Rising Bharat Swadeshi News Feed: September 2nd 2020

  • Life for society
  1. क्लास में जानवर, टूटे दरवाजे, ऐसा था यह सरकारी स्कूल, 4 महीने में एक टीचर ने की काया पलट

Key points:

  1. सूरजपुर जिले के शासकीय प्राथमिक शाला झारपारा (पंपापुर) में अव्यवस्था का यह आलम था इस गाँव के हर शख्स को लगता था कि यहाँ पढ़ाई नहीं हो सकती है. लेकिन यहाँ के शिक्षक गौतम शर्मा के लगातार प्रयासों के चलते आज स्थितियाँ बदलने लगी हैं।
  2. गौतम ने स्कूल में एक समर कैम्प का आयोजन भी करवाया जिसमें बच्चो को ताइक्वांडो,  हैंड राइटिंग सुधार, बैडमिंटन, स्पीकिंग स्किल्स आदि पर जोर दिया गया। शाला समिति अध्यक्ष  विनोद साहू कहते हैं, “गौतम शर्मा ने बहुत ही कम समय में ही स्कूल का कायाकल्प ही कर दिया। उनके द्वारा किये गए कार्यो की जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है। इस तरह लोगों मे सरकारी स्कूल के प्रति विश्वास का संचार हुआ।“

(The Better India, 2 September, 2020) NewsLink

  1. After losing their son to drug abuse, this couple from Punjab is fighting against the social evil

Key points:

  • Mukhtiar and Bhupinder Singh’s son passed away due to drug addiction in 2016. From then on, the couple has been going door-to-door to spread awareness about the deadly habit among the community.

(Your Story, 2 September, 2020) NewsLink

  1. कभी 316 रुपये में बेचते थे 1 क्विंटल गन्ना, अब उसी का सिरका बनाकर कमा रहे हैं 1000 रुपये

Key points:

  1. पृथ्वी पाल ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बात की। उन्होंने पूछा कि वह गन्ने में क्या वैल्यू एडिशन कर सकते हैं? उन्हें गन्ने का सिरका बनाने की सलाह मिली। पृथ्वी पाल ने गन्ने का सिरका बनाने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस बारे में उन्होंने एक बार फिर वैज्ञानिकों से बात की। उन्हें पता चला कि इसका मुख्य कारण है खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायन। रसायनों की वजह से गन्ने की गुणवत्ता खत्म होने लगती है। इसलिए अगर किसान अच्छे तरीके का सिरका बनाना चाहते हैं तो उन्हें जैविक तरीकों से गन्ना उगना होगा।
  2. पृथ्वी पाल को कई बार असफलता के बाद आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपनी खुद की तकनीक विकसित की और पहले जो गन्ने का सिरका 6 महीने में बनता था, उसे वह एक महीना और 45 दिन में गन्ने का सिरका बना रहे हैं। इस तकनीक के लिए उन्होंने साल 2017 में पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से एमओयु किया ताकि इस तकनीक पर उनका ही अधिकार रहे। तकनीक बनने के बाद अब वह गन्ने, करेला, जामुन आदि का सिरका बना रहे हैं।
  3. उनके मुताबिक, एक क्विंटल गन्ने का वह 50 लीटर सिरका बनाते हैं और एक लीटर सिरका बनाने में उनकी लागत 50-60 रुपये की आती है। 2 एकड़ ज़मीन से उन्हें 1000-1200 क्विंटल गन्ना मिल जाता है। पृथ्वी कहते हैं कि पहले जब वह अपने गन्ने को चीनी मिल या फिर मंडी में बेचते थे तो उन्हें एक क्विंटल गन्ना की कीमत 316 रुपये मिलती थी।

(The Better India, 2 September 2020) News Link

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