में जल्द होगा बदलाव

Key points:

  1. जम्मू-कश्मीर डोमिसाइल नियमों में जल्द बदलाव होगा। इसके लिए केंद्र शासित सरकार जल्द ही संशोधन आदेश जारी करेगी। इसके तहत बाहरी राज्यों की जम्मू कश्मीर में शादी करने वाली महिलाओं को भी डोमिसाइल मिल सकेगा। साथ ही माता-पिता में किसी एक के भी पीआरसी धारक होने पर बच्चों को डोमिसाइल प्रमाणपत्र मिलेगा। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी। 
  2. बताते हैं कि डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों की ओर से ऐसे आवेदनों को अस्वीकृत किए जाने के बाद यह पहल शुरू हुई। मई में जारी आदेश में ऐसी महिलाओं के लिए भी कोई प्रावधान नहीं था जो रहने वाली तो दूसरे राज्यों की हैं, लेकिन उन्होंने यहां के पीआरसी धारक से शादी की है। आवेदन इस वजह से भी अस्वीकृत किए जा रहे हैं कि संबंधित दस्तावेज में पिता का पीआरसी नहीं लगा है। माता के पीआरसी को वैध दस्तावेज नहीं माना जा रहा है। 
  3. प्रदेश में अब तक 18.52 लाख डोमिसाइल प्रमाणपत्र बन चुके हैं। इसके लिए 21.99 लाख आवेदन प्राप्त किए गए हैं। सरकार ने 18 मई को डोमिसाइल प्रमाणपत्र संबंधी नियम जारी किए थे। इसमें गैर प्रांत के लोगों के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों को भी हकदार बनाया गया था। नए कानून के अनुसार 15 साल तक प्रदेश में रहने वाले बाहरी लोगों को भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी हो सकता है। अनुच्छेद 370 हटने से पहले केवल स्टेट सब्जेक्ट धारकों को ही जमीन खरीदने तथा सरकारी नौकरी पाने का हक था।

(Amar Ujala, 29 September 2020) News Link

  • POJK
  • गिलगितबाल्टिस्तान चुनाव का भारत ने किया विरोध, कहापाक खाली करे कब्जे वाला क्षेत्र

Key points:

  1. भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। पाकिस्तान ने यहां विधानसभा चुनाव का एलान किया है, जो 15 नवंबर को होने जा रहा है। भारत का कहना है कि रणनीतिक रूप से गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जिसपर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। 
  2. विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, हमने 15 नवंबर, 2020 को होने वाले तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए चुनावों की घोषणा के बारे में रिपोर्ट देखी है। हम पाकिस्तान के इस कदम का कड़ा विरोध जताते हैं। 
  3. बयान में कहा गया कि भारत इस बात को फिर से दोहराता है कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ-साथ गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्र 1947 से ही भारत का अभिन्न अंग हैं। पाकिस्तान सरकार के पास अवैध रूप से और जबरन उसके कब्जे वाले क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है।
  4. बयान में कहा गया, भारत सरकार ने तथाकथित ‘गिलगित-बाल्टिस्तान (चुनाव और कार्यवाहक सरकार) संशोधन आदेश 2020’ जैसे हालिया कार्यों को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली इस्लामाबाद द्वारा अपने अवैध और जबरन कब्जे के तहत क्षेत्रों की स्थिति में परिवर्तन लाने के प्रयास का विरोध करता है। 
  5. इसमें कहा गया, इस तरह की कार्रवाई न तो पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे को छिपा सकती है और न ही पिछले सात दशकों से पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वतंत्रता के उल्लंघन और शोषण को।
  6. बयान में कहा गया, ये दिखावटी चुनाव पाकिस्तान द्वारा इसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में अपनी सेना को तैनात करने के लिए है। हम पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे के तहत सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने का आह्वान करते हैं।

(Amar Ujala, 29 September, 2020) News Link

  • Construction of dams in PoK, Gilgit-Baltistan by Pak-China are illegal: Activist to UN

Key points:

  1. A political activist from Pakistan occupied Kashmir lambasted on Pakistan and China for constructing mega dams in the occupied territories during the 45th Session of UN Human Rights Council in Geneva on September 28. Nasir Aziz Khan, Central spokesperson of United Kashmir People’s National Party said in his intervention, “Plundering of natural resources in disputed areas of so-called Azad Kashmir (Pakistan occupied Kashmir) and Gilgit-Baltistan deprived people from their own natural wealth. Kashmiris are owner of rivers and water but Islamabad is constructing mega dams without consultation of local population. Pakistan and China signed agreements to construct Azad Pattan and Kohala Hydropower Projects which will be built on Jhelum River in so called Azad Kashmir,” said Khan.

(Times of India, 29 September 2020) News Link

  • Illegal arrest, torture of activist who removed Pakistani flag in PoK raised at UNHRC

Key points:

  1. Exiled political leaders from Pakistan occupied Kashmir (PoK) have raised the issue of abduction, torture and harassment of activists and journalists by Pakistani agencies at the illegally occupied region during the ongoing 45th Session of UN Human Rights Council in Genava. Sardar Shaukat Ali Kashmiri, the chairman of United Kashmir People’s National Party during his intervention raised the issue of British Kashmiri Journalist Tanveer Ahmed, who was arrested and tortured by Pakistani agencies for protesting against hoisting Pakistani flag in PoK.
  2. At the behest of Pakistan, the local administration brutally beaten, arrested and jailed him.
  3. In Gilgit Baltistan peaceful political activists Baba Jan Iftikhar Hussain and their colleagues were trailed under Anti Terrorist Act and were awarded 40 to 90 years imprisonment. We urge upon HRC to put pressure on Islamabad for immediate and unconditional release of all activists’, said Shaukat Ali Kashmiri.

(DNA India, 29 September 2020) News Link

  1. AICTE नई शिक्षा नीति के मुताबिक सिलेबस का स्ट्रक्चर बदलेगा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के कोर्सेस में मल्टीपल एंट्री का ऑप्शन भी होगा

Key points:

  1. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) देश भर में संचालित हो रहे टूरिज्म और हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट के कोर्सेस के सिलेबस में बदलाव करने जा रहा है। ये बदलाव पिछले महीने जारी हुई नई शिक्षा नीति के मुताबिक किए जाएंगे।
  2. टूरिज्म हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट कोर्स से जुड़े बड़े बदलावों के लिए AICTE में एक अलग बोर्ड है। इसका नाम है ऑल इंडिया बोर्ड ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट ( AIBTHM)। यही बोर्ड सिलेबस के स्ट्रक्चर को बदलेगा।
  3. टूरिज्म और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के सभी यूजी-पीजी कोर्स को अब मल्टी – डिसिप्लिनरी बनाया जाएगा। साथ ही हर कोर्स में मल्टीपल एग्जिट ऑप्शन भी जोड़े जाएंगे। इन बदलावों को लागू करने के लिए बोर्ड ने एक्सपर्ट्स की एक कमेटी भी गठित कर ली है।

(Dainik Bhaskar, 29 September 2020) News Link