Tag Archives: Swadeshi

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 28th 2020

  • Startup in Bharat by Bhartiya
  1. Home Chefs Are Earning upto a Lakh a Month, Thanks to This Noida Startup

Key points:

  1. After Monika Chhatwal’s husband passed away earlier this year, the financial burden of running the home entirely fell on her. With two children in the house, she had to find a stable livelihood.
  2. So, she gave up her dream of opening a restaurant. But she still wanted to cook. So she looked for opportunities to sell food from her own kitchen in Noida.
  3. But how could one start collecting orders other than through social media? Like so many of us, Monika could not build an app, or spend all her time marketing herself. She could cook for sure. But needed a place to sell – digitally.
  4. Monika found her opportunity via ‘Homefoodi’ in February. Homefoodi is an app where customers can directly order from home chefs. And thus Monika began her entrepreneurial journey with ‘Monika Kitchen’.
  5. She started with a few orders, and the response has been overwhelming. “Dahi Bhalla, Pav Bhaaji and Biryanis are our popular food items. It is very encouraging to see 362 reviews and 685 likes for our ‘Kitchen’ on the app. We deliver to social gatherings and corporate functions as well, which makes our monthly earnings touch almost a lakh,” says Harshita, Monika’s daughter.

(Your Story, 28 October 2020) News Link

  • [RAISE 2020] This AI-powered startup offers accurate, contextual translations in 22 Indian languages

Key points:

  1. Delhi-based AI startup Devnagri is a human translation platform that combines neural machine translation and machine learning with human intervention to provide efficient and accurate services. It has more than 5,000 translators who work in 22 Indian languages.
  2. Inspired by the versatility and diversity of the script and the many Indian languages that use it, Himanshu Sharma and Nakul Kundra founded AI-powered startup Devnagri
  3. The founder claims that Devnagri is at least 10 times more efficient and accurate than other translation platforms, due to the human intervention in the translation processes. The bootstrapped startup was awarded the Best Emerging Portal For Translation & Localisation Services 2019 – INDIA by Business Mint in 2019. In 2020, Devnagri was selected in the Special Category at RAISE 2020, India’s biggest AI Solution Challenge for Indian startups, in the Natural Language Processing (NLP) category.
  4. All data is fed into the platform, which provides a rough translation of the content. The platform uses an end-to-end open-source machine learning by Google called TensorFlow, used for NLP. Devnagri has built its own proprietary translation engine using TensorFlow.

(Your Story, 28 October 2020) News Link

  1. भारतीय रेलवे: सौर ऊर्जा से बदल रहे हैं तस्वीर, 960 स्टेशन पर लगे सोलर पैनल

Key points:

  1. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क्स में से एक है। भारतीय रेलवे 68 हज़ार किलोमीटर से भी ज्यादा लम्बे ट्रैक्स के जरिए हर साल लगभग 8 बिलियन यात्रियों को सुविधा दे रहा है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा।
  2. हर दिन लाखों की संख्या में यात्रियों को अपने गन्तव्य तक पहुँचाने वाले इस रेलवे नेटवर्क को चलने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। भारतीय रेलवे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िलहाल, रेलवे की वार्षिक ऊर्जा जरूरत 20 अरब यूनिट की है। इस ऊर्जा की आपूर्ति के लिए रेलवे अनवीकरणीय स्रोतों पर निर्भर है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में लगभग 50% रेलवे को बिजली से जोड़ा गया है। आने वाले समय में बाकी रेलवे को भी बिजली से जोड़ा जाएगा।
  3. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव कहते हैं, “आर्थिक विकास और खपत में हुई बढ़ोतरी के चलते साधनों की मांग भी बढ़ी है। लेकिन सस्टेनेबिलिटी के लिए ज़रूरी है कि हम आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण के मुद्दों पर भी ध्यान दें।”
  4. गौरतलब है कि कार्बन उत्सर्जन क्लाइमेट चेंज में अहम भूमिका निभाता है, जिसमें भारत के परिवहन क्षेत्र का लगभग 12% योगदान है। इस 12% में से 4% भाग सिर्फ भारतीय रेलवे का है और इसलिए ही, भारतीय रेलवे खुद को पूर्ण रूप से ग्रीन एनर्जी से चलाना चाहता है। इससे रेलवे पर्यावरण के लिए हानि का कारण नहीं होगी और साथ ही, आत्म-निर्भर बनेगी। (The Better India, 28 October 2020) News Link
  • लॉकडाउन में अपने खेतों पर जाना हुआ मुश्किल तो किसान ने शहर की खाली ज़मीनों को बना दिया खेत

Key points:

  • देश के किसी भी शहर में आप जाएंगे तो आपको ऐसी कोई न कोई जगह जरूर दिख जाएगी, जहाँ कूड़ा-कचरा का अंबार लगा रहता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसे शख्स के बारे में सुना है जो ऐसी जगहों को साफ कर वहाँ सब्जी उगा रहा हो, वह भी जैविक तरीके से? आज द बेटर इंडिया आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी सुनाने जा रहा है।
  • केरल के कोची में रहने वाले 46 वर्षीय जैविक किसान एंथनी के. ए. शहर में सालों से खाली पड़ी या फिर कूड़ा-कचरा इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल की जा रही ज़मीनों पर तरह-तरह की सब्ज़ियां उगा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया और अब तक वह दो फसलें ले चुके हैं।
  • 12वीं कक्षा तक पढ़े एंथनी पिछले 10 सालों से अलग-अलग जगह पर जैविक खेती कर रहे हैं और इसके साथ ही वह एक ऑर्गेनिक स्टोर भी चलाते हैं।
  • अपने इस सफर के बारे में एंथनी ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरे परिवार का पुश्तैनी काम खेती ही था। एक वक़्त ऐसा भी आया जब मुझे खेती घाटे का सौदा लगने लगा और मैं अलग-अलग तरह के बिज़नेस में अपना हाथ आजमाने लगा। लेकिन वक़्त के साथ मुझे समझ में आ गया कि खेती पर ही ध्यान देना चाहिए। साथ ही, खेती के प्रति लोगों का नजरिया भी बदल रहा था। मुझे बहुत से लोगों से जैविक खेती के बारे में जानने को मिला। मैंने एक-दो किसानों से इसके बारे में बातचीत की और समझने की कोशिश की। फिर मुझे ऑर्गेनिक खेती पर होने वाले कोर्स के बारे में पता चला।”

(The Better India, 28 October 2020) News Link

  • अनोखे अंदाज में खेती कर परंपरागत खेती के मुकाबले 4 गुना अधिक कमाता है यूपी का यह किसान

Key points:

  1. यह कहानी उत्तर प्रदेश के शामली जिला के नग्गल गाँव में रहने वाले श्याम सिंह की है, जिन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़कर खेती को रोजगार का जरिया बनाया है। उन्होंने अपने 9 एकड़ की जमीन को फूड फॉरेस्ट में बदल दिया है और वहाँ अब प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं।
  2. श्याम इन दिनों लीची, आम, अनार, नींबू, केला, पपीता, नाशपाती जैसे 45 फलदार पेड़ों के साथ पारंपरिक फसलों की खेती भी कर रहे हैं। इनके खेत में आपको धान-गेहूँ, दाल के अलावा हल्दी, अदरक की खेती भी देखने को मिलेगी।
  3. श्याम ने द बेटर इंडिया को बताया, “यह बात 1991 की है। मेरे पिता जी और चाची जी, दोनों की मौत कैंसर से हो गई थी। उस वक्त मुझे विचार आया कि आधुनिक कृषि तकनीकों की वजह से कई जहरीले रसायन हमारे खान-पान के जरिए शरीर को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसी जद्दोजहद में मैंने शिक्षक की नौकरी को छोड़ प्राकृतिक खेती शुरू कर दी।”
  4. वह आगे बताते हैं, “मैं लगभग 25 वर्षों से गन्ना, धान, गेहूँ जैसे फसलों की ही खेती कर रहा था। लेकिन मैं 2017 में, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किसान सुभाष पालेकर जी से मिला और लखनऊ में उनके एक हफ्ते के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। यहाँ मैंने खेती के फाइव लेयर मॉडल के बारे में जानकारी हासिल की।”

(The Better India, 28 October 2020) News Link

  • India Imports 80% of Its Orchids. Meet the Telangana Farmer Changing This

Key points:

  1. Orchids are aesthetically pleasing flowers that are often used to decorate wedding venues in India. But, did you know that 80 percent of orchids sold in the country are imported from Thailand? Samir Baghat, a successful Telangana industrialist with a steel and iron manufacturing business, has decided to slowly change that by growing these flowers on his farm in Sangareddy district, Telangana.
  2. Samir and his relative Praveen Gupta decided to venture into the agri-business because they wanted to try something new and were always fond of growing plants.
  3. In 2015, they purchased eight acres of land in Sangareddy, which they named Mistwood Farms, and started to experiment with growing vegetables such as zucchini and fruits like pomegranate. However, the experiment failed because the soil was predominantly black and did not support the healthy growth of crops.
  4. “In 2016, while thinking about what I could grow without soil, I came across a farmer in Raipur who was growing orchids and was reaping decent profits by selling the cut flowers in the local flower market. These plants are not grown in soil but in another medium made of cocopeat predominantly. So I decided to try my hand at orchids too and did research online about how I could grow them in Telangana,” says Samir, adding that he did 90 percent of his research on the internet and ordered tissue cultured saplings of the Dendrobium variety of orchids in various colours from Thailand.
  5. The saplings were planted in pots with a mix of cocopeat and charcoal.“The first few were a failure,” recalls Samir. “Either they did not grow or did not produce flowers. But, after further research and providing extra care in terms of humidity and moisture, within 45-days we were successfully able to produce flowers. The flowers need a temperature of 20 degree Celsius and humidity of 80 percent to grow. So, I approached the horticulture department in Telangana to request their help to set up a polyhouse, on my farm, to regulate the temperature conditions. I also explained about the process of growing it and how if done on a large scale, it could generate profit as there were not many producers in India,” says Samir.

