Tag Archives: startup India

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 25th 2020

  • Startup in Bharat by Bhartiya
  1. Amidst COVID-19, this farm-to-table startup is helping farmers earn more with cloud farming

Key points:

  1. Bengaluru-based farm-to-table startup Orinko aims to make farming more sustainable, predictable, and profitable for farmers with the use of technology while keeping in mind the consumers’ needs.
  2. Having grown up seeing the issues besetting the agricultural landscape, Vikas Mittal and Ankit Agarwal, Co-founders of agritech startup Orinko, decided to improve farmer’s quality of living.  With Orinko, the co-founders aim to revolutionise the agritech landscape and improve farmers’ quality of living while building credibility for end-customers.
  3. Finally, in October 2019, Orinko was incorporated as a full-stack agritech fruit and vegetable (FnV) startup and became operational in February this year.
  4. “We work on a unique model that addresses the farmers’ needs, as well as that of the end customers when it comes to fruit and vegetable produce,” Vikas Mittal, CEO and Co-founder, Orinko, tells YourStory.

(Your Story, 25 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 9th 2020

  • Developing PPE kits and testing kits
    • भारत और इजरायल का कमाल, चुटकियों में पता चलेगा कोरोना है या नहीं, सिर्फ पाइप में मारना होगा फूंक और 1 मिनट के भीतर नतीजे

Key points:

  1. भारत और इजरायल ने साथ मिलकर तैयार की कोरोना टेस्ट की गेमचेंजर टेक्नॉलजी
  2. सिर्फ 30 से 50 सेकंड में मिलेंगे नतीजे, सैंपल भी देने की जरूरत नहीं, सिर्फ पाइफ में फूंक मारना होगा
  3. भारत में इजरायल के राजदूत रॉन माल्का ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में इस बारे में जानकारी दी
  4. आवाज से कोरोना टेस्ट का भी हो चुका है ट्रायल – भारत और इजरायल ने संयुक्त रूप से 4 टेस्ट टेक्नॉलजी का ट्रायल कर चुके हैं। भारत में बड़ी तादाद में इन टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए। इन तकनीकों में ब्रेथ ऐनालाइजर और वॉइस टेस्ट भी शामिल हैं। इनमें कोरोना का तुरंत पता लगाने की क्षमता है।
  5. वैक्सीन को लेकर दोनों देशों के बीच तालमेल के सवाल पर माल्का ने कहा कि दोनों देश हमेश से रिसर्च और टेक्नॉलजी को एक दूसरे से शेयर करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक दूसरे का सहयोग और समर्थन कर रहे हैं। इजरायली राजदूत ने कहा कि भारत में कोरोना वैक्सीन का हब बनने के लिहाज से तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब भी विश्वसनीय, सुरक्षित और कारगर वैक्सीन बनेगी तब उसमें से ज्यादातर का उत्पादन भारत में होगा। माल्का ने कहा कि भारत जब भी वैक्सीन बनाएगा तब इजरायल की जरूरतों का भी ख्याल रखेगा।

(Navbharart Times, 9 October 2020) News Link

  1. महाराष्ट्र: पपीतातरबूज की खेती कर लाखों कमाता है यह किसान, 50 अन्य को किया प्रेरित

Key points:

  1. महाराष्ट्र के बीड जिले के पराली तालुका के नंदगौल गाँव के संदीप गिते ने सूखाग्रस्त क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
  2. संदीप बताते हैं कि जैविक विधि से खेती करने में परम्परागत शैलियों के मुकाबले काफी कम पानी की जरूरत होती है और खर्च में भी कम होता है।
  3. संदीप फिलहाल, 20 टन पपीते की खेती करते हैं और उनके उत्पादों की आपूर्ति राज्य के कई हिस्सों में की जाती है।
  4. संदीप के कामयाबी को देखते हुए गाँव के अन्य किसान भी कुछ ऐसा ही प्रयोग करने के लिए विचार करने लगे। यहाँ जनवरी, 2020 में आठ किसानों का समूह बनाया गया था, जिससे कि आज 50 किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान दूसरे फलों की भी खेती करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

(The Better India, 9 October 2020) News Link

  • After Son Misses Desserts, Mumbai Parents Launch Amazing 100% Vegan Ice Creams

Key points:

