Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 6th 2020

  1. As part of diplomatic efforts to help Myanmar contain COVID-19, India handed over 3,000 vials of the anti-viral drug

Key points:

  1. As part of diplomatic efforts to help Myanmar contain COVID-19, India handed over 3,000 vials of the anti-viral drug Remdesivir to Aung San Suu Kyi. Shringla conveyed “India’s willingness to prioritize Myanmar in sharing vaccines as and when these become available”. Myanmar has reported over 18,000 cases of the viral infection and 444 deaths due to the disease.

(The Wire, 6 October 2020) News Link

  • Investment in Bharat by US companies
    • [Funding alert] Fintech startup Uni raises $18.5M from Lightspeed India Partners and Accel India

Key points:

  1. Fintech startup Uni has raised $18.5 million in one of the largest seed rounds. The funding was led by Lightspeed India Partners and Accel India.
  2. The business model of Uni is new-age credit cards for the digital generation. The purpose of the fund raise is to build a team and once the product is launched, it will be used for marketing and working capital.
  3. The startup claims that there are just 34 million credit card users having 58 million credit cards whereas there are more than 100 million Indians today who pay digitally and electronically. Focused on filling this gap, Uni will aim to target the ecommerce and internet-savvy generation in India who are looking at leading aspirational lifestyles.

(Your Story, 6 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • मुंबई की देवांशी शाह ने अपने प्यारे डॉगीहेजलको खोने के बाद कीपेट कनेक्टकी शुरुआत, यहां डॉग्स के लिए जरूरी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं

Key points:

  1. देवांशी का पूरा दिन हेजल के साथ बितता। हेजल के साथ देवांशी की कई यादें जुड़ी हुई हैं
  2. अपने इस सूनेपन से उबरने के लिए उसने एक ऑनलाइन कम्युनिटी की शुरुआत की जिसे ‘पेट कनेक्ट’ नाम दिया

(Dainik Bhaskar, 6 October 2020) News Link

  • Startup’s App And Debit Card Teaches Teens The Finance Lessons That Schools Don’t

Key points:

  1. How does it work?: If you are a parent who wishes to help children learn to manage finance, you can download the application on play store or app store. Once it is downloaded, by entering a valid PAN card number you can create an account for yourself and your child. An existing bank account (of the parent) is linked with the application to deposit the pocket money.After paying a registration fee of Rs 499 a card is issued and delivered via post within a few days.On the app, there are different logins for the parent and child so that children can set their own goals and view goals assigned to them. On the parents’ version, there is a view of daily expenditure made by the child, the amount they have saved, and set finance goals for them.
  2. About the finance startup – While research for the finance application started in March 2019, the company was formally launched in August 2019. The application was developed in-house and officially launched in August 2020.Headquartered in Hyderabad, the startup was bootstrapped by the four and it also received a grant from HDFC bank last year.

(The Better India, 6 October 2020) News Link

  • How this Harvard Business School alum wants to solve India’s work-readiness crisis

Key points:

  1. Founded in 2013 by Shveta Raina, Talerang offers customised career training to students and professionals with one aim: creating a work-ready India. It aims to upskill 20 million students by 2020.
  2. The startup began with training only college students but now has programmes for candidates from the age of 13 to 30. It went from training 100 students in the first year to over 100,000 trained through tie-ups with various colleges, universities, corporates and non-profits in about six years.
  3. Talerang’s copyrighted curriculum was researched as an independent project at Harvard Business School. Its training methodology integrates Harvard cases, proprietary assessments, interaction with guest speakers, industry exposure, and personal mentoring for holistic professional development.

(Your Story, 6 October 2020) News Link

  • How this gaming startup wants to change the game with a league for desi sports

Key points:

  1. Mumbai-based online gaming startup OKIE Gaming is working in line with PM Narendra Modi’s appeal to create games inspired by Indian culture. It is launching games such as Dahi Handi and Vallam Kali in a digital format, and readying a Desi Sports League.
  2. Launched by Mumbai-based OKIE Ventures in February 2020, homegrown gaming platform OKIE Gaming aims to tap into the evolving market with indigenous digital games. Founded in 2011, OKIE Ventures’ business portfolio includes manufacturing, gaming, and healthcare.
  3. The startup is in line with India’s aatmanirbhar plans. In August, Prime Minister Narendra Modi had said India should tap the huge potential in the digital gaming arena by developing games that are inspired from its culture and folk tales.
  4. As of now, the company offers RMG options such as Smart Housie, Smart Number Quiz, Ludo, Cricket, Rummy, and Smart Words, and aims to offer more games every month. The app with all these games is available to download directly from OKIE’s website as Google does not allow real money games to be on play store.