(The Better India, 28 October 2020) News Link

  1. एक कप चाय से भी कम कीमत में सैनिटरी नैपकिन बना, हज़ारों महिलाओं को दी सुरक्षा और रोज़गार

Key points:

  1. समाज में माहवारी को लेकर हमेशा ही एक दकियानूसी सोच रही है, लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश के एक ऐसे शख्स से मिलाने जा रहे हैं, जिसने न केवल गरीब महिलाओं के लिए सस्ते सेनिटरी नैपकिन बनाए हैं, बल्कि अपने अभिनव प्रयासों के जरिए देश के कई हजारों महिलाओं को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं।
  2. मिलिए, उत्तर प्रदेश के वृंदावन के रहने वाले वैज्ञानिक और उद्यमी महेश खंडेलवाल से, जिन्होंने बेहद सस्ते सेनिटरी नैपकिन बनाकर न सिर्फ कमजोर तबके के महिलाओं को माहवारी के मुश्किल दिनों में स्वच्छता संबंधी चिंताओं का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सबल भी बनाया।
  3. दरअसल, यह बात साल 2014 की है, जब उनकी मुलाकात मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला से हुई। इस दौरान डीएम बी. चंद्रकला ने उन्हें ग्रामीण तबके के महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाली पीड़ा के बारे में बताया। उनकी इस बात का महेश खंडेलवाल पर काफी गहरा असर हुआ।
  4. इसके बाद, लोगों द्वारा मजाक बनाए जाने के बाद भी उन्होंने न सिर्फ बाजार में उपलब्ध सेनिटरी नैपकिन के मुकाबले बेहद सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल पैड बनाने की जिम्मेदारी उठायी, बल्कि अपने नए-नए तकनीकी प्रयोगों से जमीनी स्तर पर एक बड़े बदलाव की मुहिम छेड़ दी।
  5. इसके बारे में महेश ने द बेटर इंडिया को बताया, “आज देश की करोड़ों महिलाओं को सेनिटरी नैपकिन की जरूरत पड़ती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सेनिटरी नैपकिन को व्यवहार में नहीं लाया जाता है, जिससे कई स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उभर रही हैं। मेरा उद्देश्य एक ऐसे उत्पाद को विकसित करने का था, जिसे स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित किया जा सके।”

(The Better India, 28 October 2020) News Link

  1. IIT-Khargpur Innovates New Vegetable Oil Packed With Nutrients For the Same Cost

Key points:

  1. The vegetable oil in our kitchens may soon be replaced with a healthier blend. The same solution could also turn into a healthier alternative for solid fats in dairy products, in the form of powdered vegetable oil consumables. All of that thanks to an award-winning innovation by IIT-Kharagpur researchers, that promises healthy vegetable oil rich in antioxidants and low on saturated fat.
  2. Researchers at IIT-Kharagpur claim their patented blend of oils, which is mixed with market-available vegetable oil, makes it low on cholesterol, trans and saturated fats.
  3. “The proportion of saturated fats varies in the content. However, our oil is endowed with natural antioxidants along with the right proportion of polyunsaturated and monounsaturated fatty acids. They are commonly known as (MUFA & PUFA),” says Hari Mishra, Department of Agricultural and Food Engineering.
  4. Hari, who heads the project, said the oils are carefully chosen and blended in a particular proportion, combined with patented technology, making it a good replacement for existing vegetable oils. The team bagged the Gandhian Young Technological Innovation (SITARE-GYTI) Award 2020 for this new oil. (The Better India, 28 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 19th 2020

  • Investment in Bharat by US companies
    • [Funding alert] Quiz-based learning platform Genius Teacher raises $2M from Indian and US investors

Key points:

  1. The Mumbai-based edtech startup will use the funding to create products for teachers and grow fast to million-plus students in the next 12 months.
  2. “Genius Teacher is all about transforming boring education to a learning adventure. We have a big vision to be the best quiz-based learning platform loved by millions of children in K-12. We will utilise our $2 million funds raised to create products for teachers and grow fast to million-plus students in the next 12 months,” said Founder and CEO Advitiya Sharma.
  3. With over 100-plus schools, 2,000+ teachers, 70,000+ paid students, and a record 100 percent renewals, Genius Teacher said it is bringing about a paradigm shift in how students are being taught in school and at home. Its app is available for Android and iOS users.

(Your Story,19 October 2020) News Link

  • Investment in Bharat by other countries
  1. [Funding alert] Ultraviolette Automotive raises from GoFrugal Technologies as part of ongoing Series B round

Key points:

  1. Earlier in September 2020, Ultraviolette Automotive raised Rs 30 crore by the leading two-wheeler and three-wheeler manufacturer TVS Motor Company, as a part of its ongoing Series B funding.
  2. Bengaluru-based startup Ultraviolette Automotive on Monday announced that it has raised an undisclosed amount as part of its ongoing Series B round led by Kumar Vembu, CEO of GoFrugal Technologies.
  3. Earlier in September 2020, Ultraviolette Automotive raised Rs 30 crore by the leading two-wheeler and three-wheeler manufacturer TVS Motor Company, as a part of its ongoing Series B funding.
  4. At Ultraviolette Automotive, our ambition has always been to create a visible and tangible impact in the personal mobility industry, by developing products and solutions that are indigenously built, technologically disruptive and that reflects the unlimited potential for innovation across every aspect of design engineering (Your Story, 19 October 2020) News Link
  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • RAISE 2020: This startup powers Indic language interfaces of Paytm, PolicyBazaar, others

Key points:

  1. Gurugram-based AI startup Process9’s Indic language technologies service verticals like ecommerce, entertainment, fintech, and travel.
  2. One of the co-founders, Devendra Joshi, was responsible for localising Apple products in local languages back in the 90s. He was also the first to develop Indic language fonts for media companies in India and Southeast Asia.
  3. In the early 2010s, when Joshi and his Co-founders, Rakesh Kapoor and Vidushi Kapoor, turned their attention towards mobile and internet, they realised that Indic languages had a “next-to-nothing” presence in the space.
  4. “Many of the things we launched years ago are mainstream now. We worked with mobile manufacturers to Indianse their OS, fonts, and keypads. Our localisation stack was pre-embedded in their handsets. Today, Indic language support on smartphones is mandatory because mobiles are the entry point to the internet. Availability of Indic languages improves representation and accessibility.”
  5. Over 60 percent of the fintech decacorn’s users come from Tier II and III towns, with 25-30 percent transacting in Indic languages. Process9 powers Paytm’s Indic language interfaces and helps drive deeper user engagement.

(Your Story, 19 October 2020) News Link

  • This Benglauru-based startup is enabling businesses to grow by specialising in all things data

Key points:

  1. With its database support, consultancy and engineering services, know how GeoPITS is enabling companies to grow by creating a high-performing database environment to derive meaningful business insights at affordable costs tailor made for their requirements.
  2. Thiru founded Geo Platinum IT Services (GeoPITS) to bring this change in approach by providing the right expertise in building a reliable, scalable and efficient database environment. Founded in 2017, its mission is to create a high-performing database environment for companies to derive meaningful business insights while keeping costs, quality and sustainability in mind.
  3. GeoPITS provides comprehensive database services across three main aspects: 24×7 database support, managed services and consulting. The company’s experts provide round-the-clock database support, including remote database administration (DBA) support that helps companies to monitor, manage, optimise and maintain databases as per their requirements.
  4. Despite growing awareness about the benefits of cloud adoption, migrating databases to the cloud is often perceived as a difficult exercise. GeoPITS’ tried and trusted staged migration approach helps companies effectively move their database to any on premise, cloud or hybrid environment, with ease. In one instance, GeoPITS managed to migrate a company’s database and ETL packages in five months, with only two hours of downtime in the entire period.

(Your Story, 19 October 2020) News Link

  • How Pune-based Vendekin is using SaaS tech to enable a secure, cashless, and touch-free vending experience

Key points:

  1. End-to-end integrated intelligent vending solution Vendekin partners with manufacturers and retrofits existing vending machines to enable users to purchase via a mobile app and make cashless payments.
  2. Founded in 2016 by Aroon Khatter, Pune-based Vendekin is looking to tap this growing market by enabling the digitisation and democratisation of vending with its patented technology for unmanned automated vending machines, micro markets, and self-service kiosks.
  3. Vendekin, which aims to make the vending experience touch-free and cashless, is involved in retrofitting existing vending machines and partnering with vending machine manufacturers to include SaaS technology, which enables users to purchase the product via mobile app and make payments online.
  4. Earlier named Convipay, Vendekin began its journey by enabling digital transactions for sanitary napkin vending machines. On realising the lack of digitisation in the space, the startup was expanded to create an online software platform to ensure a single-point interface for users.
  5. Vendekin is currently working with Godrej, Hindustan Unilever, and Nestle to digitise their coffee machines. It also counts brands such as Coca-Cola and Yess Pizza as clients. The company works with multibrand vending machine makers such as Vendiman, InstaGo, and Grabbit among others for retrofitting their machines.