  1. Samir and Hemali from Mumbai turned vegans two decades ago and raised their children as vegans. Here’s how they found alternatives to everything, including ice cream
  2. The decision to turn vegan was not easy for Mumbai-based Samir Pasad, the founder of Vegan Bites and Nomou, and his father. As vegetarians, their diet was heavily dairy dependent and since they made the decision to go vegan virtually overnight, twenty years ago, it meant their food choices became extremely limited. Vegans are people who refrain from consuming meat, eggs, dairy products, and any other animal-derived substances.
  3. Their initial guinea pigs were their own children and relatives who gave genuine feedback to help them develop a vegan ice cream closest to a conventional one. They also got reviews from customers who were offered ice creams along with their catered meals.
  4. Their efforts paid off because they discovered there was a market, albeit a niche one, for vegan ice creams. Today, Nomou is sold in supermarkets like Nature’s Basket, ice cream parlours, and even directly to customers who order via Swiggy and Zomato.

(The Better India, 9 October 2020) News Link

  • दिल्ली में बेकिंग सीख मां को जम्मू भेजती थीं रेसिपी; नौकरी छोड़ 2 लाख रुपए से शुरू किया केक का बिजनेस, 50 हजार रुपए महीना कमाती हैं

Key points:

  1. दिल्ली में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी करती थीं तान्या, जनवरी में खुद का बिजनेस करने लौट आईं, अपने घर के किचन को ही वर्कशॉप में बदला
  2. लॉकडाउन में फेसबुक-इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर बेकरी आइटम्स को प्रमोट करना शुरू किया, ऑनलाइन और फोन पर ऑर्डर आने लगे

(Dainik Bhaskar, 9 October 2020) News Link

  • किसानों ने अभिशाप को बनाया वरदान, अब सफेद रेत पर हरा सोना उगाकर हो रहे मालामाल, तस्वीरें

Key points:

  1. पहले उपजाऊ भूमि में रेत भर जाने से किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे थे, लेकिन किसान अब नई तकनीक से खेती करने लगे हैं। जिससे सफेद रेत में हरी सब्जियों व रेत पर उगने वाली फसल से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। कछार की मिट्टी में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है न ही सिंचाई की। बाढ़ के इस अभिशाप को कछार के किसानों ने अपने लिए वरदान बना लिया है।
  2. दो माह पूर्व जहां 15 से 20 फीट तक बाढ़ का पानी भरा था जिसमें किसानों की हजारों बीघा धान, गन्ना आदि फसल बर्बाद हो गई थी, आज उन्हीं सफेद रेत वाला खेतों को हरा सोने की खदान में बदलने के लिए संसाधन जुटाने और संवारने में किसान अपना पसीना बहा रहे है। यहां नवंबर माह से खेती का काम शुरु होकर मई माह में खत्म हो जाता है।
  3. नदी के रेत में बड़े स्तर पर तरबूज व खरबूजा की फसल लगाई जाती है फसल तैयार होने पर कई जिले के व्यापारी ट्रक द्वारा ले जाते हैं। दो जिलों की सीमा पर बसा गांव गुनौली निवासी पांचवी जमात तक पढ़े कालीप्रसाद व सीताराम कहते हैं कि खरबूजे की खेती ने उनके बैंक के खाते को भी वजनी कर दिया है, कहते हैं कि हसरत से हौसला है और हौसले से ही उड़ान होती है।
  4. गांव के ही निवासी आठवीं जमात पास धनंजय मिश्रा बताते हैं कि उनके पास सवा सौ बीघा खेत है। जिसमें तरबूज, खरबूजा, लौकी, तोरई, कुम्हड़ा, करेला, परवल, कद्दू, खीरा सहित धान, गन्ना की यहां खेती नवंबर माह से शुरू होती है और मई माह तक समाप्त हो जाती है।

(Amar Ujala, 9 October 2020) News Link

  1. हिंसा ग्रस् दक्षिणी सूडान में आईपीएस अधिकारी रागिनी बनीं देश के लिए गर्व करने की वजह, जानें कैसे

Key Points:

  1. संयुक्‍त राष्‍ट्र की तरफ से जारी एक शॉर्ट वीडियो में रागिनी ने बताया है कि इस तरह के शांति अभियान का सदस्‍य बनना उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। रागिनी 6 अप्रैल 2019 को संयुक्‍त राष्‍ट्र के शांति अभियान का हिस्‍सा बनी थीं। इस मिशन में वो अकेली नहीं हैं, बल्कि उनके पति भी इसी मिशन का हिस्‍सा हैं। उन्‍होंने ही यूएन मिशन के लिए रागिनी को प्रेरित भी किया था।
  2. रागिनी दक्षिणी सूडान में तैनात हैं। ये देश काफी समय से हिंसा की चपेट में है। इसका सबसे ज्‍यादा खामियाजा यहां की महिलाओं और बच्‍चों को उठाना पड़ रहा है। हजारों की तादाद में यहां पर लोग अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रह गए हैं और यूएन की मदद पर जीवन गुजार रहे हैं। ऐसे में एक महिला अधिकारी के तौर पर रागिनी यूएन के शिविरों में रह रही महिलाओं के लिए भगवान से कम नहीं हैं। रागिनी बताती हैं कि यहां पर रह रही महिलाओं को ऐसी कई तरह की परेशानियां होती हैं जो वो किसी पुरुष अधिकारी से नहीं बता सकती हैं। ऐसे में वो उनकी मौजूदगी इन महिलाओं को राहत देती है।
  3. रागिनी मानती हैं कि यहां फैली हिंसा ने बड़े पैमाने पर महिलाओं और बच्‍चों को मुश्किलों में डाला है। महिला अधिकारी के होने का फायदा ये है कि महिलाएं अपनी बात सहजता से कर पाती हैं। उन्‍होंने यूएन के वीडियो में कहा कि उन्‍हें जो फीडबैक मिलता है उससे उन्‍हें काफी सुकून मिलता है। वो कहती हैं कि उन्‍हें यहां पर आने के बाद अभूतपूर्व अनुभव हुआ है। यहां पर आकर वो उन लोगों की मदद कर पाई हैं, जो इसके सही मायने में हकदार हैं। यहां पर काम करने वाला हर व्‍यक्ति इन लोगों के लिए आशा का स्रोत है। रागिनी ने वीडियो में बताया कि यूएन मिशन की नीली टोपी पहनने के बाद उन्‍हें एक नई ताकत और संतुष्टि मिलती है। उन्‍होंने यूएन मिशन के लिए दूसरों को भी प्रेरित किया है। उनका कहना है कि आप भी ये कर सकते हैं और आपको ये जरूर करना चाहिए।

(Dainik Jagran, 9 October 2020) News Link

  1. IIT Delhi Innovation: बोतल में पानी डालते ही खत्म हो जाएंगे जीवाणुकीटाणु , IIT दिल्ली ने विकसित की तकनीक

Key points:

  1. प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक बोतल तैयार किया है जो जीवाणु-कीटाणु को खत्म कर सकेगा। आइआइटी दिल्ली-इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोसैफ सॉल्यूशंस ने नैनो-टेक्नॉलॉजी और पारंपरिक विज्ञान के मिश्रण से पानी की यह बोतल तैयार की है। बोतल तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर आधारित है। इसे एक्यूक्योर (AqCure)  नाम दिया गया है।
  2. आइआइटी पदाधिकारी ने बताया कि पानी की बोतल एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटिफंगल हैं। इसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से सक्रिय नैनो-तांबा निकलता है। निकलने वाला तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरल बनाता है। सीधे संपर्क पर यह किसी भी तरह के जीवाणु और कीटाणु को कम या खत्म करता है। साथ ही संग्रहण किए गए पानी सुरक्षित बनाता है।
  3. यह एक पेटेंट तकनीक है जिसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से संयमित तरीके से सक्रिय नैनो-तांबा उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरस बनाता है, जो सीछे संपर्क पर रोगाणुओं के संचरण को कम करता है और पानी को सूक्ष्मजीव विज्ञानी रूप से सुरक्षित बनाता है।

(Dainik Jagran, 9 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • [Startup Bharat] How Goa-based Nao Spirits & Beverages is putting India on world gin map