(Your Story, 6 October 2020) News Link

  1. लाखों की नौकरी छोड़ दो साल पहले शुरू किया ‘NRI चायवाला‘, मम्मी के हाथ से लेकर प्यारमोहब्बत वाली बेचते हैं चाय, सालाना 1.8 करोड़ रु कमा रहे

Key points:

  1. उन्होंने अब तक अब तक 45 प्रकार की चाय बनाई है, इन सभी वैराइटी में कुछ खास मसाले भी डाले जाते हैं, जो उनकी सीक्रेट रेसिपी हैं, वह इसे किसी से शेयर नहीं करते हैं
  2. प्यार-मोहब्बत वाली चाय में आधा दूध, आधा पानी, इलायची फ्लेवर, रोज पैडल मिलाकर चाय सर्व की जाती है, ये लड़के-लड़कियों को दी जाती है, इसे बेहद पसंद किया जा रहा है
  3. जगदीश कहते हैं, “मैंने लोगों को 10-12 तरह की चाय पेश की। इसमें मसाला चाय, तंदूरी चाय, मिंट चाय, चॉकलेट चाय, मम्मी के हाथ वाली चाय, मर्दों वाली चाय, प्यार-मोहब्बत वाली चाय, उधार वाली चाय आदि।” वह बताते हैं, ‘चाय पीने से पहले ऑफिस के लोग हंसते थे, इसके बाद चाय के बारे में पूछते थे।’ ये NRI चायवाला के ये कुछ अनूठे फ्लेवर हैं, जो लोगों में दिलचस्पी जगाते हैं। चाय की इन सभी वैराइटी में कुछ खास मसाले भी डाले जाते हैं, जो उनकी सीक्रेट रेसिपी हैं। वह इसे किसी से शेयर नहीं करते हैं।
  4. जगदीश कुमार अब अपने ब्रांड को दिल्ली एनसीआर से बेंगलुरु, पुणे, चंडीगढ़ और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में 2021 के अंत तक 10-15 आउटलेट खोलना चाहते हैं। इसके बाद उनकी योजना लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में पहुंचने की है। जहां पर वह मानते हैं कि आधुनिक और पारंपरिक बाजार दोनों हैं और हमारे पास उन्हें देने के लिए एक अनूठा उत्पाद है। (Dainik Bhaskar, 6 October 2020) News Link
  • कई फसलों की खेती करने के अलावा अभिषेक ने 2 वर्ष पहले टीतार ग्रीन टी को भी बनाना शुरू किया। इसे वह तुलसी, लेमनग्रास, मोरिंगा आदि जैसे औषधीय पौधों की पत्तियों से बनाते हैं।

Key points:

  1. इसी को देखते हुए बिहार के औरंगाबाद जिले के बरौली गाँव के रहने वाले अभिषेक ने साल 2011 में एक मैनेजमेंट प्रोफेशनल की नौकरी को छोड़कर, अपने गाँव में खेती करने का फैसला किया। तब उनकी सैलरी 11 लाख रुपए प्रति वर्ष थी।फिलहाल, वह अपने 20 एकड़ पैतृक जमीन पर धान, गेहूँ जैसे परम्परागत फसलों के अलावा, तुलसी, लेमनग्रास, रजनीगंधा, गिलोय, जरबेरा, मोरिंगा, गेंदा फूल जैसे कई सुगंधित और औषधीय पौधों की प्राकृतिक रूप से खेती करते हैं, जिससे उन्हें हर साल 20 लाख रुपए से अधिक कमाई होती है।
  2. अभिषेक को खेती कार्यों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए 2014 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से सर्वश्रेष्ठ किसान का अवार्ड मिला था। इसके अलावा 2016 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया था।

(The Better India, 6 October 2020) News Link

  • ज़ोमाटो डिलीवरी बॉय ने बना दी इलेक्ट्रिकसोलर साइकिल, इसी से करते थे इकोफ्रेंडली डिलीवरी

Key points:

  1. 19 वर्षीय इंद्रजीत ग्रेजुएशन के छात्र हैं लेकिन इसके साथ ही, उनकी एक और पहचान है और वह है एक आविष्कारक-उद्यमी की। बचपन से ही मशीनों को समझने और बनाने के शौक़ीन रहे इंद्रजीत ने अब तक कई ऐसे आविष्कार किए हैं जो जनसाधारण के लिए मददगार हैं। पहले तो उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों की पैदल आने-जाने की समस्या को समझते हुए सोलर साइकिल बनाई और फिर गाँव में चिरौंजी के किसानों की मदद के लिए पोर्टेबल चिरोंजी डेकोर्टिकेटर मशीन भी बनाई है।
  2. पुरानी साइकिल और सेकंड हैंड चीज़ें इस्तेमाल कर बनी उनकी सोलर साइकिल में उस समय लगभग तीन हज़ार रूपये की लागत आयी थी। उन्होंने साइकिल को इस तरह मॉडिफाइड किया कि यह सोलर और इलेक्ट्रिक दोनों तरीके से चल सके। सोलर पैनल के साथ यह साइकिल 30 किमी प्रतिघंटा के हिसाब से चलती है और बतौर इलेक्ट्रिक, एक चार्जिंग में यह साइकिल (Solar cum Electric Bicycle ) लगभग 60 किमी तक चल सकती है।
  3. इंस्पायर अवॉर्ड जीतने के बाद उन्हें जापान के Sakura Exchange Program in Science में भी जाने का मौका मिला। हालाँकि, इतने सम्मान मिलने के बाद भी उन्हें कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पाई। न ही उनके इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए और न ही उनकी पढ़ाई के लिए।
  4. इंद्रजीत का दूसरा इनोवेशन, चिरौंजी उगाने वाले किसानों के लिए है। वह बताते हैं कि किसानों को चिरौंजी का फल हाथों से निकालना पड़ता है क्योंकि इसके लिए जो भी मशीन है, वह काफी महंगी है। कोई भी ऐसी मशीन है नहीं जो कम लागत वाली और छोटे किसानों के लिए हो। किसानों को इस प्रक्रिया में काफी वक़्त लगता है और न ही उन्हें अच्छे फल मिल पाते हैं। इसलिए उन्होंने यह मशीन बनाई ताकि किसानों की मदद हो सके।
  5. हाल ही में उन्होंने गुजरात के अपने एक दोस्त के साथ मिलकर मल्टी-पर्पज ड्रोन बनाया है जिससे किसी भी जगह को सैनीटाइज किया जा सकता है और कहीं भी दवा पहुँचाई जा सकती है। वह कहते हैं कि उन्हें बस ऐसे नवाचार करने हैं जो आम से आम लोगों के काम आएं। उनके पास हुनर है, बस थोड़ी आर्थिक मदद जुटानी है, जिस पर वह काम कर रहे हैं। (The Better India, 6 October 2020) News Link
  • Dehradun Ecologist’s Home Hasn’t Got an Electricity or Water Bill in 3 Years