(Your Story, 19 October 2020) News Link

  • Stylish yet simple: startup Boingg!’s winning mantra to give kids a happy start

Key points:

  1. Gurugram-based children’s furniture startup Boingg! survived days of zero revenue during the pandemic-led lockdown. Sales have now picked up for the startup, which is targeting up to Rs 50 lakh revenue per month by Diwali.
  2. “In a family home, all the joy and laughter reside in the child’s room. We want the room to match its occupant,” says Neha Indori, Co-founder of children furniture startup Boingg!
  3. Bitten by the entrepreneurial bug, Neha discussed the idea with her husband, Vitesh, and her brother-in-law, Dhruvan Barar, an IIM-Kozhikode graduate who was then working with Quikr as a Senior Associate. Vitesh decided to continue working with BMW, while Neha quit her job at Infosys India and joined hands with Dhruvan to start Boingg!
  4. “Boingg! is the sound when kids are jumping up and down on the bed! The name signifies the sheer joy of that happy moment and also the fact that the kids can, in fact, jump on our beds as much as they want. We tested them with our own kids,” Neha says.
  5. Boingg! targets young couples between ages 25 and 35 years, with children between zero to six years old. It sells beds, tables, storages, cribs, changing tables, nursing chairs, sofas, teepees, playmats, among others. The price for Boingg!’s furniture starts from Rs 2,750 (for a wall shelf) and can go up to Rs 83,500 (for a bunk bed with an in-built wardrobe.)

(Your Story, 19 October 2020) News Link

  • Goa Startup’s Biodegradable Packaging Stores Liquid Food For 2 Days, Without Leaks

Key points:

  1. “The practice of food packaging and delivery in the food and restaurant business is predominantly centred around plastic or aluminium containers. These containers either pile up in our homes or probably enter a landfill,” says Sachin Gangadharan, an architect who quit his job and co-founded the startup in 2019.
  2. LaFabrica Craft launched by Sachin Gangadharan offers biodegradable packaging solutions through innovative paper bags that prevent liquids from leaking and carry weights upto 20 kg
  3. Can you imagine collecting a parcel for a dal or a curry from one of the favourite restaurants in a paper bag? Further, what if the paper packaging guarantees to be leak-proof for two days? A Goa-based startup – LaFabrica Craft – has innovated just that -a packaging solution that allows liquid food items to be carried in a biodegradable packaging solution.

(The Better India, 19 October 2020) News Link

  1. कुल्हड़ से बनी छत और लकड़ीपत्थर के शानदार मकान, ये आठ दोस्त बदल रहे हैं गाँवों की तस्वीर

Key points:

  1. सेंटर फॉर एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी (CEPT), अहमदाबाद के 8 साथियों ने मिलकर कॉलेज के दिनों में ही कंपार्टमेंट्स एस4 (Compartments S4) नाम से एक आर्किटेक्चर कंपनी शुरू कर दी थी। इसके तहत उनका लक्ष्य सतत वास्तुकला के जरिए सामुदायिक विकास को बढ़ावा देना है।
  2. मोनिक शाह कहते हैं कि गाँव के लोगों के लिए छोटी-छोटी चीजों के भी बड़े मायने होते हैं। घुग्गूखाम गाँव के प्रवेश स्थल पर एक साइन बोर्ड लगा था, जो बेकार हो चुका था। इसलिए हमने वहाँ नया साइन बोर्ड लगाते हुए, उसमें एक स्पीकर लगा दिया। इसमें स्थानीय पक्षियों, लोक गीतों बारिश आदि की आवाज रिकार्डेड थी और जब भी वहाँ से कोई गुजरता, तो इसमें से काफी मीठी आवाज आती “घुग्गूखाम में आपका स्वागत है”, इससे ग्रामीणों को काफी खुशी हुई।
  3. मोनिक शाह ने बताया कि उत्तराखंड में खुले में शौच की काफी समस्या है। इसी को देखते हुए उन्हें पौड़ी जिला प्रशासन की ओर से शौचालय का मॉडल विकसित करने का मौका मिला। उन्होंने कहा, “सामान्यतः शौचालय बनाने में 3500-4000 ईंट और 25-30 सीमेंट की बोरियां लगती है, लेकिन हमने इसे मात्र 2 हजार ईंट और 15 बैग सीमेंट में बना दिया। इससे घर को थर्मल इंसुलेशन भी मिल गया।“मोनिक शाह कहते हैं कि इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों को शौचालय के महत्व को बताना था। इसलिए उन्होंने स्थानीय लोगों की जरूरतों को समझते हुए इसमें वेंडिंग मशीन, ब्रेस्ट फीडिंग रूम, आदि की भी व्यवस्था की। इस तरह, 150 वर्ग फीट के इस शौचालय को बनाने में महज 2 लाख रुपए खर्च हुए।

(The Better India, 19 October 2020) News Link

  • मोती की खेती से बने लखपति, शिक्षित युवाओं से करते हैं किसानी करने की अपील

Key points:

  1. विजेंद्र ने द बेटर इंडिया को बताया, “गाँव में मेरे चार तालाब हैं। इनमें तीन 60×40, जबकि एक 60×50 मीटर का है। एक तालाब में 5000 से लेकर 7000 तक सीप डाले जाते हैं। इनका मॉर्टेलिटी रेट 30 फीसदी के आस पास है। 70 प्रतिशत के करीब सीप मिल जाता है। एक सीप में दो मोती होते हैं। इस तरह 5000 सीप से 10 हजार के करीब मोती प्राप्त हो जाते हैं। एक मोती न्यूनतम सौ से डेढ़ सौ रूपये का बिकता है। एक तालाब से 5.50 लाख रुपये से अधिक की कमाई हो जाती है।”
  2. विजेंद्र के ज्यादातर मोती की सप्लाई हैदराबाद में होती है। इसके अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश जैसी जगहों पर भी इनकी अच्छी मांग है। तीर्थ स्थान होने की वजह से मोती की बनी माला, अंगूठी आदि में धारण करने के लिए इन मोतियों की मांग वहाँ से आती है।
  3. विजेंद्र बताते हैं कि वह मोती की खेती के साथ मछली पालन भी करते हैं। इससे उनकी अतिरिक्त आय होती है। इसके अलावा वह अन्य किसानों को मोती की खेती के लिए प्रशिक्षित भी करते हैं।

(The Better India, 19 October 2020) News Link

  • नीदरलैंड से खेती सीखी, सालाना 12 लाख टर्नओवर; देश के पहले किसान, जिसने धनिया से बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

Key points:

  1. अभी आठ एकड़ जमीन पर सेब और मसालों की खेती कर रहे हैं गोपाल, सेब की खेती के लिए उन्होंने नीदरलैंड और फ्रांस जाकर ट्रेनिंग ली है
  2. अभी सेब के साथ ही हल्दी, लहसुन, धनिया सहित कई मसालों की भी खेती करते हैं, वो कहते हैं कि एक इंच भी जमीन खाली नहीं जानी चाहिए
  3. गोपाल बताते हैं कि सेब की खेती के लिए सबसे जरूरी चीज है इसकी ट्रेनिंग। किसी एक्सपर्ट किसान से सेब की खेती को समझना चाहिए। जरूरत पड़े तो कुछ दिन किसानों के साथ रहकर हर छोटी बड़ी जानकारी हासिल करनी चाहिए। दूसरी सबसे अहम बात है कि इसकी खेती के लिए ठंडी वाली जगह होनी चाहिए। पहाड़ी बर्फीली इलाके में सेब की अच्छी खेती होती है। इसके साथ ही धैर्य और डेडिकेशन की भी जरूरत होती है। प्लांट्स की अच्छे तरीके से देखभाल की जरूरत होती है।

(Bhaskar, 19 October 2020) News Link

  • Homemade masks (Samaj ka contribution)
    • ढलती उम्र में है दूसरों के लिए कुछ करने की चाह, खुद सिलकर मुफ्त में बांटे 2000 मास्क

Key points:

  1. मास्क बनाने की मुहिम के बारे में वह बतातीं हैं, “जब लॉकडाउन हुआ तब मैं बेंगलुरू में बेटे के घर में थी। एक दिन मेरी बेटी ने एक वीडियो भेजा कि कैसे लोग घरों पर ही मास्क बना रहे हैं। इसके बाद ही मैंने मास्क बनाना शुरू किया।”
  2. जब तक वह बेंगलुरू में रहीं तो वहाँ पर हाथ से ही मास्क बनाकर सफाई कर्मचारी, सब्ज़ीवालों, चौकीदार आदि को बांटतीं रहीं। लॉकडाउन के बाद वह सांगली लौट आईं। यहाँ भी अपने सभी काम करते हुए उन्होंने मास्क बनाना ज़ारी रखा। यहाँ पर वह अपनी सिलाई मशीन से मास्क बनाती हैं। उन्होंने अब तक 2000 से भी ज्यादा मास्क बांटे हैं।
  3. “अब तो मेरे जीवन का उद्देश्य यही है कि मैं दूसरों की सेवा कर पाऊं। किसी ज़रूरतमंद के लिए कुछ करूँ, इससे ज्यादा और क्या चाहिए? बाकी मेरे बच्चे और उनके बच्चे हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ढलती उम्र में अक्सर यही लगता है कि कुछ करने के लिए नहीं है लेकिन यह सिर्फ एक मिथक है। कभी भी यह नहीं सोचें कि अब आप कुछ नहीं कर सकते, अब जितनी सांसे मिली हैं, कम से कम उनमें तो किसी के लिए कुछ करने की कोशिश कर ही सकते हैं,” उन्होंने कहा।

(The Better India, 19 October 2020) News Link

  1. Delhi constable takes classes for children who cannot afford smart devices

Key points:

  1. Constable Than Singh has been conducting classes for children for a long time now. He continues teaching them during the pandemic too, after ensuring all health protocols are in place.
  2. Than Singh, a constable from the Delhi police force continues to do what he’s good at – helping children continue their education. And the pandemic has not put a stop to it. Than Singh takes classes for children from underprivileged backgrounds, especially children of labourers across the city.
  3. Earlier in September, a Bengaluru cop also conducted classes in a similar manner in a migrant settlement in Nagarbhavi. Sub-Inspector of Police Shantappa Jadammanavar engaged the students in an hour of Vedic mathematics every day before heading to work.

