Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 29th 2020

  1. Trying to Save Apple Orchard, Uttarakhand Man Grows World’s Tallest Coriander Plant

Key points:

  1. How many times have you carefully looked at the green shade of coriander or felt its texture? Because it is such a universal ingredient in food dishes and readily available, this versatile herb cum spice is undervalued.
  2. Gopal Dutt Upreti, an organic farmer from Uttarakhand’s Bilkesh village (Ranikhet), also never paid any attention to his coriander plants until they entered the Guinness Book of World Records on 21 April this year.
  3. The 47-year-old’s coriander plant received the title of ‘world’s tallest coriander plant’ with a height of 7.1 feet (2.16 metres) using traditional ‘Himalayan farming techniques’.
  4. In an interesting twist, Gopal revealed to me that his record-breaking coriander was there only to save his apple orchards from pest attacks and insects. He never intended to popularise his coriander variety, let alone make a world record.
  5. “Coriander is easy to grow and gives flowers that attract butterflies and bees. At the same time, it acts as an insect repellent for flies, mosquitoes and fruit flies. Seeing the benefits, I planted coriander in 2015, and the rest is history,” Gopal tells  

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • Naga Scientist’s Exotic Mushrooms Help Over 500 Farmers Raise Their Incomes

Key points:

  • Shiitake mushroom—an edible, profitable and nutritious mushroom mostly grown in East Asia—has found a new home in the northeastern state of Nagaland. The pioneer behind this development is 37-year-old Dr Sosang Longkumer, a microbiologist, who established a small mushroom spawn production laboratory in Dimapur back in early 2018.
  • Following months of research and experimentation, Dr Longkumer saw the first fruit spawn in October 2019. Delighted with the results, he posted a picture on his Instagram account with a caption stating: “So elated to see the exotic shiitake mushrooms in full bloom in Nagaland. Hoping this brings a new chapter of shiitake mushroom farming in Nagaland.”
  • Exactly a year since then, Dr Longkumar, the son of a village pastor, has trained approximately 500 farmers in Shiitake and Oyster mushroom cultivation through his start-up, Konger Agritech. Moreover, the Dimapur-based startup has gone on to generate approximately 20,00,000 Shiitake dowel spawns, and 25,000 kg of Oyster mushroom spawns as well.However, his interest in cultivating mushrooms began as a challenge.
  • “My interest in mushrooms began when Dr Rajesh, a senior scientist and my former colleague at Indian Council of Agricultural Research (ICAR) unit in Nagaland, challenged me to grow mushroom cultures and make spawns inside the laboratory. This was sometime in 2010, and I was working as a research associate. Backed with my knowledge of microbiology and applied genetics, I completed the challenge. Dr Rajesh was impressed by the quality of my mushroom spawns and advised me to set up a spawn production lab to help farmers grow mushrooms all through the year. Mushroom farming is a profitable venture with low investment and early returns. It can be a full-time or an alternative source of income. Subsequently, I attended an entrepreneurship programme by Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) in 2011,” says Dr Longkumer, speaking         

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • 100 किसानों के उत्पाद लेकर 12 किस्म के चिप्स बनाए, विदेश तक पहुँचाया भारत का स्वाद

Key points:

  1. कर्नाटक के श्रृंगेरी में रहने वाले भारद्वाज कारंत हमेशा से ही अपने इलाके के लिए कुछ करना चाहते थे। उन्होंने देखा था कि कैसे लोग अच्छे जीवन की तलाश में बड़े-बड़े शहरों में जाकर बस रहे हैं। खुद किसान परिवार से होने के चलते उन्होंने बहुत करीब से किसानों की परेशानी को समझा। दरअसल वह किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने प्रोसेसिंग क्षेत्र को चुना।
  2. 28 वर्षीय भारद्वाज ने कंप्यूटर साइंस में एमएससी की है। इसके बाद पीएचडी करने लिए वह कोयम्बटूर गए थे। पीएचडी के लिए उनका टॉपिक डिजिटल प्रोसेसिंग था जिसमें आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस भी शामिल है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक कॉलेज भी ज्वाइन कर लिया और बतौर लेक्चरर काम करने लगे। साथ ही, वह यह भी सोचने लगे की कैसे वह अपने इलाके के लोगों के लिए काम कर सकते हैं।
  3. भारद्वाज ने द बेटर इंडिया को बताया, “अगर आप श्रृंगेरी की जनसंख्या को देखेंगे तो पता चलेगा कि 80 प्रतिशत लोग किसानी करते हैं। लेकिन किसानों के लिए अपनी फसल को बाज़ारों तक पहुँचाना बहुत मुश्किल है। उन्हें इसके लिए चिक्कामग्लुरु या फिर शिवमोगा जाना पड़ता है जो लगभग 100 किमी दूर है।”
  4. उन्होंने देखा कि ट्रांसपोर्टेशन के चक्कर में उनकी ताज़ा फसल बहुत बार खराब हो जाती है। इन परेशानियों को देखते हुए ही उन्हें महसूस हुआ कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे इलाके में रोज़गार उत्पन्न हों।
  5. भारद्वाज ने 2014-17 के बीच फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के एक्सपर्ट्स के साथ समय बिताया और नई-नई जानकारी हासिल की। उन्होंने मैसूर के सेंट्रल फ़ूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर रिसर्च का भी दौरा किया। इन दौरों ने उन्हें फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीकों को समझने में मदद की। उन्होंने अलग-अलग तकनीकों को देखा लेकिन ये सभी तकनीक प्राकृतिक नहीं थी। किसी में चीनी का ज्यादा इस्तेमाल था तो कहीं तेल का।
  6. “आखिरकार मुझे इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देश में इस्तेमाल होने वाले प्रोसेसिंग सिस्टम के बारे में पता चला। दरअसल वहाँ सब्जियां और फल ड्राई फॉर्म में खाए जाते हैं और वह भी बिना किसी एडिटिव के। मैंने उनकी तकनीक के बारे में जाना,” उन्होंने आगे कहा।