Key points:

  1. Nao Spirits & Beverages has two gin brands under its umbrella: Greater Than and Hapusa. The startup has recorded 400 percent rise in sales in one year.
  2. Making the most of this trend, Anand Virmani and his wife Aparajita Ninan started Nao Spirits & Beverages in 2016. Nao Spirits claims to be India’s first craft gin company, and also one of the country’s first craft spirit startups.
  3. The startup was initially founded in Delhi, although its distillery was set up in Goa. Over time, Nao Spirits shifted its base to Goa and it turned out to be rather an advantage.
  4. With a small distillery in Goa, Nao Spirits has now branched out its distribution network to eight Indian cities and 14 countries across the globe. The startup has a subsidiary office in the UK.
  5. Nao Spirits sources its bottles, labels, and a few botanicals from abroad. However, most of the botanicals, along with the neutral wheat spirit, are procured from various parts of the country and distilled in Goa, in a copper pot still.

Your Story, 9 October 2020) News Link

  • Using electric planes and UAVs, this startup wants to redefine urban mobility in India

Key points:

  1. Chennai-based startup Ubifly Technologies Private Limited, branded as The ePlane Company, is building electric planes and UAVs for delivery and short-range intracity travel to redefine urban mobility.
  2. Increasing population, encroachments, traffic problems, and infrastructure problems are major concerns for Indian roadways. In a bid to solve issues related to inadequate road infrastructure, Chennai-based The ePlane Company is looking to take the aerial route.
  3. Ubifly Technologies Private Limited, better known as The ePlane Company (TEC), was founded in 2016 by Pranjal Mehta and Satyanarayanan Chakravarthy to provide aerial delivery services. The startup ideated out from the National Centre for Combustion Research & Development Lab (NCCRD).
  4. Speaking with YourStory, Satyanarayanan, Co-founder and CTO, explains that the startup is building electric planes and unmanned aerial vehicles (UAV) for short-range intracity travels and is aimed at redefining urban mobility.
  5. He explains that TEC vehicles are a hybrid — they take off and land like a drone while moving forward in the air like an electric aeroplane.
  6. Incubated at IITM Incubation Cell, IIT Madras, TEC founder made an initial investment of around Rs 30 lakh to develop the UAVs.
  7. The startup claims that its copyrighted ML algorithms enable a supervision-free flight. The vehicle takes off and lands vertically like a drone with a one push button. However, it moves forward like a plane and automatically detects any obstacles such as trees or power poles, etc. to ensure a safe flight..

(Your Story, 9 October 2020) News Link

  1. Free UPSC Coaching to Treating Addicts: Nagaland IPS Goes Above Duty to Save Lives

Key points:

  • When Dr. Pritpal Kaur Batra, a 2016-batch officer of the Indian Police Service (IPS), was first posted in the remote eastern border district of Tuensang in Nagaland as a sub-divisional police officer (SDPO), she was immediately struck by the generous and giving nature of its residents, who accorded her a warm welcome.
  • Using her long standing passion for and knowledge of teaching and farming, Dr. Kaur conducted free coaching classes for UPSC and state service aspirants, bought books and other study materials for them with her own money, and treated, counselled and taught drug addicts new vocational skills like organic farming.
  • As a result, Dr. Kaur, a native of Yamuna Nagar, Haryana, has made a real mark among the communities of Naga Hills who have been deleteriously affected by rampant underdevelopment, proliferation of synthetic drugs, HIV-AIDS, and a long-running insurgency.
  • Dr. Kaur decided to set up coaching classes for the Union civil services exam on a trial basis. The local administration advertised this initiative using social media and received a good response. The Superintendent of Police, Bharat Markad, helped her by sanctioning the use of the conference hall on the office premises and even supported the venture with money to purchase study materials.
  • Another significant initiative was conducting anti-narcotics campaigns across schools and colleges, and using her medical training to treat drug addicts using a combination of opioid substitution treatment (OST) and counselling. (The Better India, 9 October 2020) News Link
  • Entrepreneur Used Own Money & Ancestral Property to Start Goa’s First Farm College

Key points:

  1. Goa’s first community agricultural college was set up by Manguirish Pai Raiker 7 years ago.
  2. Yet, there are woefully inadequate capacities in India when it comes to actually learning how to farm. This was the realisation that made Manguirish Pai Raiker (64). a resident of Goa, to start the state’s first community agriculture college in 2013.
  3. Manguirish started a manufacturing business in the late seventies and continues to run it successfully till date. “Despite being in the manufacturing industry, it was agriculture that always fascinated me,” says Manguirish.
  4. He realised that while what he was doing was definitely helpful to individual students, to create large-scale impact, he needed to formalise it into a scalable process.
  5. In building the college Manguirish mentions that he spent all his life savings, he says, “If not for my supportive wife [Varsha], I doubt I would have been able to pull it off.”

(The Better India, 9 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 8th 2020

  1. रूसी कोरोना वैक्सीन के मेगा ट्रायल से भारत ने कर दिया इनकार, जानिए क्या है वजह

Key points:

  1. भारत ने रूसी कोरोना वैक्सीन को बड़े पैमाने पर ट्रायल की अनुमति देने से किया इनकार
  2. भारत में इस स्पूतनिक वी की साझेदार डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज लिमिटेड ने मांगी थी अनुमति
  3. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने पहले इसे छोटे स्तर पर ट्रायल करने को कहा है
  4. भारत के इस फैसले के बाद रूस के Sputnik-V वैक्सीन को शुरू करने की तैयारियों को झटका लगा है। रूस किसी ऐसे देश वैक्सीन को अप्रूव करने की कोशिश करने में जुटा था जहां कोरोना के नए केसों की संख्या दुनिया में बहुत ज्यादा हो। माना जा रहा है कि भारत अगले कुछ हफ्तों में कोरोना संक्रमण के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ नंबर वन हो सकता है।

(Navbahrat Times, 8 October, 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • How Gurugram-based CogniAble is using machine learning for early detection of autism spectrum disorder

Key points:

  1. Gurugram-based healthtech startup CogniAble provides two solutions: early automated screening for autism and digital therapy management. The online platform allows people to upload videos of children and get them screened for autism.
  2. Autism spectrum disorder isn’t easy to understand, but depictions in TV and movies have helped familiarise us with the developmental disorder that affects communication and behaviour.
  3. Founded in 2017 by Manu Kohli with his wife Dr Swati Kohli, Dr Prathosh AP and Dr Joshua Pritchard, the startup aims to bring affordability, accessibility and high-quality management to homes across India. Autism can be diagnosed at any age, but it is said to be a “developmental disorder” as symptoms generally appear in the first two years of life. This is why CogniAble is focusing on early detection by providing an online platform where people can upload videos of children and get them screened for autism.
  4. Quoting data from Indian Academy of Pediatrics, Manu says all children should be screened using standardised autism screening tools between 18 and 36 months of age. However, limited health professionals and infrastructure mean several children are diagnosed a year or two late.“CogniAble is an online platform available remotely for early screening and affordable behavioural intervention for autism spectrum disorders,” he says.
  5. The co-founder explains that users can upload videos of children using the mobile application. These are analysed by deep learning models to identify fine motor, gross motor, and complex actions based on a stimulus provided by a caregiver.
  6. After detection of autism, behavioural therapies are key to develop necessary skills promoting school and societal inclusion of children. The platform enables parents, schools, and institutes to get access to integrated assessment and treatment plans at 20 percent lesser costs, the founder claims.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • Starting with just two clients, B2B SaaS startup Whatfix recorded 300 pc revenue growth in 1 year

Key points:

  1. Sequoia Capital India backed SaaS startup Whatfix works as an interactive guidance platform, helping Fortune 500 companies increase employee productivity.
  2. Khadim Batti and Vara Kumar quit Huawei Telecom in 2011 to build a product that would help SMBs enhance their marketing capabilities. The product SearchEnabler would crawl across interwebs for data points, analyse them, and identify marketing recommendations.
  3. B2B SaaS startup Whatfix provides in-app overlays and guidance for implemented software. It provides services, including product adoption, user onboarding, employee training, self-service support, and performance support using enterprise web applications.
  4. Whatfix claims it has increased employee productivity by 35 percent, reducing training time and costs by 60 percent, reducing employee case tickets by 50 percent, and increasing application data accuracy by 20 percent.
  5. While headquartered in Bengaluru, Whatfix is a global startup, with employees based across multiple continents. The team increased its strength by 45 percent between January and June 2020 and has over 300 employees at present. The startup has offices in San Jose, Atlanta, Cambridge, and Melbourne.
  6. Just over the last year, Whatfix claims to have on-boarded over 100 Fortune 1000 customers. In 2019, it claims to have increased its total revenue by 300 percent.
  7. So far, Whatfix has raised $49.8 million. This year alone, it raised $32 million in its Series C round, led by Sequoia Capital India, with participation from existing investors Eight Roads Ventures, Cisco Investments, and F-Prime Capital.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • [Startup Bharat] Sambalpur-based hyperlocal startup Homvery aims to be the Urban Company of Odisha

Key points:

  1. Hyperlocal home services startup Homvery connects users with technical experts for home maintenance services. It has seen revenue grow 2.5x amidst the lockdown as home cleaning and disinfection services saw an uptick.
  2. Increased internet penetration and the use of smartphones have increased the demand for online services, and startups such as Dunzo, Urban Company, and Genie are tapping the opportunity. Hyperlocal delivery services generally involve online ordering and delivery of goods and services from mom-and-pop stores.
  3. Homvery, headquartered in Sambalpur, Odisha, aims to tap into the growing hyperlocal delivery market by providing home maintenance services.
  4. “As of now, we have over 50 technicians working with us. We have completed more than 5,000 services till now with 80 percent customer retention rate,” Prahllad claims.
  5. The startup claims to have over 7,000 registered users. “We are valued at Rs 3.51 crore as of September 2020,” he says.
  6. “In the coming five years, we want to create an impact where people say ‘call Homvery’ instead of ‘call technicians’ whenever they need home maintenance services,” Prahllad says.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • This Startup’s Bio-Digester Helps 5000 Families Give up LPG, Saves 6 Million Trees

Key points:

  1. A large, black, bloated plastic-like bag spreads in the backyard of Kedar Khilare, a farmer from Phaltan, a village about 100 km away from Pune in Maharashtra.Upon a closer look, the bag seems to be filled with air, with pipes connected to one end that lead straight into the kitchen. Occasionally children in the family are seen jumping and playing over it.“It is a biogas plant,” Kedar explains. Thanks to the system, Kedar says that he has stopped buying LPG cylinders for his family for almost two years now.
  2. However, Sistema Bio, a company headquartered in Pune selling innovative biodigesters, conducted a demonstration camp in the village and showed its benefits in 2018.
  3. Piyush Sohani, a manager of the Sistema Bio company, explains, “These biodigesters are made from an industrial geo-membrane, with a lifespan stretching up to 20 years.”

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • दिल्ली निवासी कृतिका सोढ़ी बुनाई को मानती हैं तनाव दूर करने का सबसे अच्छा जरिया, अपनी नानी के साथ शुरू किया गया उनका स्टार्ट अप देश भर में नाम कमा रहा है

Key points:

  1. जब नानी को देखकर कृतिका ने खुद बुनाई सीखी तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि यह काम उसके लिए एक थैरेपी की तरह है
  2. पहले आशा पुरी अपने घर के सदस्यों के लिए बुनाई करके सिर्फ एक कुशल गृहिणी कहलाती थीं, वहीं अब कृतिका की समझदारी से एक सफल आंत्रप्रेन्योर कहलाती हैं
  3. कृतिका एमबीए ग्रेजुएट है। नानी के साथ किए गए अपने स्टार्ट अप का नाम उसने ‘विद लव, फ्रॉम ग्रैनी’ रखा है। सोशल मीडिया पर भी इन दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया जा रहा है।

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link

  • झारखंड के छात्र ने बनाया सोशल मीडिया एपइंडो बडी‘, व्हाट्सएपफेसबुक इंस्टाग्राम को देगा टक्कर

Key points:

  1. झारखंड के खूंटी जिले के एक छात्र ने व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को टक्‍कर देने वाला एप बनाया है। डीएवी स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाले छात्र अभिषेक महतो ने ‘मेड इन इंडिया’ सोशल मीडिया एप विकसित किया है, जिसका नाम इंडो बडी है। यह  एप फीचर्स में व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को मात देता है। यह एप इन तीनों विदेशी एप का कंबाइंड रूप है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस एप की लांचिंग की है।
  2. लांचिंग के अवसर पर अभिषेक महतो ने ‘इंडो बडी’ सोशल मीडिया एप के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इंडो बडी पर लोग पूरी दुनिया से जुड़ सकेंगे। किसी भी एप को लेकर उसके यूजर की चिंता होती है कि उसकी गोपनीयता बनी रहे। इंडो बडी एप में इसे प्राथमिक चिंता के रूप में समझते हुए उपयोगकर्ता की गोपनीयता के साथ बनाया गया है।
  3. उपयोगकर्ताओं का डेटा भारत में संग्रहीत किया जाता है और उपयोगकर्ता का डेटा उपयोगकर्ता की सहमति के बिना किसी तृतीय पक्ष के साथ कभी साझा नहीं किया जाएगा। इसमें कई तरह के फीचर्स दिए गए हैं, जिससे मैसेजेस, वीडियो को सुरक्षित रख सकते हैं। अभिषेक ने कहा कि इस एप को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य भारत को एप के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया पर जोर दे रहे हैं। इसी के तहत विदेशी एप पर से निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से इस एप का निर्माण किया है।

(Dainik Jagran, 8 October 2020) News Link

  1. चाय की दुकान छोड़ शुरू की एलोवेरा की खेती, अब 47 तरह के उत्पाद बनाते हैं राजस्थान के अजय

Key points:

  1. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला के परलीका गाँव में रहने वाले 31 वर्षीय अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती कर रहे हैं। खेती करने के साथ -साथ अजय इसकी प्रोसेसिंग भी करते हैं और खुद अपने उत्पाद तैयार करके बाज़ार में बेचते हैं। उनके उत्पाद ‘नैचुरल हेल्थ केयर’ के नाम से लगभग 20 अलग-अलग कंपनियों को जा रहे हैं।
  2. अपनी खेती और प्रोसेसिंग के काम से आज लाखों में कमाने वाले अजय ने कभी अपनी शुरूआत मात्र 10 रुपये दिन की कमाई से की थी। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और विरासत में मिला जीवन का संघर्ष और केवल दो बीघा ज़मीन।
  3. उन्होंने सामान्य पानी की बोतल में एलोवेरा का जूस भरकर बेचना शुरू किया। एक से दो, दो से चार, चार से दस बोतलें तैयार हुईं और ऐसे करते-करते उनका यह प्रोसेसिंग का काम जम गया। उनके उत्पादों को एक-दो कंपनियाँ खरीदने भी लगीं। इसके बाद, उन्होंने अपनी चाय की दुकान बंद करके सिर्फ खेती और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया। अपनी खेती के सिलसिले में कृषि विज्ञान केंद्र भी जाने लगे। यहाँ से भी उन्हें और अलग-अलग उत्पाद जैसे साबुन, क्रीम बनाने के बारे में जानकारी मिली।
  4. एक-एक कदम पर अजय ने दिन-रात मेहनत की। थोड़ी-थोड़ी बचत करके अपनी ज़मीन बढ़ाई और प्रोसेसिंग यूनिट का सेट-अप किया। आज उनके पास लगभग 27 बीघा अपनी ज़मीन है और उनकी प्रोसेसिंग यूनिट से 45 से ज्यादा उत्पाद बन रहे हैं। सफल होने के बावजूद अजय ने अपने उत्पादों में नवाचार करना नहीं छोड़ा। वह बताते हैं कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान भी नए उत्पाद बनाने पर काम किया।
  5. अजय कहते हैं कि पारंपरिक फसलों के साथ किसान छोटे स्तर से इस तरह की अलग औषधीय फसल लगाने की शुरूआत कर सकते हैं। फसल उगाने के साथ-साथ अगर किसान अपने खुद के उत्पाद भी बना लें तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं।”

(The Better India, 8 October 2020) News Link

  • कोविड ने छीनी एयरलाइन की नौकरी, पर नहीं मानी हार, घर से शुरू किया फूड डिलीवरी बिज़नेस

Key points:

  1. अपनी कुछ सेविंग और पिता से कर्ज से लेकर राहुल ने एक रसोई घर बनाया। राहुल अपने बंगले के ग्राउंड फ्लोर में रहते हैं, जबकि उनके छत पर दो कमरे बने हुए हैं। इसके एक कमरे में घर के जरूरी सामान रखे गए हैं और दूसरे का इस्तेमाल भंडारण के लिए किया जाता है। राहुल ने यहीं से अपने कारोबार को शुरूआत की।
  2. राहुल ने अपने फूड डिलीवरी सर्विस का नाम ‘शेफ सिटी’ रखा और अगस्त के पहले सप्ताह से सेवाएं शुरू कर दी।.
  3. विमान कंपनियों में काम के दौरान अपने अत्यधिक व्यस्त जीवनचर्या के मुकाबले, इन दिनों राहुल की जिंदगी बिल्कुल अलग है।इस विषय में राहुल बताते हैं, “मैं सुबह 6 बजे उठता हूँ, फिर दौड़ने या साइकिल चलाने जाता हूँ। इसके बाद, किसी दिन सब्जियाँ या अन्य सामग्रियों को खरीदने की जरूरत होती है। फिर 10 बजे तक, मैं खाने को बनाने के लिए सब्जियाँ उबालने, ग्रेवी बनाने आदि का काम पूरा करता हूँ।”राहुल बताते हैं कि उनके पास एक हेल्पर है, जिसे व्यंजनों के बारे में अच्छी जानकारी है और दोनों मिलकर खाना बनाते हैं।
  4. वह बताते हैं, “कभी -कभी तो एक दिन में 20 ऑर्डर तक आ जाते हैं। इनमें से कुछ बैचलर या पेशेवर हमारे नियमित ग्राहक हैं। हमें स्वाद की जरूरतों के अनुसार मशालेदार, वैराईटी के ऑर्डर मिलते हैं।”

(The Better India, 8 October 2020) News Link

  • चेन्नई की निशा रामासामी बच्चों के लिए लकड़ी से बना रही हैं डेवलपमेंटल खिलौने, पांच साल पहले अपनी तीन महीने की बेटी की खातिर शुरू किया था ये काम

Key points:

  1. उनके बनाए प्रोडक्ट अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं
  2. फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है
  3. तब निशा ने नीम की लकड़ी से शिशु के लिए टीथर और रेटल्स बनाना शुरू किया। निशा के अधिकांश मिलने-जुलने वाले लोग भी पैरेंट्स हैं। उन्हें निशा का ये क्रिएशन बहुत पसंद आया। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी निशा को इसी तरह के खिलौने बनाने के ऑर्डर दिए। यहीं से निशा के फाउंडेशन ‘अरिरो वुडन टॉयज’ की शुरुआत हुई। निशा ने पति वसंत के साथ मिलकर 2018 में इसे शुरू किया।
  4. वहां से लौटने के बाद निशा ने लोकल कारीगरों को खिलौने बनाने से जुड़ी कई बारीकियों को सीखाया। अपने स्टार्ट अप के जरिये निशा नौनिहालों के लिए पजल्स, रेटल्स, टीथर्स, स्लाइडर्स, स्टेप स्टूल और इंडोर जिम एसेसरीज डिजाइन करती हैं। उनके बनाए प्रोडक्ट्स अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link

  • यूट्यूब से आया आइडिया तो पड़ोसियों से उधार लेकर, घर में एक कमरे से शुरू किया मसाला पैकिंग का काम, हर महीने 45 हजार कमाई

Key points:

  1. जयपुर के अमित कुमार ने जब धंधा शुरू करने का सोचा तब जेब में महज दस हजार रुपए थे, कहते हैं, जिनसे पैसे लिए थे, उनके पैसे वापस कर दिए और अब मेरे पास की खुद की मशीनें हैं
  2. अमित के माता-पिता और बेटा भी उनके साथ में काम में हाथ जुटाते हैं, पत्नी घर का कामकाज करती हैं, मां ब्लिस्टर में मटेरियल भरतीं हैं, अमित मशीन में उसे पैक करते हैं, बेटा पैकेट एक जगह पर रखता है

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link