(Your Story, 19 October 2020) News Link

  • Vaccine development
  1. स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने राज्‍यों के साथ शुरू किया संवाद, कहा- टीकाकरण के लिए मिलकर करनी होगी कोशिशें

Key points:

  1. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सोमवार को कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कोरोना के मामलों से संबंधित पूर्वानुमान मॉडल बनाने के लिए दुनिया के वैज्ञानिकों से संपर्क किया है। अनुसंधान आधारित उपायों में पाया गया है कि 3-4 महीनों तक उचित व्यवहार के जरिए भारत में कोरोना के मामलों में गिरावट की प्रवृत्ति बढ़ेगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि यदि एहतियाती उपायों का समुचित ढंग से पालन किया जाए तो फरवरी तक हमारे पास 40 हजार सक्रिय केस होंगे।
  2. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि टीकाकरण प्रक्रिया, कर्मचारियों एवं अन्य लॉजिस्टिक्स के प्रशिक्षण के लिए राज्य और केंद्र सरकार दोनों की ओर से मिलकर प्रयास किए जाने की जरूरत है। मैंने फिर से सभी राज्यों के साथ एक-एक कर, वहां की कोविड-19 की स्थिति और उनके मुख्य लक्षणों को लेकर बैठकें शुरू की हैं। आज सबसे पहली बैठक गुजरात के साथ की है। मुझे यकीन है कि हमारा देश आने वाले वक्‍त में भी कोरोना के मामलों में धीमी गिरावट की प्रवृत्ति को बरकरार रखेगा।
  3. उल्‍लेखनीय है कि हर्षवर्धन ने रविवार को कहा था कि कोरोना का सामुदायिक तौर पर संक्रमण चुनिंदा राज्यों के कुछ जिलों में सीमित है। उन्‍होंने साफ किया था कि कम्‍यूनिटी ट्रांसमिशन पूरे देश में नहीं हो रहा है। ‘सन्डे संवाद’ के छठे एपिसोड में सोशल मीडिया फॉलोअरों से बातचीत में उन्‍होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल समेत अनेक राज्यों के विभिन्न हिस्सों में और खासतौर पर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कोरोना का कम्‍यूनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक संक्रमण हो रहा है। सनद रहे कि केंद्र सरकार अभी तक सामुदायिक संक्रमण की बात से इनकार करती रही है।

(Jagran, 19 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 13th 2020

  • Vaccine development
  1. देश में कहां तक पहुंची कोरोना वैक्सीन की तैयारी, हेल्थ मिनिस्टर ने सब बताया

Key points:

  1. देश में अगले साल तक कोरोना वैक्सीन सामने आ सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने आज मंत्रियों के समूह को कोरोना वैक्सीन की तैयारियों को लेकर अपडेट दिया है।
  2. देश के अगले साल तक आ सकती है कोरोना की वैक्सीन|WHO ने भी इस साल के अंत तक या अगले साल के शुरू में कोरोना वैक्सीन की उम्मीद जताई है
  3. कोविड-19 का टीका कुछ ही महीनों में उपलब्ध होने की संभावना के बीच सरकार ने व्यापक स्तर पर कोल्ड स्टोरेज की पहचान करना शुरू कर दिया है। इसका मकसद है कि देशभर में टीके की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह दवा क्षेत्र, फूड प्रॉसेसिंग और कृषि क्षेत्र की निजी और सरकारी कंपनियों से इनके लिए बात कर रहा है। साथ ही घर पर खाना डिलिवरी करने वाली स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों के भी संपर्क में है। इस पूरी कवायद का मकसद तालुका स्तर पर रेफ्रिजरेटरों, कोल्ड स्टोरेज इत्यादि की व्यवस्था करना है जो टीके का भंडारण और वितरण कर सकें। इस पूरी कवायद के जानकार एक सूत्र ने यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा कि टीका वितरण की एक योजना के अगले हफ्ते के मध्य तक जारी होने की संभावना है।
  4. अधिकतर टीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखा जाएगा। सूत्र ने कहा कि अधिकतर टीके तरल स्वरूप में होंगे सिवाय कुछ को छोड़कर जिन्हें जमा कर रखा जाएगा। वहीं अधिकतर टीके कई खुराक वाली शीशियों में उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोल्ड स्टोरेज की सप्लाई चेन तैयार करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

(Navbahrat Times, 13 October 2020) News Link

  1. सान्वी एम प्राजित ने 1 घंटे में बनाई 33 डिश, सबसे कम उम्र में इतने पकवान बनाने वाली इस बच्ची का नाम एशिया और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ

Key points:

  1. सान्वी को इस काम की प्रेरणा अपनी मां मंजिमा से मिली। मंजिमा खुद स्टार शेफ और कुकरी शो की फाइनलिस्ट हैं
  2. इस बच्ची का अपना यू ट्यूब चैनल भी है जहां वे दर्शकों को आसान रेसिपी बनाना सिखाती हैं
  3. इसका नाम एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। सान्वी ने जो चीजें बनाई उसमें इडली, वेफल, कॉर्न, फिटर्स, मशरूम टिक्का, उत्तपम, पनीर टिक्का, एग बुल्स आई, सैंडविच, पापड़ी चाट, फ्राइड राइस, चिकन रोस्ट, पैनकेक, अप्पम शामिल हैं। सान्वी एयर फोर्स के विंग कमांडर प्राजित बाबू की बेटी हैं। उनकी मां का नाम मंजिमा है।

(Dainik Bhaskar, 13 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • Chennai-based Jnana Inventive is helping retailers connect with users online amid pandemic

Key points:

  1. Jnana Inventive’s SaaS application, e-vaadikkai, helps retailers gain online presence and connect with users under their own shop or brand name.
  2. Launched in 2018, Jnana Inventive is the brainchild of husband-wife duo Kalidoss Rajagopalan and DC Sinthuja, and is looking to help offline retail shop owners move their businesses online and connect with customers through its SaaS application, e-vaadikkai.
  3. E-vaadikkai was launched to solve these problems and help retailers grow their business online, he adds. At present, the SaaS application has over 100 retailers listed on its platform.
  4. Speaking about the core product, Kalidoss explains that e-vaadikkai helps retailers gain online presence and connect with the users under their own shop or brand name.
  5. Kalidoss explains that e-vaadikkai operates on a B2B subscription-based model. “Our pricing range starts from Rs 199 to Rs 499 per month. There are no hidden charges and commissions,” he adds. He also reveals that the subscription can be paid by the retailers after they start earning through the app.and Management for free, in partnership with FICCI and NATHEALTH.

(Your Story, 13 October 2020) News Link

  • Backed by Apollo Group, this edtech startup aims to bridge skills gap in the healthcare space

Key points:

  1. Hyderabad-based healthcare-focused edtech startup Medvarsity offers 140 courses in clinical and management areas for doctors, nurses, and general management personnel. It claims to have trained over three lakh medical professionals till now.
  2. The gaps in healthcare education led to the birth of Hyderabad-based Medvarsity, which was established and promoted by Apollo Group in 2000 with one vision: impacting healthcare through education.
  3. Launched as Apollo Medvarsity, the company was rebranded as Medvarsity Online in 2016 with the launch of a new website. Gerald Jaideep took over as CEO and the online varsity has over the years evolved into Asia’s largest healthcare edtech company.
  4. Medvarsity offers more than 140 courses in clinical and management areas for doctors, nurses, and general management personnel, including specialties such as diabetes, emergency medicine, cardiology, nutrition, wellness, healthcare informatics, mental health, NABH, and telemedicine. As many as three lakh medical professionals have been trained and certified.
  5. Medvarsity claims to have educated more than 1.6 lakh healthcare professionals on COVID-19: Awareness and Management for free, in partnership with FICCI and NATHEALTH.