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • गाँवों से पलायन रोकने के लिए नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, 5 करोड़ से अधिक है आय

Key points:

  1. उत्तराखंड में पलायन एक बड़ी समस्या है। राज्य के ग्रामीण इलाके से हर साल बड़ी संख्या में लोगबाग शहर की ओर चले जाते हैं। ग्रामीण इलाके में रोजगार के अभाव की वजह से पलायन हो रहा है। आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसने पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और देहरादून लौटकर खुद मशरूम की खेती शुरू कर दी।
  2. यह कहानी दिव्या रावत की है। वह अपने राज्य के लोगों के लिए कुछ करना चाहती थीं। यह बात तब की है, जब दिव्या नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही थीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें एक प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था में नौकरी भी मिली, जहाँ वह मानवाधिकार के मसले पर काम करती थीं। जब उन्होंने देखा कि उनके राज्य के लोग पलायन करने को मजबूर हैं और बड़े शहरों में आकर भी वह दयनीय जीवन जी रहे हैं, तभी उन्होंने इस दिशा में कुछ पहल करने का विचार आया और इसी दरम्यान साल 2013 में उत्तराखंड में भीषण बाढ़ आई थी।
  3. इस प्रलंयकारी बाढ़ से आहत, दिव्या ने तुरंत अपनी नौकरी छोड़ी और एक संकल्प के साथ देहरादून लौट आई। इसके बाद, उन्होंने राज्य के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की पहल शुरू कर दी और इसके लिए उन्होंने मशरूम की खेती और उसके प्रोसेसिंग को अपना लक्ष्य बनाया।
  4. उत्तराखंड में मशरूम की खेती के क्षेत्र में 30 वर्षीय दिव्या जाना माना नाम है। वह ‘मशरूम गर्ल’ के नाम से जानी जातीं हैं। उत्तराखंड सरकार ने उन्हें मशरूम का ब्रांड एम्बेसडर भी घोषित किया है। दिव्या के इस पहल से आज उन्हें न सिर्फ हर साल 5 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई हो रही है, बल्कि उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों के 7000 से अधिक किसानों को लाभ भी हो रहा है।

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • DIY वाटर फिल्टर बनाकर पीते हैं वर्षा जल, 6 साल में कभी नहीं खरीदा पानी

Key points:

  1. बेंगलुरू में रहने वाले 66 वर्षीय संपत एस एक रिटायर्ड बैंकर हैं। छह साल पहले, जब वह जक्कुर में अपना घर बना रहे थे, तो उन्होंने 40 हजार लीटर के एक भूमिगत पानी की टंकी बनाने का फैसला किया। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह टंकी बारिश के पानी से भरा हुआ है। इस पानी को वह फिल्टर कर इस्तेमाल करते हैं।
  2. संपत ने द बेटर इंडिया को बताया, “इससे पहले, मैं आरटी नगर में रह रहा था, जहाँ कावेरी जल आपूर्ति की वजह से मेरी सभी जरूरतें पूरी हो जाती थी। लेकिन, जक्कुर में, ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। ऐसी स्थिति में, बोरवेल की खुदाई करने या टैंकर से पानी खरीदने की जरूरत थी। लेकिन, हर दिन पानी खरीदना महंगा था और बोरिंग का पानी इस्तेमाल करने के लायक नहीं था, क्योंकि यहाँ भूमिगत जलस्तर 600 फीट से अधिक नीचे गिर गया है। इसलिए मैंने, घर में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बारिश के पानी को संरक्षित करने का फैसला किया। लेकिन, इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए मैंने इसे खुद से बनाने का फैसला किया।”
  3. शुरूआत में, उन्होंने पानी को फिल्टर करने के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फिल्टरों को लगाया, जिसमें सेल्फ-क्लिनिंग गुण मौजूद थे। लेकिन, ये फिल्टर न सिर्फ महंगे थे, बल्कि इस प्रक्रिया में बहुत अधिक पानी बर्बाद होता था और संपत, इससे बिलकुल संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद, उन्होंने सूती या नायलॉन के कपड़े से DIY फिल्टर तकनीक को अपनाया।