Key points:

  1. With practices like waste management, driving an electric car, growing organic food in her front yard and harnessing rainwater and sun, Soumya and her family in Dehradun have switched to a sustainable lifestyle that is not only a relief to her pocket but also the environment.
  2. Instead of constructing a new house or shifting into a flat, Soumya and her husband, Dr Raman Kumar decided to restore a 60-year-old house. In the process, they vowed to not send construction waste to the dump yard. All the debris was reused to lay the foundation of other buildings.
  3. The underground rainwater harvesting tank in the home can store up to 20,000 litres of rainwater – that suffices the needs of 6-7 people. The captured rainwater is filtered and then used for potable and non-potable needs. The family has stopped taking water from the administration completely. The surplus water recharges groundwater tables.

(The Better India, 6 October 2020) News Link

  1. मार्च तक लॉन् हो सकती है कोरोना वैक्सीन, तीन में से दो टीके हो जाएंगे तैयार!

Key points:

  1. केंद्र सरकार ने उम्‍मीद जताई है कि अगले साल मार्च तक कोरोना वायरस के दो टीके उपलब्‍ध हो जाएंगे। फिलहाल तीन वैक्‍सीन का देश में ट्रायल हो रहा है।
  2. सरकार को लगता है कि मार्च तक तक फेज-3 ट्रायल पूरा हो जाएगा और वैक्‍सीन को एक्‍सपर्ट्स से क्लियरेंस भी मिल जाएगा। पिछले हफ्ते तीन बड़े वैक्‍सीन निर्माताओं- सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक और जायडस कैडिला के साथ सरकार ने बैठक की है। उनसे वैक्‍सीन की उपलब्‍धता से लेकर उसके रेगुलेटरी अप्रूवल, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की चुनौतियों पर चर्चा हुई। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा है कि सरकार जुलाई 2021 तक 40-50 करोड़ डोज हासिल करने की योजना बना रही है।

(Navbharat Times, 6 October 2020) News Link

  • कोरोना वैक्सीन बनाने की होड़ में रिलायंस भी कूदी, जानिए कब शुरू होगा ट्रायल

Key points:

  1. रिलायंस लाइफ साइंसेज (Reliance Life Sciences) कोरोना की वैक्सीन विकसित कर रही है। माना जा रहा है कि अगले साल पहली तिमाही में इसका इंसानों पर ट्रायल शुरू हो सकता है। 6 भारतीय कंपनियां पहले से ही कोरोना की वैक्सीन बनाने के काम में जुटी हैं।
  2. रिलायंस ग्रुप इसके लिए अपने फार्मास्यूटिकल्स, रीटेल और टेक बिजनस का फायदा उठाना चाहता है। इसके लिए कंपनी ने व्यापक योजना बनाई है। इसमें टेस्ट किट डेवलप करने से लेकर, टेस्टिंग लैब चलाना, वैक्सीन विकसित करना, बनाना और वितरण करना भी शामिल है। रिलायंस कोविड-19 के लिए जो वैक्सीन विकसित कर रही है, वह रिकंबिनेंट प्रोटीन बेस्ड वैक्सीन है। माना जा रहा है कि अगले साल पहली तिमाही में इसका इंसानों पर ट्रायल शुरू हो सकता है।
  3. इस बारे में रिलायंस लाइफ साइंसेज के प्रेजिडेंट और सीईओ केवी सुब्रमण्यम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि छोटे जानवरों पर प्री-क्लीनिकल ट्रायल इन हाउस होगा। इसमें पार्टनर रिसर्च ऑर्गनाइजेशन भी शामिल होंगे। इंसानी ट्रायल कंपनी के इन हाउस रिसर्च सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन करेगी।

(Navbharat Times, 6 October 2020) News Link

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