(Your Story, 13 October 2020) News Link

  • How this tech startup tailored its business to see growth during the pandemic

Key points:

  1. Mirrorsize’s patent-pending technology uses a combination of AI, image processing, and data analytics to find precise body measurements and create bespoke outfits for customers.
  2. Mirrorsize, an AI company that offers a 3D body measurement tool with a laptop or smartphone camera, is making the most of the present situation.
  3. “COVID has turned out to be an opportunity for Mirrorsize, which has fast forwarded digital implementation among various customers,” says Arup Chakraborty, CEO and Founder, Mirrorsize.
  4. Mirrorsize is essentially a SaaS company, which charges fee on a subscription basis. It has three pricing models – small, medium, and enterprise.
  5. After getting a lot of customers during the pandemic, Mirrorsize, which was planning to raise funding early this year, decided to push this plan as well. The company has turned cash-flow positive and is in the ‘green zone’ as it onboarded more clients. (Your Story, 13 October 2020) News Link
  1. झारखंड: ‘ऑनलाइननहींऑन वॉलचलती है इस प्रेरक शिक्षक की पाठशाला

Key points:

  1. अभिभावकों की इजाजत से उनके घरों की दीवार पर थोड़ी-थोड़ी दूरी के साथ ब्लैक बोर्ड बनवा दिए गए, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके। इन्हीं ब्लैक बोर्ड पर छात्र, शिक्षक के पढ़ाए पाठ लिखते हैं और सवालों के जवाब भी लिखते हैं। डॉ. सपन कुमार खुद कम्युनिटी लाउड स्पीकर के ज़रिए बच्चों को पढ़ाई करवा रहे हैं।
  2. डुमरथर में एक किलोमीटर की परिधि में चार जगह चल रही इन विशेष कक्षाओं में इस वक्त 295 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं
  3. दूरस्थ जनजातीय इलाके में स्थित गाँव में अपने इनोवेशन से शिक्षा प्रदान कर रहे 44 वर्षीय सपन कुमार के मुताबिक सामुदायिक सहयोग से इन कक्षाओं को चलते हुए तीन महीने हो गए हैं। छोटे बच्चों का पठन-पाठन डुमरथर के ऊर्जा से भरे युवाओं के हवाले है। स्कूल के चार टीचर इन कक्षाओं को पढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। वह बताते हैं कि सुविधा को देखते हुए कक्षा एक और दो के बच्चों को उनके घर के सबसे नजदीक बैठाया जाता है। वह कहते हैं कि जब तक कोरोना संक्रमण काल चल रहा है वह इन कक्षाओं को इसी तरह संचालित करेंगे या फिर जब तक सरकार इन कक्षाओं को बंद करने के लिए नहीं कहती, तब तक यह इसी प्रकार संचालित होती रहेंगी।

(The Better India, 13 October 2020) News Link

  1. At 79, Mumbai Woman Uses Secret Recipe to Start Chai Masala Business from Home

Key points:

  1. During the lockdown, 79-year-old Kokila Parekh started a chai masala business from Mumbai home to keep herself active.
  2. The masala powder recipe has been passed down by her ancestors and Mrs. Parekh has been making chai and milk with it for her family members for years now. When guests come home they are served her famous masala chai with some hot snacks.
  3. Initially, Mrs. Parekh would make a few extra kilos to distribute among these circles but, last month, she decided to start selling her chai masala powder across the country.
  4. Since she had already mastered the secret recipe for the masala powder, the next step was to select a name for her brand. She went with – KT Chai Masala, short for ‘Kokila and Tushar’s Chai Masala’.

(The Better India, 13 October 2020) News Link

  • एक बायोगैस प्लांट से साल भर में 6 गैस सिलिंडर और खाद के खर्च को बचा रहा है यह किसान

Key points:

  1. हरियाणा में भिवानी जिला के ईशरवाल गाँव में रहने वाले अमरजीत पिछले 1.5 साल से जैविक खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में बायोगैस प्लांट भी लगवाया है, जिसकी मदद से वह जैविक खाद तो बना ही रहे हैं साथ ही रसोई तक गैस भी पहुँचा रहे हैं।
  2. अपने कारोबार के साथ-साथ अमरजीत समाज सेवा से भी जुड़ गए। अलग-अलग जगह होने वाली गोष्ठियों में वह जाते और हरियाणा में ज़्यादातर किसानों की समस्यायों, पर्यावरण और रासायनिक खेती के प्रभावों पर काफी चर्चा होती। उन्हें जैविक खेती और रासायनिक खेती के बीच का अंतर समझ में आया।
  3. अमरजीत ने पिछले साल ही अपने यहाँ बायोगैस प्लांट लगवाया है और इससे उन्हें न सिर्फ बायोगैस बल्कि स्लरी के रूप में तरल और ठोस, दोनों ही तौर पर अच्छी खाद भी मिल रही है। उनके घर में 4 पशु हैं और इनका जरा-सा भी गोबर वेस्ट नहीं जाता है। वह कहते हैं कि उनके यहाँ उत्पन्न होने वाला गोबर पूरी तरह से इस्तेमाल में लाया जा रहा है। इससे न तो गोबर खुले में पड़े रहने की समस्या है और न ही इससे कूड़ा-कचरा बढ़ रहा है। दूसरा, गोबर सीधा खेत में इस्तेमाल करने से इसमें मौजूद मीथेन भी खेतों में जाती थी, जो उनके मुताबिक मिट्टी के लिए ठीक नहीं होता है।
  4. बायो गैस प्लांट्स को लेकर देश में लोगों की धारणाएं बहुत अलग-अलग हैं। कुछ लोग कहते हैं कि उनके यहाँ यह कामयाब हुआ है तो कुछ लोगों के लिए यह एक असफल प्रयास रहता है। अमरजीत ने भी जब अपने यहाँ बायोगैस प्लांट बनवाना शुरू किया तो बहुत से लोगों ने उन्हें हिदायत दी कि वह न बनवाएं, कोई फायदा नहीं होता है। लेकिन अमरजीत ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपने यहीं के एक स्थानीय मिस्त्री से इसका निर्माण कराया।

(The Better India, 13 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 9th 2020

  • Developing PPE kits and testing kits
    • भारत और इजरायल का कमाल, चुटकियों में पता चलेगा कोरोना है या नहीं, सिर्फ पाइप में मारना होगा फूंक और 1 मिनट के भीतर नतीजे

Key points:

  1. भारत और इजरायल ने साथ मिलकर तैयार की कोरोना टेस्ट की गेमचेंजर टेक्नॉलजी
  2. सिर्फ 30 से 50 सेकंड में मिलेंगे नतीजे, सैंपल भी देने की जरूरत नहीं, सिर्फ पाइफ में फूंक मारना होगा
  3. भारत में इजरायल के राजदूत रॉन माल्का ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में इस बारे में जानकारी दी
  4. आवाज से कोरोना टेस्ट का भी हो चुका है ट्रायल – भारत और इजरायल ने संयुक्त रूप से 4 टेस्ट टेक्नॉलजी का ट्रायल कर चुके हैं। भारत में बड़ी तादाद में इन टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए। इन तकनीकों में ब्रेथ ऐनालाइजर और वॉइस टेस्ट भी शामिल हैं। इनमें कोरोना का तुरंत पता लगाने की क्षमता है।
  5. वैक्सीन को लेकर दोनों देशों के बीच तालमेल के सवाल पर माल्का ने कहा कि दोनों देश हमेश से रिसर्च और टेक्नॉलजी को एक दूसरे से शेयर करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक दूसरे का सहयोग और समर्थन कर रहे हैं। इजरायली राजदूत ने कहा कि भारत में कोरोना वैक्सीन का हब बनने के लिहाज से तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब भी विश्वसनीय, सुरक्षित और कारगर वैक्सीन बनेगी तब उसमें से ज्यादातर का उत्पादन भारत में होगा। माल्का ने कहा कि भारत जब भी वैक्सीन बनाएगा तब इजरायल की जरूरतों का भी ख्याल रखेगा।

(Navbharart Times, 9 October 2020) News Link

  1. महाराष्ट्र: पपीतातरबूज की खेती कर लाखों कमाता है यह किसान, 50 अन्य को किया प्रेरित

Key points:

  1. महाराष्ट्र के बीड जिले के पराली तालुका के नंदगौल गाँव के संदीप गिते ने सूखाग्रस्त क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
  2. संदीप बताते हैं कि जैविक विधि से खेती करने में परम्परागत शैलियों के मुकाबले काफी कम पानी की जरूरत होती है और खर्च में भी कम होता है।
  3. संदीप फिलहाल, 20 टन पपीते की खेती करते हैं और उनके उत्पादों की आपूर्ति राज्य के कई हिस्सों में की जाती है।
  4. संदीप के कामयाबी को देखते हुए गाँव के अन्य किसान भी कुछ ऐसा ही प्रयोग करने के लिए विचार करने लगे। यहाँ जनवरी, 2020 में आठ किसानों का समूह बनाया गया था, जिससे कि आज 50 किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान दूसरे फलों की भी खेती करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

(The Better India, 9 October 2020) News Link

  • After Son Misses Desserts, Mumbai Parents Launch Amazing 100% Vegan Ice Creams

Key points:

  1. Samir and Hemali from Mumbai turned vegans two decades ago and raised their children as vegans. Here’s how they found alternatives to everything, including ice cream
  2. The decision to turn vegan was not easy for Mumbai-based Samir Pasad, the founder of Vegan Bites and Nomou, and his father. As vegetarians, their diet was heavily dairy dependent and since they made the decision to go vegan virtually overnight, twenty years ago, it meant their food choices became extremely limited. Vegans are people who refrain from consuming meat, eggs, dairy products, and any other animal-derived substances.
  3. Their initial guinea pigs were their own children and relatives who gave genuine feedback to help them develop a vegan ice cream closest to a conventional one. They also got reviews from customers who were offered ice creams along with their catered meals.
  4. Their efforts paid off because they discovered there was a market, albeit a niche one, for vegan ice creams. Today, Nomou is sold in supermarkets like Nature’s Basket, ice cream parlours, and even directly to customers who order via Swiggy and Zomato.