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  1. 23-YO Woman from Asia’s Largest Onion Market is Using IoT to Help Cut Onion Wastage

Key points:

  1. India is the second-largest producer of onions in the world. In 2019-2020 the country exported 11,49,896 MT of fresh onions to the rest of the world. And 28.32% of it was cultivated in Maharashtra.
  2. Though India produces large quantities of the crop, the price is always fluctuating, sometimes by 800%. For farmers growing this crop, it is either a jackpot or a complete loss.
  3. According to news reports, since the last week of August, the prices have been on a steady rise owing to heavy rainfall in some states, and poor storage facilities in others.
  4. Kalyani Shinde, a 23-year-old engineering graduate, who was born and raised in Lasalgaon, home to Asia’s largest onion market, is trying to change that with her startup. Godaam offers technology-based solutions to prevent onion wastage at the warehouse level.
  5. “With Godaam, we aim to convert traditional warehouses into smart warehouses by installing sensors that can track micro climatic changes and help farmers identify any stock spoilage at an early stage,” says Kalyani.

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • Innovations in BHARAT
  1. 23-YO Woman from Asia’s Largest Onion Market is Using IoT to Help Cut Onion Wastage

Key points:

  • India is the second-largest producer of onions in the world. In 2019-2020 the country exported 11,49,896 MT of fresh onions to the rest of the world. And 28.32% of it was cultivated in Maharashtra.
  • Though India produces large quantities of the crop, the price is always fluctuating, sometimes by 800%. For farmers growing this crop, it is either a jackpot or a complete loss.
  • According to news reports, since the last week of August, the prices have been on a steady rise owing to heavy rainfall in some states, and poor storage facilities in others.
  • Kalyani Shinde, a 23-year-old engineering graduate, who was born and raised in Lasalgaon, home to Asia’s largest onion market, is trying to change that with her startup. Godaam offers technology-based solutions to prevent onion wastage at the warehouse level.
  • “With Godaam, we aim to convert traditional warehouses into smart warehouses by installing sensors that can track micro climatic changes and help farmers identify any stock spoilage at an early stage,” says Kalyani.

(The Better India, 29 October 2020) News Link

  • Investment in Bharat by other countries
  1. [Funding Alert] Teachmint raises $3.5M from Lightspeed India, existing investors

Key points:

  1. Teachmint, the live online tutoring platform, has raised $3.5 million from Lightspeed India, along with existing investors Better Capital and Titan Capital.
  2. Teachmint, the live online teaching platform, has raised $3.5 million seed funding led by Lightspeed India. Existing investors Better Capital and Titan Capital also participated in this funding round. Teachmint had raised its first round of funding in August 2020.

(Your Story, 29 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
  1. How Delhi-based hardware startup Flipr aims to Make in India, for the World

Key points:

  1. Founded by two 24-year-old engineers, Delhi-based hardware startup Flipr is focusing on Make in India. Amidst the coronavirus, it has developed a contactless sanitiser-cum-body temperature monitor that can be deployed in offices, buildings, and public areas.
  2. Realising that the time was right to build products out of India – given the dependence on imports for even basic prevention products like thermometers and sanitiser machines – the company decided to build its own product FLIPR (Faucet Labs Integrated Pandemic Response) to help India fight COVID-19.
  3. The five-member team began by launching FLIPR 1.0, an automatic sanitiser dispenser with a one-litre capacity. While installing it at a banquet hall, the duo saw a watchman at the entrance scanning body temperature using a temperature gun and instructing people to sanitise their hands with the machine.
  4. And thus, FLIPR 2.0, which combines both requirements, was born. “It works completely ‘touchlessly’, indoors and outdoors, and has a one-litre capacity,” Rohan says.

(Your Story, 29 October 2020) News Link

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