(The Better India, 9 October 2020) News Link

  • दिल्ली में बेकिंग सीख मां को जम्मू भेजती थीं रेसिपी; नौकरी छोड़ 2 लाख रुपए से शुरू किया केक का बिजनेस, 50 हजार रुपए महीना कमाती हैं

Key points:

  1. दिल्ली में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी करती थीं तान्या, जनवरी में खुद का बिजनेस करने लौट आईं, अपने घर के किचन को ही वर्कशॉप में बदला
  2. लॉकडाउन में फेसबुक-इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर बेकरी आइटम्स को प्रमोट करना शुरू किया, ऑनलाइन और फोन पर ऑर्डर आने लगे

(Dainik Bhaskar, 9 October 2020) News Link

  • किसानों ने अभिशाप को बनाया वरदान, अब सफेद रेत पर हरा सोना उगाकर हो रहे मालामाल, तस्वीरें

Key points:

  1. पहले उपजाऊ भूमि में रेत भर जाने से किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे थे, लेकिन किसान अब नई तकनीक से खेती करने लगे हैं। जिससे सफेद रेत में हरी सब्जियों व रेत पर उगने वाली फसल से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। कछार की मिट्टी में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है न ही सिंचाई की। बाढ़ के इस अभिशाप को कछार के किसानों ने अपने लिए वरदान बना लिया है।
  2. दो माह पूर्व जहां 15 से 20 फीट तक बाढ़ का पानी भरा था जिसमें किसानों की हजारों बीघा धान, गन्ना आदि फसल बर्बाद हो गई थी, आज उन्हीं सफेद रेत वाला खेतों को हरा सोने की खदान में बदलने के लिए संसाधन जुटाने और संवारने में किसान अपना पसीना बहा रहे है। यहां नवंबर माह से खेती का काम शुरु होकर मई माह में खत्म हो जाता है।
  3. नदी के रेत में बड़े स्तर पर तरबूज व खरबूजा की फसल लगाई जाती है फसल तैयार होने पर कई जिले के व्यापारी ट्रक द्वारा ले जाते हैं। दो जिलों की सीमा पर बसा गांव गुनौली निवासी पांचवी जमात तक पढ़े कालीप्रसाद व सीताराम कहते हैं कि खरबूजे की खेती ने उनके बैंक के खाते को भी वजनी कर दिया है, कहते हैं कि हसरत से हौसला है और हौसले से ही उड़ान होती है।
  4. गांव के ही निवासी आठवीं जमात पास धनंजय मिश्रा बताते हैं कि उनके पास सवा सौ बीघा खेत है। जिसमें तरबूज, खरबूजा, लौकी, तोरई, कुम्हड़ा, करेला, परवल, कद्दू, खीरा सहित धान, गन्ना की यहां खेती नवंबर माह से शुरू होती है और मई माह तक समाप्त हो जाती है।

(Amar Ujala, 9 October 2020) News Link

  1. हिंसा ग्रस् दक्षिणी सूडान में आईपीएस अधिकारी रागिनी बनीं देश के लिए गर्व करने की वजह, जानें कैसे

Key Points:

  1. संयुक्‍त राष्‍ट्र की तरफ से जारी एक शॉर्ट वीडियो में रागिनी ने बताया है कि इस तरह के शांति अभियान का सदस्‍य बनना उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। रागिनी 6 अप्रैल 2019 को संयुक्‍त राष्‍ट्र के शांति अभियान का हिस्‍सा बनी थीं। इस मिशन में वो अकेली नहीं हैं, बल्कि उनके पति भी इसी मिशन का हिस्‍सा हैं। उन्‍होंने ही यूएन मिशन के लिए रागिनी को प्रेरित भी किया था।
  2. रागिनी दक्षिणी सूडान में तैनात हैं। ये देश काफी समय से हिंसा की चपेट में है। इसका सबसे ज्‍यादा खामियाजा यहां की महिलाओं और बच्‍चों को उठाना पड़ रहा है। हजारों की तादाद में यहां पर लोग अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रह गए हैं और यूएन की मदद पर जीवन गुजार रहे हैं। ऐसे में एक महिला अधिकारी के तौर पर रागिनी यूएन के शिविरों में रह रही महिलाओं के लिए भगवान से कम नहीं हैं। रागिनी बताती हैं कि यहां पर रह रही महिलाओं को ऐसी कई तरह की परेशानियां होती हैं जो वो किसी पुरुष अधिकारी से नहीं बता सकती हैं। ऐसे में वो उनकी मौजूदगी इन महिलाओं को राहत देती है।
  3. रागिनी मानती हैं कि यहां फैली हिंसा ने बड़े पैमाने पर महिलाओं और बच्‍चों को मुश्किलों में डाला है। महिला अधिकारी के होने का फायदा ये है कि महिलाएं अपनी बात सहजता से कर पाती हैं। उन्‍होंने यूएन के वीडियो में कहा कि उन्‍हें जो फीडबैक मिलता है उससे उन्‍हें काफी सुकून मिलता है। वो कहती हैं कि उन्‍हें यहां पर आने के बाद अभूतपूर्व अनुभव हुआ है। यहां पर आकर वो उन लोगों की मदद कर पाई हैं, जो इसके सही मायने में हकदार हैं। यहां पर काम करने वाला हर व्‍यक्ति इन लोगों के लिए आशा का स्रोत है। रागिनी ने वीडियो में बताया कि यूएन मिशन की नीली टोपी पहनने के बाद उन्‍हें एक नई ताकत और संतुष्टि मिलती है। उन्‍होंने यूएन मिशन के लिए दूसरों को भी प्रेरित किया है। उनका कहना है कि आप भी ये कर सकते हैं और आपको ये जरूर करना चाहिए।

(Dainik Jagran, 9 October 2020) News Link

  1. IIT Delhi Innovation: बोतल में पानी डालते ही खत्म हो जाएंगे जीवाणुकीटाणु , IIT दिल्ली ने विकसित की तकनीक

Key points:

  1. प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक बोतल तैयार किया है जो जीवाणु-कीटाणु को खत्म कर सकेगा। आइआइटी दिल्ली-इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोसैफ सॉल्यूशंस ने नैनो-टेक्नॉलॉजी और पारंपरिक विज्ञान के मिश्रण से पानी की यह बोतल तैयार की है। बोतल तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर आधारित है। इसे एक्यूक्योर (AqCure)  नाम दिया गया है।
  2. आइआइटी पदाधिकारी ने बताया कि पानी की बोतल एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटिफंगल हैं। इसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से सक्रिय नैनो-तांबा निकलता है। निकलने वाला तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरल बनाता है। सीधे संपर्क पर यह किसी भी तरह के जीवाणु और कीटाणु को कम या खत्म करता है। साथ ही संग्रहण किए गए पानी सुरक्षित बनाता है।
  3. यह एक पेटेंट तकनीक है जिसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से संयमित तरीके से सक्रिय नैनो-तांबा उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरस बनाता है, जो सीछे संपर्क पर रोगाणुओं के संचरण को कम करता है और पानी को सूक्ष्मजीव विज्ञानी रूप से सुरक्षित बनाता है।

(Dainik Jagran, 9 October 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • [Startup Bharat] How Goa-based Nao Spirits & Beverages is putting India on world gin map

Key points:

  1. Nao Spirits & Beverages has two gin brands under its umbrella: Greater Than and Hapusa. The startup has recorded 400 percent rise in sales in one year.
  2. Making the most of this trend, Anand Virmani and his wife Aparajita Ninan started Nao Spirits & Beverages in 2016. Nao Spirits claims to be India’s first craft gin company, and also one of the country’s first craft spirit startups.
  3. The startup was initially founded in Delhi, although its distillery was set up in Goa. Over time, Nao Spirits shifted its base to Goa and it turned out to be rather an advantage.
  4. With a small distillery in Goa, Nao Spirits has now branched out its distribution network to eight Indian cities and 14 countries across the globe. The startup has a subsidiary office in the UK.
  5. Nao Spirits sources its bottles, labels, and a few botanicals from abroad. However, most of the botanicals, along with the neutral wheat spirit, are procured from various parts of the country and distilled in Goa, in a copper pot still.

Your Story, 9 October 2020) News Link

  • Using electric planes and UAVs, this startup wants to redefine urban mobility in India

Key points:

  1. Chennai-based startup Ubifly Technologies Private Limited, branded as The ePlane Company, is building electric planes and UAVs for delivery and short-range intracity travel to redefine urban mobility.
  2. Increasing population, encroachments, traffic problems, and infrastructure problems are major concerns for Indian roadways. In a bid to solve issues related to inadequate road infrastructure, Chennai-based The ePlane Company is looking to take the aerial route.
  3. Ubifly Technologies Private Limited, better known as The ePlane Company (TEC), was founded in 2016 by Pranjal Mehta and Satyanarayanan Chakravarthy to provide aerial delivery services. The startup ideated out from the National Centre for Combustion Research & Development Lab (NCCRD).
  4. Speaking with YourStory, Satyanarayanan, Co-founder and CTO, explains that the startup is building electric planes and unmanned aerial vehicles (UAV) for short-range intracity travels and is aimed at redefining urban mobility.
  5. He explains that TEC vehicles are a hybrid — they take off and land like a drone while moving forward in the air like an electric aeroplane.
  6. Incubated at IITM Incubation Cell, IIT Madras, TEC founder made an initial investment of around Rs 30 lakh to develop the UAVs.
  7. The startup claims that its copyrighted ML algorithms enable a supervision-free flight. The vehicle takes off and lands vertically like a drone with a one push button. However, it moves forward like a plane and automatically detects any obstacles such as trees or power poles, etc. to ensure a safe flight..

(Your Story, 9 October 2020) News Link

  1. Free UPSC Coaching to Treating Addicts: Nagaland IPS Goes Above Duty to Save Lives

Key points:

  • When Dr. Pritpal Kaur Batra, a 2016-batch officer of the Indian Police Service (IPS), was first posted in the remote eastern border district of Tuensang in Nagaland as a sub-divisional police officer (SDPO), she was immediately struck by the generous and giving nature of its residents, who accorded her a warm welcome.
  • Using her long standing passion for and knowledge of teaching and farming, Dr. Kaur conducted free coaching classes for UPSC and state service aspirants, bought books and other study materials for them with her own money, and treated, counselled and taught drug addicts new vocational skills like organic farming.
  • As a result, Dr. Kaur, a native of Yamuna Nagar, Haryana, has made a real mark among the communities of Naga Hills who have been deleteriously affected by rampant underdevelopment, proliferation of synthetic drugs, HIV-AIDS, and a long-running insurgency.
  • Dr. Kaur decided to set up coaching classes for the Union civil services exam on a trial basis. The local administration advertised this initiative using social media and received a good response. The Superintendent of Police, Bharat Markad, helped her by sanctioning the use of the conference hall on the office premises and even supported the venture with money to purchase study materials.
  • Another significant initiative was conducting anti-narcotics campaigns across schools and colleges, and using her medical training to treat drug addicts using a combination of opioid substitution treatment (OST) and counselling. (The Better India, 9 October 2020) News Link
  • Entrepreneur Used Own Money & Ancestral Property to Start Goa’s First Farm College

Key points:

  1. Goa’s first community agricultural college was set up by Manguirish Pai Raiker 7 years ago.
  2. Yet, there are woefully inadequate capacities in India when it comes to actually learning how to farm. This was the realisation that made Manguirish Pai Raiker (64). a resident of Goa, to start the state’s first community agriculture college in 2013.
  3. Manguirish started a manufacturing business in the late seventies and continues to run it successfully till date. “Despite being in the manufacturing industry, it was agriculture that always fascinated me,” says Manguirish.
  4. He realised that while what he was doing was definitely helpful to individual students, to create large-scale impact, he needed to formalise it into a scalable process.
  5. In building the college Manguirish mentions that he spent all his life savings, he says, “If not for my supportive wife [Varsha], I doubt I would have been able to pull it off.”

(The Better India, 9 October 2020) News Link

Rising Bharat Swadeshi News Feed: October 8th 2020

  1. रूसी कोरोना वैक्सीन के मेगा ट्रायल से भारत ने कर दिया इनकार, जानिए क्या है वजह

Key points:

  1. भारत ने रूसी कोरोना वैक्सीन को बड़े पैमाने पर ट्रायल की अनुमति देने से किया इनकार
  2. भारत में इस स्पूतनिक वी की साझेदार डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज लिमिटेड ने मांगी थी अनुमति
  3. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने पहले इसे छोटे स्तर पर ट्रायल करने को कहा है
  4. भारत के इस फैसले के बाद रूस के Sputnik-V वैक्सीन को शुरू करने की तैयारियों को झटका लगा है। रूस किसी ऐसे देश वैक्सीन को अप्रूव करने की कोशिश करने में जुटा था जहां कोरोना के नए केसों की संख्या दुनिया में बहुत ज्यादा हो। माना जा रहा है कि भारत अगले कुछ हफ्तों में कोरोना संक्रमण के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ नंबर वन हो सकता है।

(Navbahrat Times, 8 October, 2020) News Link

  • Startup in Bharat by Bhartiya
    • How Gurugram-based CogniAble is using machine learning for early detection of autism spectrum disorder

Key points:

  1. Gurugram-based healthtech startup CogniAble provides two solutions: early automated screening for autism and digital therapy management. The online platform allows people to upload videos of children and get them screened for autism.
  2. Autism spectrum disorder isn’t easy to understand, but depictions in TV and movies have helped familiarise us with the developmental disorder that affects communication and behaviour.
  3. Founded in 2017 by Manu Kohli with his wife Dr Swati Kohli, Dr Prathosh AP and Dr Joshua Pritchard, the startup aims to bring affordability, accessibility and high-quality management to homes across India. Autism can be diagnosed at any age, but it is said to be a “developmental disorder” as symptoms generally appear in the first two years of life. This is why CogniAble is focusing on early detection by providing an online platform where people can upload videos of children and get them screened for autism.
  4. Quoting data from Indian Academy of Pediatrics, Manu says all children should be screened using standardised autism screening tools between 18 and 36 months of age. However, limited health professionals and infrastructure mean several children are diagnosed a year or two late.“CogniAble is an online platform available remotely for early screening and affordable behavioural intervention for autism spectrum disorders,” he says.
  5. The co-founder explains that users can upload videos of children using the mobile application. These are analysed by deep learning models to identify fine motor, gross motor, and complex actions based on a stimulus provided by a caregiver.
  6. After detection of autism, behavioural therapies are key to develop necessary skills promoting school and societal inclusion of children. The platform enables parents, schools, and institutes to get access to integrated assessment and treatment plans at 20 percent lesser costs, the founder claims.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • Starting with just two clients, B2B SaaS startup Whatfix recorded 300 pc revenue growth in 1 year

Key points:

  1. Sequoia Capital India backed SaaS startup Whatfix works as an interactive guidance platform, helping Fortune 500 companies increase employee productivity.
  2. Khadim Batti and Vara Kumar quit Huawei Telecom in 2011 to build a product that would help SMBs enhance their marketing capabilities. The product SearchEnabler would crawl across interwebs for data points, analyse them, and identify marketing recommendations.
  3. B2B SaaS startup Whatfix provides in-app overlays and guidance for implemented software. It provides services, including product adoption, user onboarding, employee training, self-service support, and performance support using enterprise web applications.
  4. Whatfix claims it has increased employee productivity by 35 percent, reducing training time and costs by 60 percent, reducing employee case tickets by 50 percent, and increasing application data accuracy by 20 percent.
  5. While headquartered in Bengaluru, Whatfix is a global startup, with employees based across multiple continents. The team increased its strength by 45 percent between January and June 2020 and has over 300 employees at present. The startup has offices in San Jose, Atlanta, Cambridge, and Melbourne.
  6. Just over the last year, Whatfix claims to have on-boarded over 100 Fortune 1000 customers. In 2019, it claims to have increased its total revenue by 300 percent.
  7. So far, Whatfix has raised $49.8 million. This year alone, it raised $32 million in its Series C round, led by Sequoia Capital India, with participation from existing investors Eight Roads Ventures, Cisco Investments, and F-Prime Capital.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • [Startup Bharat] Sambalpur-based hyperlocal startup Homvery aims to be the Urban Company of Odisha

Key points:

  1. Hyperlocal home services startup Homvery connects users with technical experts for home maintenance services. It has seen revenue grow 2.5x amidst the lockdown as home cleaning and disinfection services saw an uptick.
  2. Increased internet penetration and the use of smartphones have increased the demand for online services, and startups such as Dunzo, Urban Company, and Genie are tapping the opportunity. Hyperlocal delivery services generally involve online ordering and delivery of goods and services from mom-and-pop stores.
  3. Homvery, headquartered in Sambalpur, Odisha, aims to tap into the growing hyperlocal delivery market by providing home maintenance services.
  4. “As of now, we have over 50 technicians working with us. We have completed more than 5,000 services till now with 80 percent customer retention rate,” Prahllad claims.
  5. The startup claims to have over 7,000 registered users. “We are valued at Rs 3.51 crore as of September 2020,” he says.
  6. “In the coming five years, we want to create an impact where people say ‘call Homvery’ instead of ‘call technicians’ whenever they need home maintenance services,” Prahllad says.

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • This Startup’s Bio-Digester Helps 5000 Families Give up LPG, Saves 6 Million Trees

Key points:

  1. A large, black, bloated plastic-like bag spreads in the backyard of Kedar Khilare, a farmer from Phaltan, a village about 100 km away from Pune in Maharashtra.Upon a closer look, the bag seems to be filled with air, with pipes connected to one end that lead straight into the kitchen. Occasionally children in the family are seen jumping and playing over it.“It is a biogas plant,” Kedar explains. Thanks to the system, Kedar says that he has stopped buying LPG cylinders for his family for almost two years now.
  2. However, Sistema Bio, a company headquartered in Pune selling innovative biodigesters, conducted a demonstration camp in the village and showed its benefits in 2018.
  3. Piyush Sohani, a manager of the Sistema Bio company, explains, “These biodigesters are made from an industrial geo-membrane, with a lifespan stretching up to 20 years.”

(Your Story, 8 October 2020) News Link

  • दिल्ली निवासी कृतिका सोढ़ी बुनाई को मानती हैं तनाव दूर करने का सबसे अच्छा जरिया, अपनी नानी के साथ शुरू किया गया उनका स्टार्ट अप देश भर में नाम कमा रहा है

Key points:

  1. जब नानी को देखकर कृतिका ने खुद बुनाई सीखी तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि यह काम उसके लिए एक थैरेपी की तरह है
  2. पहले आशा पुरी अपने घर के सदस्यों के लिए बुनाई करके सिर्फ एक कुशल गृहिणी कहलाती थीं, वहीं अब कृतिका की समझदारी से एक सफल आंत्रप्रेन्योर कहलाती हैं
  3. कृतिका एमबीए ग्रेजुएट है। नानी के साथ किए गए अपने स्टार्ट अप का नाम उसने ‘विद लव, फ्रॉम ग्रैनी’ रखा है। सोशल मीडिया पर भी इन दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया जा रहा है।

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link

  • झारखंड के छात्र ने बनाया सोशल मीडिया एपइंडो बडी‘, व्हाट्सएपफेसबुक इंस्टाग्राम को देगा टक्कर

Key points:

  1. झारखंड के खूंटी जिले के एक छात्र ने व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को टक्‍कर देने वाला एप बनाया है। डीएवी स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाले छात्र अभिषेक महतो ने ‘मेड इन इंडिया’ सोशल मीडिया एप विकसित किया है, जिसका नाम इंडो बडी है। यह  एप फीचर्स में व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को मात देता है। यह एप इन तीनों विदेशी एप का कंबाइंड रूप है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस एप की लांचिंग की है।
  2. लांचिंग के अवसर पर अभिषेक महतो ने ‘इंडो बडी’ सोशल मीडिया एप के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इंडो बडी पर लोग पूरी दुनिया से जुड़ सकेंगे। किसी भी एप को लेकर उसके यूजर की चिंता होती है कि उसकी गोपनीयता बनी रहे। इंडो बडी एप में इसे प्राथमिक चिंता के रूप में समझते हुए उपयोगकर्ता की गोपनीयता के साथ बनाया गया है।
  3. उपयोगकर्ताओं का डेटा भारत में संग्रहीत किया जाता है और उपयोगकर्ता का डेटा उपयोगकर्ता की सहमति के बिना किसी तृतीय पक्ष के साथ कभी साझा नहीं किया जाएगा। इसमें कई तरह के फीचर्स दिए गए हैं, जिससे मैसेजेस, वीडियो को सुरक्षित रख सकते हैं। अभिषेक ने कहा कि इस एप को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य भारत को एप के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया पर जोर दे रहे हैं। इसी के तहत विदेशी एप पर से निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से इस एप का निर्माण किया है।

(Dainik Jagran, 8 October 2020) News Link

  1. चाय की दुकान छोड़ शुरू की एलोवेरा की खेती, अब 47 तरह के उत्पाद बनाते हैं राजस्थान के अजय

Key points:

  1. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला के परलीका गाँव में रहने वाले 31 वर्षीय अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती कर रहे हैं। खेती करने के साथ -साथ अजय इसकी प्रोसेसिंग भी करते हैं और खुद अपने उत्पाद तैयार करके बाज़ार में बेचते हैं। उनके उत्पाद ‘नैचुरल हेल्थ केयर’ के नाम से लगभग 20 अलग-अलग कंपनियों को जा रहे हैं।
  2. अपनी खेती और प्रोसेसिंग के काम से आज लाखों में कमाने वाले अजय ने कभी अपनी शुरूआत मात्र 10 रुपये दिन की कमाई से की थी। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और विरासत में मिला जीवन का संघर्ष और केवल दो बीघा ज़मीन।
  3. उन्होंने सामान्य पानी की बोतल में एलोवेरा का जूस भरकर बेचना शुरू किया। एक से दो, दो से चार, चार से दस बोतलें तैयार हुईं और ऐसे करते-करते उनका यह प्रोसेसिंग का काम जम गया। उनके उत्पादों को एक-दो कंपनियाँ खरीदने भी लगीं। इसके बाद, उन्होंने अपनी चाय की दुकान बंद करके सिर्फ खेती और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया। अपनी खेती के सिलसिले में कृषि विज्ञान केंद्र भी जाने लगे। यहाँ से भी उन्हें और अलग-अलग उत्पाद जैसे साबुन, क्रीम बनाने के बारे में जानकारी मिली।
  4. एक-एक कदम पर अजय ने दिन-रात मेहनत की। थोड़ी-थोड़ी बचत करके अपनी ज़मीन बढ़ाई और प्रोसेसिंग यूनिट का सेट-अप किया। आज उनके पास लगभग 27 बीघा अपनी ज़मीन है और उनकी प्रोसेसिंग यूनिट से 45 से ज्यादा उत्पाद बन रहे हैं। सफल होने के बावजूद अजय ने अपने उत्पादों में नवाचार करना नहीं छोड़ा। वह बताते हैं कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान भी नए उत्पाद बनाने पर काम किया।
  5. अजय कहते हैं कि पारंपरिक फसलों के साथ किसान छोटे स्तर से इस तरह की अलग औषधीय फसल लगाने की शुरूआत कर सकते हैं। फसल उगाने के साथ-साथ अगर किसान अपने खुद के उत्पाद भी बना लें तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं।”

(The Better India, 8 October 2020) News Link

  • कोविड ने छीनी एयरलाइन की नौकरी, पर नहीं मानी हार, घर से शुरू किया फूड डिलीवरी बिज़नेस

Key points:

  1. अपनी कुछ सेविंग और पिता से कर्ज से लेकर राहुल ने एक रसोई घर बनाया। राहुल अपने बंगले के ग्राउंड फ्लोर में रहते हैं, जबकि उनके छत पर दो कमरे बने हुए हैं। इसके एक कमरे में घर के जरूरी सामान रखे गए हैं और दूसरे का इस्तेमाल भंडारण के लिए किया जाता है। राहुल ने यहीं से अपने कारोबार को शुरूआत की।
  2. राहुल ने अपने फूड डिलीवरी सर्विस का नाम ‘शेफ सिटी’ रखा और अगस्त के पहले सप्ताह से सेवाएं शुरू कर दी।.
  3. विमान कंपनियों में काम के दौरान अपने अत्यधिक व्यस्त जीवनचर्या के मुकाबले, इन दिनों राहुल की जिंदगी बिल्कुल अलग है।इस विषय में राहुल बताते हैं, “मैं सुबह 6 बजे उठता हूँ, फिर दौड़ने या साइकिल चलाने जाता हूँ। इसके बाद, किसी दिन सब्जियाँ या अन्य सामग्रियों को खरीदने की जरूरत होती है। फिर 10 बजे तक, मैं खाने को बनाने के लिए सब्जियाँ उबालने, ग्रेवी बनाने आदि का काम पूरा करता हूँ।”राहुल बताते हैं कि उनके पास एक हेल्पर है, जिसे व्यंजनों के बारे में अच्छी जानकारी है और दोनों मिलकर खाना बनाते हैं।
  4. वह बताते हैं, “कभी -कभी तो एक दिन में 20 ऑर्डर तक आ जाते हैं। इनमें से कुछ बैचलर या पेशेवर हमारे नियमित ग्राहक हैं। हमें स्वाद की जरूरतों के अनुसार मशालेदार, वैराईटी के ऑर्डर मिलते हैं।”

(The Better India, 8 October 2020) News Link

  • चेन्नई की निशा रामासामी बच्चों के लिए लकड़ी से बना रही हैं डेवलपमेंटल खिलौने, पांच साल पहले अपनी तीन महीने की बेटी की खातिर शुरू किया था ये काम

Key points:

  1. उनके बनाए प्रोडक्ट अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं
  2. फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है
  3. तब निशा ने नीम की लकड़ी से शिशु के लिए टीथर और रेटल्स बनाना शुरू किया। निशा के अधिकांश मिलने-जुलने वाले लोग भी पैरेंट्स हैं। उन्हें निशा का ये क्रिएशन बहुत पसंद आया। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी निशा को इसी तरह के खिलौने बनाने के ऑर्डर दिए। यहीं से निशा के फाउंडेशन ‘अरिरो वुडन टॉयज’ की शुरुआत हुई। निशा ने पति वसंत के साथ मिलकर 2018 में इसे शुरू किया।
  4. वहां से लौटने के बाद निशा ने लोकल कारीगरों को खिलौने बनाने से जुड़ी कई बारीकियों को सीखाया। अपने स्टार्ट अप के जरिये निशा नौनिहालों के लिए पजल्स, रेटल्स, टीथर्स, स्लाइडर्स, स्टेप स्टूल और इंडोर जिम एसेसरीज डिजाइन करती हैं। उनके बनाए प्रोडक्ट्स अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link

  • यूट्यूब से आया आइडिया तो पड़ोसियों से उधार लेकर, घर में एक कमरे से शुरू किया मसाला पैकिंग का काम, हर महीने 45 हजार कमाई

Key points:

  1. जयपुर के अमित कुमार ने जब धंधा शुरू करने का सोचा तब जेब में महज दस हजार रुपए थे, कहते हैं, जिनसे पैसे लिए थे, उनके पैसे वापस कर दिए और अब मेरे पास की खुद की मशीनें हैं
  2. अमित के माता-पिता और बेटा भी उनके साथ में काम में हाथ जुटाते हैं, पत्नी घर का कामकाज करती हैं, मां ब्लिस्टर में मटेरियल भरतीं हैं, अमित मशीन में उसे पैक करते हैं, बेटा पैकेट एक जगह पर रखता है

(Dainik Bhaskar, 8 October 2020) News Link